कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी से चेन्नई में खाने-पीने के दाम बढ़ने की संभावना
चेन्नई, 2 मई (आईएएनएस)। कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों के दाम में वृद्धि के बाद शहर भर के रेस्तरां में खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी होने की उम्मीद जताई गई है, जिससे होटल-रेस्तरां और आम जनता दोनों पर काफी प्रभाव पड़ सकता है।
इससे रेस्टोरेंट को बढ़ते परिचालन खर्चों से निपटने में मुश्किल हो रही है। जिसके चलते आने वाले दिनों में इडली, डोसा जैसे सामान्य नाश्ते की कीमतों में भी 40 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है।
उद्योग जगत के अनुमानों के अनुसार, पोंगल की एक थाली जिसकी कीमत वर्तमान में 80 हजार है, बढ़कर लगभग 115 रुपए हो सकती है, जबकि डोसे की कीमतें 150 रुपए से बढ़कर 200 रुपए से अधिक हो सकती हैं।
यह उछाल 19 किलोग्राम के कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में भारी वृद्धि के बाद आया है, जिसकी चेन्नई में कीमतें 3,200 रुपए से ऊपर पहुंच गई हैं। इसके विपरीत, घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं है। इस वजह से व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं के लिए लागत का अंतर और भी बढ़ गया है।
रेस्तरां संचालकों का कहना है कि इस वृद्धि के कारण अतिरिक्त खर्चों को वहन करने के लिए बहुत कम गुंजाइश बचती है, जिससे उन्हें यह बोझ ग्राहकों पर डालने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
कई प्रतिष्ठान रोजाना का खाना पकाने के लिए एलपीजी पर अत्यधिक निर्भर हैं, कुछ प्रतिष्ठान प्रतिदिन 5 से 10 सिलेंडर तक खपत करते हैं। परिणामस्वरूप ऐसे व्यंजनों की तैयारी कम कर दी है जो गैस की ज्यादा खपत से बनते है।
हालांकि कुछ रेस्तरां ने बिजली से खाना पकाने के विकल्पों की ओर रुख करने पर विचार किया है, लेकिन बिजली की महंगी दरों ने भी अधिकांश के लिए इस बदलाव को आर्थिक रूप से अव्यवहार्य बना दिया है।
आतिथ्य सत्कार क्षेत्र वित्तीय दबाव को कम करने के लिए बिजली दरों में कमी और कर रियायतों सहित राहत उपायों की मांग कर रहा है। इसका असर सिर्फ रेस्टोरेंट तक ही सीमित नहीं है। निजी हॉस्टल और पेइंग गेस्ट आवास भी बढ़ती लागत का सामना कर रहे हैं, क्योंकि वे खाना पकाने के लिए कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों आपूर्ति पर निर्भर हैं।
हालांकि, तेल कंपनियों द्वारा ऐसे कई ऑपरेटरों को औपचारिक रूप से वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के रूप में मान्यता नहीं दी जाती है, जिससे उन्हें निजी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर रहना पड़ता है।
इसके चलते आपूर्ति अनियमित हो गई है और कुछ मामलों में कमी के दौरान कीमतें काफी बढ़ गई हैं।
उद्योग से जुड़े हितधारकों का कहना है कि यदि ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने या क्षेत्र विशेष को आर्थिक राहत देने के ठोस उपाय नहीं किए गए, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इससे न केवल आम उपभोक्ताओं के लिए खाद्य वस्तुएं महंगी हो जाएंगी, बल्कि लघु एवं मध्यम श्रेणी के खाद्य उद्यमों के अस्तित्व पर भी संकट गहरा सकता है।
--आईएएनएस
एसके/एएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
सरकार ने किया स्वदेशी सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम का परीक्षण, लोगों के फोन पर आया अलर्ट
नई दिल्ली, 2 मई (आईएएनएस)। भारत ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। शनिवार को देशव्यापी मोबाइल-आधारित आपदा संचार प्रणालियों का शुभारंभ किया गया। इस दौरान, शनिवार लोगों को मोबाइल फोन पर अत्यंत गंभीर चेतावनी का संदेश आया।
दरअसल, स्वदेशी सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम का देशव्यापी परीक्षण चल रहा है, ताकि आपदा चेतावनियों का त्वरित प्रसार सुनिश्चित हो। इसी क्रम में सरकार ने शनिवार को परीक्षण अलर्ट भेजा।
लोगों को यह अलर्ट हिंदी और अंग्रेजी में एक साथ भेजा गया, जिसमें लिखा, भारत ने स्वदेशी तकनीक का उपयोग करते हुए सेल ब्रॉडकास्ट सेवा शुरू की है, जिससे नागरिकों को आपदा की तत्काल सूचना मिल सकेगी। सतर्क नागरिक, सुरक्षित राष्ट्र। इस संदेश को प्राप्त करने पर जनता को कोई कार्रवाई करने की आवश्यकता नहीं है। यह एक परीक्षण संदेश है।
मोबाइल-आधारित आपदा संचार प्रणाली संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग की ओर से भारत सरकार के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए ) के सहयोग से विकसित की गई है, ताकि नागरिकों तक महत्वपूर्ण जानकारी का समय पर प्रसार सुनिश्चित हो।
संचार मंत्रालय के अनुसार, यह प्रणाली अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ की ओर से अनुशंसित कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (सीएपी) पर आधारित है। यह वर्तमान में भारत के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चालू है व भौगोलिक रूप से लक्षित क्षेत्रों में मोबाइल उपयोगकर्ताओं को एसएमएस के माध्यम से आपदा और आपातकालीन अलर्ट प्रदान करती है।
इस प्रणाली का उपयोग आपदा प्रबंधन प्राधिकारियों की ओर से व्यापक रूप से किया गया है, जिससे प्राकृतिक आपदाओं, मौसम चेतावनियों और चक्रवाती घटनाओं के दौरान अब तक 19 से अधिक भारतीय भाषाओं में 134 अरब से अधिक एसएमएस अलर्ट प्रसारित किए गए हैं। सुनामी, भूकंप, बिजली गिरने और गैस रिसाव या रासायनिक खतरे जैसी मानव-निर्मित आपात स्थितियों जैसे समय-संवेदनशील परिस्थितियों में अलर्ट प्रसार को और मजबूत करने के लिए, एसएमएस के साथ-साथ सेल ब्रॉडकास्ट (सीबी) प्रौद्योगिकी को पेश किया गया है।
सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम में अलर्ट एक निर्धारित भौगोलिक क्षेत्र में सभी मोबाइल उपकरणों को एक साथ प्रसारित किए जाते हैं, जिससे अलर्ट का लगभग वास्तविक समय में वितरण सुनिश्चित होता है। दूरसंचार विभाग के प्रमुख अनुसंधान और विकास केंद्र सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमेटिक्स (सी-डॉट) को इस स्वदेशी सेल ब्रॉडकास्ट-आधारित सार्वजनिक आपातकालीन अलर्ट सिस्टम के विकास और कार्यान्वयन का दायित्व सौंपा गया है।
--आईएएनएस
डीसीएच/
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