नारद जयंती पर ऐसे करें देवर्षि की पूजा, जानें विधि और शुभ मुहूर्त
हिंदू धर्म में नारद जयंती को काफी खास माना गया है। हार साल आने वाली ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को देवर्षि नारद के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं में नारद मुनि को ब्रह्मा जी के मानस पुत्र के रूप में दर्शाया गया है।
नारद जी के बारे में जो उल्लेख मिलता है उसके मुताबिक वह ब्रह्मांड के प्रथम पत्रकार थे और दिव्या संदेशवाहक के रूप में भी प्रसिद्ध थे। वह आकाश, पृथ्वी और पाताल तीनों लोकों में सूचनाओं का आदान-प्रदान करने का काम करते थे। ऐसा कहा जाता है कि नारद जयंती के दिन जो व्यक्ति देवर्षि नारद की आराधना करता है उसे शुभ फलों की प्राप्ति होती है। इससे जीवन में सुख सौभाग्य का आगमन होता। चलिए आपको शुभ मुहूर्त और पूजा विधि की जानकारी देते हैं।
नारद जयंती का शुभ मुहूर्त
1 मई की रात 10:52 से प्रतिपदा तिथि की शुरुआत हो चुकी है। इसका समापन 3 मई रात 12:49 पर होगा।
कैसे करें पूजा
- नारद जयंती के दिन नारद जी के साथ भगवान विष्णु की पूजा करना भी शुभ माना गया है। चलिए विधि जान लेते हैं।
- सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ कपड़े धारण करें। अब आपके पूरे घर में गंगाजल छिड़ककर शुद्धिकरण करना होगा।
- अब भगवान विष्णु की मूर्ति के सामने दीपक प्रज्वलित करें। इसके पहले उन्हें चंदन, ताजे फल, फूल और कुमकुम अर्पित करें।
- विष्णु जी को पंचामृत का भोग अर्पित करें। इतना ध्यान रखें कि इस भोग में तुलसी का पत्ता जरूर होना चाहिए क्योंकि इसके बिना पूजा अधूरी होती है।
- अब आपको नारद जी का ध्यान करना है और उनसे जीवन में सुख सौभाग्य की कामना करना है।
- पूजा के बाद ब्राह्मणों को भोजन जरूर करवाएं और जरूरतमंदों की मदद करें।
- इस दिन विष्णु मंदिर में बांसुरी भेंट करना शुभ माना गया है। इससे व्यक्ति को शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
Disclaimer- यहां दी गई सूचना सामान्य जानकारी के आधार पर बताई गई है। इनके सत्य और सटीक होने का दावा MP Breaking News न्यूज़ नहीं करता।
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