अमेरिका ने ट्रेड डील तोड़ी तो ऑटो टैरिफ पर हमारे ‘सभी विकल्प खुले’: यूरोपीय यूनियन
ब्रसेल्स/वाशिंगटन, 2 मई (आईएएनएस)। यूरोपीय यूनियन ने शनिवार को कहा कि यदि अमेरिका साझा व्यापार समझौते के विपरीत कदम उठाता है, तो वह अपने हितों की रक्षा के लिए “सभी विकल्प खुले” रखेगा। यह प्रतिक्रिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यूरोपीय संघ से आयातित कारों और ट्रकों पर 25 प्रतिशत टैरिफ बढ़ाने की चेतावनी के बाद आई है।
यूरोपीय आयोग के प्रवक्ता ने समाचार एजेंसी सिन्हुआ से कहा, “हम एक स्थिर और परस्पर लाभकारी ट्रांस-अटलांटिक संबंध के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। लेकिन यदि अमेरिका संयुक्त बयान के अनुरूप नहीं चलता, तो हम अपने हितों की रक्षा के लिए सभी विकल्प खुले रखेंगे।”
प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि यूरोपीय संघ पिछले साल हुए समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को सामान्य विधायी प्रक्रिया के अनुसार लागू कर रहा है और इस दौरान अमेरिकी प्रशासन को लगातार जानकारी दी जा रही है। साथ ही, ब्रसेल्स वॉशिंगटन से समझौते के तहत उसकी प्रतिबद्धताओं को लेकर स्पष्टता भी मांग रहा है।
पिछले वर्ष हुए ईयू-अमेरिका व्यापार समझौते के अनुसार, यूरोपीय संघ ने अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों पर टैरिफ निलंबित करने और कृषि-खाद्य उत्पादों के लिए टैरिफ-रेट कोटा लागू करने पर सहमति जताई थी। इसके बदले में अमेरिका ने अधिकांश यूरोपीय उत्पादों पर 15 प्रतिशत आयात शुल्क लागू करने का वादा किया था।
इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने यूरोपीय संघ से आने वाली कारों और ट्रकों पर टैरिफ बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यूरोपीय संघ मौजूदा व्यापार समझौते का पालन नहीं कर रहा है।
मरीन वन से रवाना होने से पहले ट्रंप ने कहा, “हमने यूरोपीय संघ से आने वाली कारों पर टैरिफ बढ़ाया है क्योंकि वे हमारे व्यापार समझौते का पालन नहीं कर रहे थे। यह अमेरिका के लिए अरबों डॉलर लाएगा और कंपनियों को अपने उत्पादन को तेजी से अमेरिका में स्थानांतरित करने के लिए मजबूर करेगा।”
ट्रंप ने यह भी कहा कि इस कदम का उद्देश्य वैश्विक वाहन निर्माताओं को अमेरिका में निवेश बढ़ाने के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने दावा किया कि फिलहाल अमेरिका में 100 अरब डॉलर से अधिक के ऑटो प्लांट्स निर्माणाधीन हैं, जो एक रिकॉर्ड है। इसमें जापान, दक्षिण कोरिया, कनाडा और मैक्सिको से हो रहे निवेश शामिल हैं।
टैरिफ बढ़ोतरी के इस फैसले को अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार तनाव में नई बढ़ोतरी के रूप में देखा जा रहा है, खासकर ऑटो सेक्टर में, जो लंबे समय से दोनों पक्षों के बीच विवाद का केंद्र रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह विवाद बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और आर्थिक स्थिरता पर भी पड़ सकता है।
--आईएएनएस
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बंगाल में नतीजों से पहले कानूनी घमासान: काउंटिंग टेबल पर मतगणना कर्मियों की तैनाती के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची TMC
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजों का काउंटडाउन शुरू हो चुका है, लेकिन 4 मई की तारीख से पहले राज्य की सियासत ने नया मोड़ ले लिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी ने चुनाव आयोग के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें मतगणना प्रक्रिया के दौरान हर टेबल पर केंद्र सरकार के कर्मचारियों की मौजूदगी अनिवार्य की गई है। कलकत्ता हाई कोर्ट से राहत न मिलने के बाद पार्टी ने अब शीर्ष अदालत का रुख किया है, जिससे मतगणना की प्रक्रिया पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।
क्या है टीएमसी की मुख्य आपत्ति?
टीएमसी का तर्क है कि केंद्र सरकार एक राजनीतिक दल के अधीन होती है। ऐसे में मतगणना केंद्रों पर केवल केंद्र सरकार या सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों की तैनाती से 'लेवल प्लेइंग फील्ड' यानी बराबरी का माहौल बिगड़ सकता है। पार्टी को आशंका है कि इस प्रक्रिया के दौरान मतगणना की निष्पक्षता से समझौता हो सकता है और पक्षपात की गुंजाइश बढ़ सकती है। टीएमसी ने अदालत में अपनी आशंका जताते हुए कहा है कि यह फैसला मतगणना की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।
एडिशनल सीईओ के अधिकार क्षेत्र पर सवाल
विवाद की शुरुआत तब हुई जब बंगाल के एडिशनल चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर (CEO) की ओर से एक आदेश जारी किया गया। इसमें कहा गया कि हर काउंटिंग टेबल पर सुपरवाइजर या असिस्टेंट में से कम से कम एक कर्मचारी केंद्र सरकार या पीएसयू का होना चाहिए।
टीएमसी का कहना है कि ऐसा नीतिगत आदेश केवल मुख्य चुनाव आयोग (ECI) ही जारी कर सकता है, एडिशनल सीईओ के स्तर पर यह फैसला नहीं लिया जा सकता। साथ ही, पार्टी का दावा है कि चुनाव आयोग की गाइडबुक में भी ऐसी अनिवार्य तैनाती का कहीं जिक्र नहीं है।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने क्या कहा था?
इससे पहले टीएमसी इस मामले को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट गई थी, लेकिन वहां से उसे झटका लगा। हाई कोर्ट ने साफ किया था कि काउंटिंग स्टाफ की नियुक्ति करना पूरी तरह चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि सिर्फ 'शंका' या 'शक' के आधार पर मतगणना की पूरी प्रक्रिया में दखल देने की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने भरोसा दिलाया था कि मतगणना के दौरान सीसीटीवी निगरानी, माइक्रो ऑब्जर्वर और पोलिंग एजेंटों के रूप में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम पहले से मौजूद हैं।
सुप्रीम कोर्ट में आज होगी सुनवाई
मुख्य न्यायाधीश के निर्देश के बाद इस याचिका को प्राथमिकता के आधार पर सूचीबद्ध किया गया है। अब शनिवार को जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी। मामला सीधे तौर पर 4 मई की मतगणना से जुड़ा है, इसलिए सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयोग के फॉर्मूले में कोई बदलाव करेगा या हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखेगा।
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