Kanwar Yatra: हरिद्वार से 251 फुट लंबा तिरंगा लेकर Sambhal पहुंचे 40 श्रद्धालु
संभल में आस्था के साथ देश भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला जिसके तहत हरिद्वार से 251 फुट लंबे तिरंगे से सजी कांवड़ लेकर 40 कांवड़ियों का एक जत्था यहां आया है। आयोजकों ने सोमवार को यह जानकारी दी। श्रद्धालुओं के इस समूह ने हरिद्वार की हर की पौड़ी से संभल तक लगभग 200 किलोमीटर की दूरी छह दिनों में तय की।
ये श्रद्धालु मंगलवार को सावन के पवित्र महीने में शिव तेरस के मौके पर बहजोई ब्लॉक के सादात बाड़ी गांव में प्राचीन श्री पातालेश्वर महादेव मंदिर में गंगाजल चढ़ाएंगे। इस कांवड़ का मुख्य आकर्षण 251 फुट लंबा तिरंगा है, जिसका रास्ते में कई जगहों पर स्वागत किया गया। इस कांवड़ यात्रा में 40 कांवड़ियों के अलावा, 50 से ज़्यादा ग्रामीण भी इस समूह की मदद कर रहे थे।
चंदौसी तहसील के दूधापुर गांव के चंद्रपाल सिंह ने बताया कि समूह चार अगस्त को हरिद्वार के लिए निकला था और छह दिन में यात्रा पूरी करके लौटा। उन्होंने कहा, ‘‘इस बार शिव तेरस 15 अगस्त के करीब पड़ रही थी, इसलिए हमने देशभक्ति का प्रतीक तिरंगा कांवड़ लाने का फैसला किया। तिरंगा 251 फुट लंबा है।
शायद देश में कहीं भी इतनी बड़ी कांवड़ नहीं निकाली गई है। एक अन्य प्रतिभागी टिंकू कुमार ने बताया कि समूह भगवान शिव और देवी दुर्गा की मूर्तियां लेकर चल रहा था और जय जवान, जय किसान के नारे लगा रहा था। उन्होंने कहा कि समूह के साथ चल रहा डीजे देश भक्ति के गाने भी बजा रहा था।
कांवड़ियों ने बताया कि उन्हें यात्रा के दौरान कोई परेशानी नहीं हुई और रास्ते में पुलिस बल तैनात मिला और सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध थीं। समूह सोमवार शाम करीब छह बजे अपने गांव पहुंचा, जहां कांवड़िये डीजे की धुन पर नाचते-गाते चल रहे थे। वे मंगलवार को पातालेश्वर महादेव मंदिर में गंगाजल चढ़ाएंगे और कांवड़ समर्पित करेंगे।
Arunachal Pradesh में 27 भारतीय नामों को China ने अमान्य बताया, जांगनान क्षेत्र पर जताया दावा
के जे एम वर्मा बीजिंग, 10 अगस्त चीन ने सोमवार को भारत द्वारा अरुणाचल प्रदेश के 27 स्थानों और भौगोलिक विशेषताओं को आधिकारिक भारतीय मानचित्र पर उनके मानक भारतीय नामों के साथ दर्ज किए जाने के फैसले को ‘‘अवैध और अमान्य’’ करार दिया। भारत की हालिया घोषणा पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा, ‘‘चीन, भारत द्वारा अवैध रूप से स्थापित तथाकथित ‘अरुणाचल प्रदेश’ को मान्यता नहीं देता।’’ उन्होंने विदेश मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी अपने जवाब में कहा, ‘‘भारत द्वारा चीन में लंबे समय से प्रचलित नामों को अपने तथाकथित ‘मानक नामों’ से बदलने का प्रयास अवैध और अमान्य है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इससे यह तथ्य बिल्कुल नहीं बदलता कि जांगनान क्षेत्र चीन का हिस्सा है।’’ चीन तिब्बत को ‘शीजांग’ और अरुणाचल प्रदेश को ‘जांगनान’ कहता है। चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश के कुछ स्थानों के नाम बार-बार बदले जाने के जवाब में भारत ने पिछले सप्ताह औपचारिक रूप से राज्य के 27 स्थानों और भौगोलिक विशेषताओं को आधिकारिक भारतीय मानचित्र पर उनके मानक भारतीय नामों के साथ दर्ज किया था।
चीन के नागरिक मामलों का मंत्रालय 2017 से समय-समय पर अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न स्थानों के लिए चीनी नाम जारी करता रहा है, ताकि उस क्षेत्र पर चीन के दावे को मजबूत किया जा सके। इस वर्ष अप्रैल में भी नामों की एक नयी सूची जारी की गई थी। अरुणाचल प्रदेश में स्थानों के नाम बदलने की चीन की हरकत को भारत ने हमेशा स्पष्ट रूप से खारिज किया है।
भारत ने लगातार ऐसे कदमों को ‘‘निरर्थक और बेतुका’’ बताया है और कहा है कि इस तरह के प्रयास इस ‘‘अटल’’ सच्चाई को नहीं बदल सकते कि अरुणाचल प्रदेश ‘‘हमेशा भारत का अभिन्न हिस्सा रहा है, है और रहेगा।
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