Rajya Sabha में बकाया बिल पर शव रोकने वाले Private Hospitals पर सख्त कानून की मांग
राज्यसभा में सोमवार को भाजपा के एक सदस्य ने निजी अस्पतालों में बिल का पूरा भुगतान नहीं होने की स्थिति में मरीज के शव परिजनों को नहीं सौंपे जाने का मुद्दा उठाया और सरकार से इस संबंध में प्रभावी कानून बनाए जाने की मांग की। भाजपा सदस्य राघव चड्ढा ने विशेष उल्लेख के जरिए यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा, ‘‘आज कुछ निजी अस्पतालों ने इंसानों के शवों को जबरन वसूली का जरिया बना लिया है।’’ उन्होंने कहा कि इसी साल जनवरी में अल्मोड़ा की एक महिला को आपात स्थिति में एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां दो घंटे के इलाज के बाद उनकी मृत्यु हो गई।
भाजपा सदस्य ने कहा, ‘‘अस्पताल ने उनके परिवार को 80 हजार रुपये का लंबा-चौड़ा बिल थमाया और परिवार ने व्यवस्था कर 57 हजार रुपये का भुगतान किया। लेकिन 23 हजार रुपये बकाया था। परिवार रोता रहा, लेकिन अस्पताल ने शव देने से इनकार कर दिया।
अस्पताल ने परिवार की गाड़ी रोकने की धमकी तक दी।’’ चड्ढा ने कहा कि पुलिस के हस्तक्षेप के बाद ही शव और मृत्यु प्रमाण पत्र सौंपा गया। उन्होंने कहा कि यह किसी एक निजी अस्पताल की कहानी नहीं है और पिछले कुछ वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों से ऐसी कई खबरें सामने आ चुकी हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति के लिए उच्चतम न्यायालय का निर्देश भी है लेकिन ऐसी घटनाएं हो रही हैं।
उन्होंने भारत सरकार से इस संबंध में एक सख्त कानून बनाए जाने की मांग की ताकि ऐसी स्थिति में अस्पताल शव देने से इनकार नहीं कर सके। विशेष उल्लेख के जरिए ही भाजपा के ही दिनेश शर्मा ने नकली दवाइयां से जुड़ा मुद्दा उठाया और कहा कि यह केवल धोखाधड़ी या चोरी का मामला नहीं बल्कि संगठित अपराध का जाल है जो नागरिकों के जीवन और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था दोनों को गंभीर क्षति पहुंचा रहा है। भाजपा के केसरी देव सिंह झाला ने बच्चों द्वारा मोबाइल फोन पर अधिक समय बिताए जाने की समस्या का जिक्र किया और इस समय में प्रभावी कदम उठाए जाने की मांग की।
वहीं भाजपा की कल्पना सैनी ने ई-कचरा का मुद्दा उठाया और उसके प्रभावी तरीके से निपटान की आवश्यकता पर जोर दिया। विशेष उल्लेख के जरिए ही कई अन्य सदस्यों ने भी लोक महत्व से जुड़़े अपने-अपने मुद्दे उठाए।
Finance Ministry 17 अगस्त से आयोजित करेगा PSBs सम्मेलन, 7 प्रमुख विषयों पर होगा मंथन
वित्त मंत्रालय अगले सप्ताह सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) का दो दिवसीय सम्मेलन आयोजित करेगा। इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों के शीर्ष अधिकारी शामिल होंगे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी के 17-18 अगस्त को आयोजित होने वाले इस सम्मेलन में शामिल होने की उम्मीद है।
वित्त मंत्रालय ने सोमवार को बयान में कहा कि यह कार्यक्रम भाग लेने वाले संस्थानों को बेहतर कार्यप्रणालियों को साझा करने, बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले कदमों की पहचान करने और बैंक क्षेत्र के लिए समयबद्ध तथा व्यावहारिक रणनीति तैयार करने का मंच उपलब्ध कराएगा। मंत्रालय के अनुसार, सम्मेलन में सात प्रमुख विषयों... जमा राशि जुटाना, युवाओं के लिए बैंकिंग सेवाएं, निवेश चक्र को समर्थन देना, वैश्विक क्षमता केंद्रों को सहयोग, कृषि और बागवानी मूल्य शृंखला के लिए बुनियादी ढांचा, क्रेडिट कार्ड कारोबार को नए रूप में विकसित करना, प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को ऋण...पर मंथन किया जाएगा। मंत्रालय ने कहा कि प्रत्येक विषय पर चर्चा के लिए संस्थानों का एक समूह बनाया जाएगा।
ये समूह सफल कार्यप्रणालियों की पहचान करेंगे और ऐसे उपाय तैयार करेंगे, जिन्हें पूरी बैंकिंग व्यवस्था में लागू किया जा सके। वित्त मंत्रालय के अनुसार, जमा राशि जुटाने से जुड़े सत्र में सस्ते ऋण उपलब्ध कराने के लिए बैंकों के संसाधन आधार को मजबूत करने पर ध्यान दिया जाएगा। वहीं, निवेश चक्र को समर्थन देने से जुड़ी चर्चा में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के समय पर क्रियान्वयन को आसान बनाने के उपायों पर विचार किया जाएगा।
सम्मेलन में वैश्विक क्षमता केंद्रों के लिए बेहतर परिवेश विकसित करने और कृषि एवं बागवानी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने पर भी चर्चा होगी। इसमें फसल कटाई के बाद के बुनियादी ढांचे की कमियों को दूर करने और बाजार से बेहतर संपर्क उपलब्ध कराने के उपाय शामिल होंगे। इसके अलावा, बैठक में ग्रामीण मूल्य श्रृंखला के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, वंचित वर्गों तक ऋण पहुंचाने के लिए प्राथमिक क्षेत्र कर्ज व्यवस्था को बेहतर बनाने और युवाओं की जरूरतों के अनुरूप बैंकिंग उत्पाद तैयार करने जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होगा।
सम्मेलन में करीब 125 प्रतिभागी शामिल होंगे। इनमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों के चेयरमैन, प्रबंध निदेशक और कार्यकारी निदेशक शामिल होंगे। इन संस्थानों में नाबार्ड, निर्यात-आयात बैंक, सिडबी, एनएचबी, आईआईएफसीएल, आईएफसीआई और राष्ट्रीय अवसंरचना वित्तपोषण और विकास बैंक (नैबफिड) जैसे संस्थान शामिल हैं।
इसके अलावा भारतीय बैंक संघ और वित्तीय सेवा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी भाग लेंगे।
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