आईटी क्षेत्र से एक अहम खबर सामने आ रही है, जहां अमेरिकी शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनी कॉग्निजेंट अपने बड़े पुनर्गठन की तैयारी में है। बताया जा रहा है कि कंपनी अपने ‘प्रोजेक्ट लीप’ कार्यक्रम के तहत हजारों कर्मचारियों की छंटनी कर सकती है, जिससे आईटी उद्योग में एक बार फिर अनिश्चितता का माहौल बनता दिख रहा है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, कॉग्निजेंट करीब 7 हजार से लेकर 15 हजार तक नौकरियां कम कर सकती है। यह संख्या इस बात पर निर्भर करेगी कि कर्मचारियों को दिए जाने वाले मुआवजा पैकेज की अवधि तीन महीने होगी या छह महीने, और किन-किन क्षेत्रों में इसका असर पड़ेगा। गौरतलब है कि कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रवि कुमार के नेतृत्व में यह दूसरा बड़ा पुनर्गठन कार्यक्रम है। इससे पहले ‘नेक्स्टजेन’ योजना के तहत भी कंपनी ने अपने संचालन ढांचे में बदलाव किया था।
बता दें कि उस समय कंपनी ने धीमी विकास दर के चलते करीब 400 मिलियन डॉलर खर्च कर पुनर्गठन किया था, जिसमें 3500 गैर-राजस्व वाले पदों को खत्म किया गया था। वर्तमान में कंपनी के कुल कर्मचारियों की संख्या करीब 3 लाख 57 हजार 600 है, जिनमें से अधिकांश भारत में कार्यरत हैं। मौजूद आंकड़ों के अनुसार भारत में करीब 2 लाख 56 हजार 900 कर्मचारी हैं, जिससे यहां इसका असर ज्यादा देखने को मिल सकता है।
कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी जतिन दलाल ने संकेत दिए हैं कि ‘प्रोजेक्ट लीप’ का उद्देश्य लागत में कमी लाना और संचालन को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अनुरूप बनाना है। उनका कहना है कि इससे कंपनी के मुनाफे में सुधार हो सकता है। गौरतलब है कि हाल के महीनों में कंपनी के शेयरों में भी गिरावट आई है और इस साल की शुरुआत से अब तक इसके मूल्य में करीब एक तिहाई कमी दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आईटी क्षेत्र इस समय एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। मौजूद जानकारी के अनुसार, पारंपरिक सेवाओं की मांग कमजोर हो रही है, वहीं कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते इस्तेमाल से काम करने के तरीके बदल रहे हैं। इसके अलावा वैश्विक कंपनियां अब अपने काम खुद संभालने की ओर भी बढ़ रही हैं, जिससे आईटी सेवा कंपनियों पर दबाव बढ़ा है।
उद्योग विशेषज्ञ फिल फर्श्ट का कहना है कि यह कदम सिर्फ लागत घटाने के लिए नहीं, बल्कि कंपनी को नए दौर के लिए तैयार करने के लिए उठाया जा रहा है। वहीं नीवे ग्लोबल के प्रमुख प्रवीण भदाड़ा के अनुसार, यह बदलाव इसलिए जरूरी हो गया है क्योंकि अब ग्राहक सिर्फ काम नहीं बल्कि परिणाम चाहते हैं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता इस पूरी व्यवस्था को बदल रही है।
गौरतलब है कि जहां एक ओर कंपनी मध्य स्तर के कर्मचारियों की संख्या कम कर सकती है, वहीं दूसरी ओर नए इंजीनियरों की भर्ती भी जारी है। बताया जा रहा है कि कंपनी ने हाल ही में करीब 6 हजार नए इंजीनियरों को शामिल किया है और आगे भी निचले स्तर पर भर्ती बढ़ाने की योजना है।
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भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक स्तर पर हलचल देखने को मिली है, जहां हालिया बयान को लेकर बांग्लादेश ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। यह मामला असम के मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए एक बयान के बाद सामने आया है, जिस पर बांग्लादेश ने औपचारिक विरोध जताया है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने भारत के कार्यवाहक उच्चायुक्त पवन बधे को तलब किया और उनसे इस मुद्दे पर चर्चा की। यह बैठक 30 अप्रैल 2026 को ढाका में हुई, जहां दक्षिण एशिया प्रभाग की महानिदेशक इशरत जहां ने बांग्लादेश का पक्ष भारतीय राजनयिक के सामने रखा है।
बता दें कि असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 26 अप्रैल को कहा था कि असम में 20 विदेशी नागरिकों को पकड़ा गया और उन्हें वापस बांग्लादेश भेज दिया गया। इसी बयान को लेकर बांग्लादेश ने नाराजगी जताई है। गौरतलब है कि बांग्लादेश ने इस टिप्पणी को दोनों देशों के रिश्तों के लिहाज से अनुचित और अपमानजनक बताया है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, बांग्लादेश का कहना है कि इस तरह के सार्वजनिक बयान द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं और ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर संयम बरतना जरूरी है। बांग्लादेश ने यह भी स्पष्ट किया कि पड़ोसी देशों के बीच संबंधों को मजबूत बनाए रखने के लिए संवाद और संतुलित भाषा का इस्तेमाल बेहद अहम होता है।
हालांकि, इस पूरे मामले पर बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय की ओर से कोई औपचारिक लिखित बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन कूटनीतिक सूत्रों के हवाले से यह जानकारी सामने आई है कि ढाका ने अपनी असहमति स्पष्ट रूप से भारत के सामने रख दी है।
गौरतलब है कि भारत और बांग्लादेश के संबंध पिछले कुछ वर्षों में कई क्षेत्रों में मजबूत हुए हैं, जिनमें व्यापार, सुरक्षा और सीमा प्रबंधन शामिल हैं। ऐसे में इस तरह के बयान और उस पर प्रतिक्रिया दोनों देशों के लिए संवेदनशील माने जा रहे हैं।
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