भारत-यूएई सीईपीए से व्यापार में मजबूत बढ़ोतरी और व्यवसायों को नए अवसर मिल रहे हैं: पीयूष गोयल
नई दिल्ली, 1 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि भारत-यूएई व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) व्यापार को तेजी से बढ़ा रहा है और भारतीय व्यवसायों के लिए नए अवसर खोल रहा है।
इस समझौते के लागू होने के चार साल बाद भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच आर्थिक संबंध कई क्षेत्रों में काफी मजबूत हुए हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में गोयल ने कहा कि इस समझौते ने भारतीय किसानों, एमएसएमई और अन्य कारोबारों के लिए बड़े बदलाव वाले अवसर पैदा किए हैं।
उन्होंने कहा, चार साल पहले जब भारत-यूएई सीईपीए लागू हुआ, तब इसने किसानों, एमएसएमई और व्यवसायों के लिए नए और बड़े अवसर पैदा किए।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि दोनों देशों के बीच वस्तु व्यापार 100 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है, जो इस समझौते के बाद तेजी से बढ़ोतरी को दर्शाता है। वहीं, सेवाओं का व्यापार भी लगातार बढ़ रहा है, जिससे भारतीय कंपनियों को नए बाजार मिल रहे हैं और उनकी कमाई के अवसर बढ़ रहे हैं।
गोयल ने कहा, द्विपक्षीय व्यापारिक वस्तुओं का व्यापार मजबूती से बढ़ा है और 100 अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर गया है, वहीं सेवाओं का व्यापार भी लगातार बढ़ रहा है, जिससे नए बाजार और ज्यादा लाभ मिल रहा है।
उन्होंने बताया कि रत्न और आभूषण, इंजीनियरिंग सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स और कृषि जैसे क्षेत्रों में तेजी से विस्तार हो रहा है। साथ ही यूएई से भारत में विदेशी निवेश (एफडीआई) और भारत के विदेशी निवेश भी बढ़ रहे हैं, जो दोनों देशों के मजबूत होते आर्थिक संबंधों को दिखाते हैं।
मंत्री ने आगे कहा कि इन क्षेत्रों में हुई प्रगति का सीधा फायदा निर्यातकों और कारोबारियों को मिल रहा है, जिससे वैश्विक व्यापार में भारत की स्थिति मजबूत हो रही है।
गोयल ने यह भी कहा कि यूएई से भारत में बढ़ता निवेश और भारतीय कंपनियों का विदेशों में बढ़ता निवेश दोनों देशों के गहरे होते आर्थिक रिश्तों को दर्शाता है।
इस बीच, उन्होंने बताया कि आज ही उन्होंने यूके के व्यापार मंत्री पीटर काइल के साथ वर्चुअल बैठक की, जिसमें व्यापार और निवेश बढ़ाने पर चर्चा हुई।
दोनों नेताओं ने भारत-यूके व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (सीईटीए) का पूरा लाभ उठाने के तरीकों पर भी बातचीत की, जिसकी जानकारी मंत्री ने सोशल मीडिया एक्स पर दी।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
कार्यस्थल पर ‘शून्य समझौता’: दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली का श्रमिक दिवस पर बड़ा संकल्प
सोल, 1 मई (आईएएनएस)। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने शुक्रवार को चियोंग वा डे में श्रमिक दिवस के अवसर पर कार्यस्थल पर सुरक्षा को लेकर बड़ा ऐलान किया।
उन्होंने कहा, मैं कार्यस्थल सुरक्षा पर न तो कोई समझौता करूंगा और न ही कोई रियायत दूंगा, और उन्होंने एक ऐसे सामान्य देश के निर्माण का संकल्प लिया जहां किसी भी श्रमिक को काम पर अपनी जान जोखिम में डालने की जरूरत न पड़े।
उन्होंने कहा, श्रमिकों की सुरक्षा किसी भी राष्ट्र और किसी भी व्यवसाय का सबसे बुनियादी दायित्व है।
योनहाप समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ने श्रमिक कल्याण और व्यावसायिक विकास के परस्पर विरोधी होने की धारणा का भी खंडन किया और इस बात पर जोर दिया कि दोनों एक दूजे पर निर्भर हैं।
उन्होंने कहा, हम केवल इस पुरानी सोच से मुक्त होकर ही आगे बढ़ सकते हैं कि व्यापार समर्थक होने का मतलब श्रमिक विरोधी होना है। उन्होंने कहा, विकास का भविष्य तभी है जब श्रमिक इसके पीछे खड़े हों।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से नौकरियों को होने वाले खतरे की बढ़ती चिंताओं के बीच, राष्ट्रपति ने जनता को आश्वस्त करने का प्रयास किया कि सरकार उत्पादकता से अधिक लोगों को प्राथमिकता देती है।
उन्होंने कहा, जैसे-जैसे प्रौद्योगिकी आगे बढ़ रही है, प्रचलित धारणा यह है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता से चलने वाली मशीनें बड़े पैमाने पर मानव श्रम का स्थान ले लेंगी। उन्होंने कहा, “लेकिन उत्पादकता के नाम पर श्रमिकों से बलिदान की मांग करना उचित नहीं है” और यह भी जोड़ा कि श्रमिकों को पीछे छोड़ने वाला विकास वास्तव में विकास नहीं है।
ली ने श्रमिकों को “अर्थव्यवस्था की रीढ़” बताया, जो जमीनी स्तर पर अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से चलाते हैं और विकास को गति देने वाले व्यय को संचालित करते हैं।
“प्रौद्योगिकी के विकास के साथ, प्रचलित धारणा यह है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा संचालित मशीनें बड़े
यह पहली बार था जब चेओंग वा डे में श्रमिक दिवस कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में श्रम, प्रबंधन और सरकार के प्रमुख व्यक्तियों के साथ-साथ विभिन्न व्यवसायों से जुड़े श्रमिकों सहित लगभग 130 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
यह पहली बार था जब दो प्रमुख श्रमिक संघों - फेडरेशन ऑफ कोरियन ट्रेड यूनियंस और कोरियन कन्फेडरेशन ऑफ ट्रेड यूनियंस (जिनके राजनीतिक विचार भिन्न माने जाते हैं) ने इस तरह के कार्यक्रम में भाग लिया।
दक्षिण कोरिया में शुरू में 1 मई को लेबर डे मनाया जाता था, जिसे 1963 में बदलकर वर्कर्स डे कर दिया गया था। पिछले साल सरकार ने इसका नाम वापस लेबर डे कर दिया और इस साल की शुरुआत में इसे राष्ट्रीय अवकाश घोषित कर दिया।
--आईएएनएस
केआर/
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