राजेश खन्ना संग रिश्ते पर अनीता आडवाणी ने फिर दिया बयान, बोलीं- 'मैंने पत्नी का अधिकार मांगा था, शादी का नहीं'
Rajesh Khanna Anita Advani: अनीता आडवाणी और दिवंगत सुपरस्टार राजेश खन्ना के रिश्ते को लेकर चल रही लंबी कानूनी लड़ाई एक बार फिर सुर्खियों में है. जी हां, हाल ही में बॉम्बे हाई कोर्ट ने अनीता आडवाणी की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने राजेश खन्ना के साथ अपने लिव-इन रिलेशनशिप को वैध विवाह के रूप में मान्यता देने की मांग की थी. ऐसे में अब अदालत के इस फैसले के बाद अनीता ने खुलकर अपनी बात रखी है और साफ किया है कि वो इस लड़ाई से पीछे हटने वाली नहीं हैं.
कोर्ट का फैसला
1 अप्रैल 2026 को दिए गए फैसले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि अनीता और राजेश खन्ना का संबंध लिव-इन रिलेशनशिप की केटेगरी में आता है और ये हिंदू विवाह अधिनियम के तहत वैध शादी के मानदंडों को पूरा नहीं करता. अदालत ने स्पष्ट किया कि विवाह की कानूनी मान्यता के लिए आवश्यक औपचारिकताएं इस संबंध में सिद्ध नहीं होतीं.
करीब एक दशक तक साथ रहने का दावा
अनीता आडवाणी का कहना है कि वो 2002 से 2012 तक, लगभग दस वर्षों तक राजेश खन्ना के साथ रहीं. उन्होंने ये भी दावा किया कि दोनों ने निजी तौर पर विवाह किया था, जो घर के मंदिर में एक छोटे से समारोह के रूप में सम्पन्न हुआ. हालांकि, इस दावे को राजेश खन्ना के परिवार विशेष रूप से डिंपल कपाड़िया और ट्विंकल खन्ना ने हमेशा खारिज किया है.
“मैंने पत्नी का अधिकार मांगा था, शादी का नहीं”
हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में अनीता ने कहा कि उन्होंने अदालत से “शादी का अधिकार” नहीं बल्कि “पत्नी के रूप में अधिकार” मांगा था. उनका तर्क है कि घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत ऐसे संबंध, जहां दो एडल्ट पति-पत्नी की तरह साथ रहते हैं, उन्हें विवाह-समान मान्यता मिल सकती है. उनके अनुसार, “विवाहित होना जरूरी नहीं है, बल्कि रिश्ते की प्रकृति महत्वपूर्ण है.”
अदालत के फैसले पर निराशा
अदालत के फैसले पर निराशा जताते हुए अनीता ने कहा कि उन्हें 14 साल बाद भी अपने रिश्ते को साबित करने का पूरा अवसर नहीं मिला. उन्होंने सवाल उठाया कि बिना मुकदमे की डिटेल्ड सुनवाई के किसी दीवानी मामले का निपटारा कैसे किया जा सकता है. उनका कहना है, “यह न्याय का मजाक है. मैं थकी नहीं हूं और कभी नहीं थकूंगी.”
समझौते की कोशिश भी रही नाकाम
अनीता ने खुलासा किया कि एक समय पर समझौते की बात भी सामने आई थी. उनके अनुसार, राजेश खन्ना के परिवार की ओर से समझौते का सुझाव दिया गया था, लेकिन ये स्पष्ट नहीं हो पाया कि शर्तें क्या थीं. शुरुआती अनिच्छा के बाद वो इस पर विचार करने को तैयार हुईं, लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकला.
“हम पति-पत्नी की तरह रहते थे”
अपने रिश्ते को लेकर अनीता का कहना है कि ये पूरी तरह निजी मामला था और दोनों एक-दूसरे के साथ सहज थे. उन्होंने दोहराया कि एक निजी समारोह में राजेश खन्ना ने उन्हें सिंदूर लगाया और मंगलसूत्र पहनाया, जिसे वो अपनी शादी का प्रमाण मानती हैं.
'मैं उनसे प्यार करती थी'
अनीता ने ये भी स्पष्ट किया कि उनका रिश्ता किसी स्वार्थ पर आधारित नहीं था. उनके शब्दों में, “मैं उनके साथ इसलिए थी क्योंकि मैं उनसे प्यार करती थी, न कि इसलिए कि वो सुपरस्टार थे या उनके पास पैसा था.” उन्होंने यह भी माना कि पारिवारिक परिस्थितियों के कारण औपचारिक शादी संभव नहीं थी.
सम्मान की लड़ाई
अनीता का कहना है कि उनकी ये लड़ाई सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि सम्मान की भी है. उनका दावा है कि इस पूरे विवाद के कारण उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई है और उन्हें मानसिक और सामाजिक रूप से काफी नुकसान हुआ है. उन्होंने आरोप लगाया कि राजेश खन्ना के अंतिम दिनों में उन्हें अस्पताल में उनसे मिलने नहीं दिया गया. उनके मुताबिक, “मुझे कहा गया कि वह मुझसे मिलना नहीं चाहते, जो बिल्कुल गलत था.”
वसीयत को लेकर भी दावा
अनीता ने यह भी दावा किया कि राजेश खन्ना ने एक वसीयत बनाई थी, जो अब गायब है. हालांकि, इस दावे का कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है.
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पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों से पहले बीजेपी ने बुलाई महत्वपूर्ण बैठक, जानें क्या है वजह
West Bengal Elections 2026: पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे सोमवार यानी 4 मई को आने वाले हैं. पश्चिम बंगाल बीजेपी के लिए काफी अहम राज्य है. ऐसे में बंगाल के चुनावी नतीजों से पहले बीजेपी ने अहम बैठक बुलाई है. दरअसल, 4 मई को होने वाले महत्वपूर्ण विधानसभा चुनावों की मतगणना से पहले बीजेपी ने तैयारियों की समीक्षा के लिए शनिवार को कोलकाता में एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है.
बूथ स्तर पर लिया जाएगा तैयारियों का जायजा
इस बैठक में पार्टी नेतृत्व बूथ स्तर पर प्रबंधन और समन्वय तंत्र का आकलन करेगा, ताकि पूरी प्रक्रिया सुचारू रूप से चल सके. इसके अलावा, पार्टी 4 मई को होने वाले मतदान के दिन के लिए अपनी रणनीति और दृष्टिकोण को अंतिम रूप देगी. न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, चुनाव प्रचार के दौरान तैनात सभी 'प्रवासी' (बाहरी नेता), जिनमें सांसद और विधानसभा सदस्य शामिल हैं, को बैठक में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है. इन नेताओं को विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं और वे अपने-अपने क्षेत्रों से विस्तृत जानकारी और अपडेट उपलब्ध कराएंगे.
एग्जिट पोल के अनुमान
बता दें कि पश्चिम बंगाल में इस बार दो चरण में 23 और 29 अप्रैल को मतदान हुआ था. दूसरे चरण के मतदान के बाद आए अधिकांश एग्जिट पोल ने बीजेपी की जीत की भविष्यवाणी की है, जिससे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर बीजेपी को स्पष्ट बढ़त मिली है. हालांकि कुछ एग्जिट पोल में टीएमसी की जीत की भविष्यवाणी भी की गई है.
मैट्रिज एग्जिट पोल के अनुमानों के मुताबिक, बीजेपी को बंगाल में 146 से 161 सीटें मिलने की संभावना है, जबकि टीएमसी को लगभग 125 से 140 सीटें मिलने का अनुमान है. पश्चिम बंगाल विधानसभा के 294 सदस्यों में अन्य पार्टियों को भी छह से दस सीटें मिल सकती हैं. एग्जिट पोल के अनुमानों से बीजेपी में काफी उत्साह है. इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि वे बीजपी के मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह के लिए पश्चिम बंगाल का दौरा करेंगे.
ममता को अपनी जीत का पूरा भरोसा
उधर बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी टीएमसी की जीत का दावा किया है. सीएम ममता को अपनी जीत और लगातार चौथी बार सत्ता में वापसी का पूरा भरोसा है. हालांकि, गुरुवार को जारी एक वीडियो संदेश में मुख्यमंत्री ने टीएमसी कार्यकर्ताओं और नेताओं से ईवीएम स्ट्रांग रूम पर 24 घंटे निगरानी रखने का आग्रह किया, और आरोप लगाया कि बीजेपी मतगणना शुरू होने से पहले मशीनों में छेड़छाड़ करने का प्रयास कर सकती है. उन्होंने एग्जिट पोल के अनुमानों को भी खारिज कर दिया है.
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सीएम ममता ने मतदाताओं और कार्यकर्ताओं का जताया आभार
उन्होंने कहा, "हम 226 का आंकड़ा पार कर लेंगे. हमें 230 सीटें भी मिल सकती हैं. मुझे जनता के मतदान के तरीके पर पूरा भरोसा है." सीएम ममता बनर्जी ने कहा, "इतनी भीषण गर्मी में भी, और इतने दमन के बावजूद, जिस तरह से आप मतदान करने के लिए कतारों में खड़े रहे- हम आभारी हैं. मैं अपने कार्यकर्ताओं की भी आभारी हूं. उन्होंने अपनी पूरी ताकत से संघर्ष किया. उन्होंने बहुत दमन सहा. जिन्होंने बंगाल को दबाने की कोशिश की, वे खुद मतपेटी में हार गए."
बंगाल समेत इन राज्यों में हुए अप्रैल में विधानसभा चुनाव
बता दें कि पश्चिम बंगाल समेत देश के पांच राज्यों में पिछले महीने विधानसभा चुनाव हुए. पांचों राज्यों के चुनावी नतीजे सोमवार यानी 4 मई को आने वाले हैं. असम, पुडुचेरी और केरल में एक ही चरण में 9 मई को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान हुआ. जबकि तमिलनाडु में 23 मई को वोट डाले गए. वहीं पश्चिम बंगाल में दो चरणों में 23 और 29 मई को मतदान हुआ.
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