ट्रंप का दावा-ईरान हुआ कमजोर, करना चाहता है समझौता
वॉशिंगटन, 1 मई (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान काफी कमजोर हो गया है और बातचीत के लिए उत्सुक है। हालांकि उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव अब भी बना हुआ है।
ट्रंप ने कहा, ईरान समझौता करने के लिए बेताब है। साथ ही उन्होंने दोहराया कि तेहरान “परमाणु शक्ति नहीं बन सकता।”
उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने ईरान की क्षमताओं को काफी हद तक कमजोर कर दिया है। उन्होंने कहा, “उनकी नौसेना खत्म हो चुकी है। उनकी वायुसेना खत्म हो चुकी है… उनके ड्रोन कारखाने लगभग 82 प्रतिशत तक घट गए हैं।”
ट्रंप ने जोड़ा कि ईरान के मिसाइल उत्पादन पर भी असर पड़ा है। उन्होंने कहा, “उनके मिसाइल कारखाने लगभग 90 प्रतिशत तक कम हो गए हैं।”
उन्होंने अमेरिकी अभियान को निर्णायक बताया। उन्होंने कहा कि हमने उनकी परमाणु क्षमता को पूरी तरह नष्ट कर दिया है।
ट्रंप ने ईरान के भीतर नेतृत्व अस्थिरता का भी संकेत दिया। उन्होंने कहा, “हमारे सामने एक समस्या है क्योंकि किसी को ठीक-ठीक नहीं पता कि नेता कौन हैं।”
जारी तनाव के बावजूद उन्होंने अमेरिका के मजबूत आर्थिक संकेतकों की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि आज हमने शेयर बाजार में एक नया उच्च स्तर छुआ है।
ट्रंप ने कहा कि बातचीत की स्थिति के बारे में केवल सीमित लोगों को जानकारी है। मेरे और कुछ अन्य लोगों के अलावा किसी को नहीं पता कि बातचीत क्या है।
उन्होंने संकेत दिया कि आर्थिक दबाव अमेरिकी रणनीति का मुख्य हिस्सा बना हुआ है। उन्होंने कहा, “उन्हें तेल से कोई पैसा नहीं मिल रहा… नाकाबंदी बेहद कड़ी है।”
ट्रंप ने इस संघर्ष को परमाणु प्रसार रोकने के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि आप ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दे सकते। ईरान की आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है और उनकी अर्थव्यवस्था गिर रही है।
यह स्थिति वैश्विक ऊर्जा बाजारों, खासकर तेल की कीमतों के लिए महत्वपूर्ण है, जो मध्य पूर्व में घटनाक्रम से प्रभावित होती हैं।
भारत, जो ऐतिहासिक रूप से ईरान से तेल आयात करता रहा है, ऐसे घटनाक्रमों पर करीबी नजर रखता है क्योंकि इनका ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर पड़ता है।
--आईएएनएस
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क्या फिर से शुरू होगी जंग! अमेरिकी संसद के कानून को भी ट्रंप ने मानने से किया इनकार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध की मंजूरी को लेकर संसद में प्रस्ताव रखने के इरादे को पूरी तरह से टाल दिया है. युद्ध के 60 दिन का वक्त पूरा होने के बाद ट्रंप को आगे इसे जारी रखने के लिए एक मई प्रस्ताव रखना था. ट्रंप सरकार ने अड़ियल रुख अपनाते हुए कहा कि युद्ध को जारी रखने के लिए किसी की मंजूरी की जरूरत नहीं है. अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने गुरुवार को संसद में कहा कि राष्ट्रपति को 60 दिन से अधिक युद्ध जारी रखने के लिए संसद की मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है. उनका कहना था कि ईरान के साथ जो सीजफायर (युद्धविराम) हुआ है, उससे यह 60 दिन की समय सीमा रुक चुकी है.
अमेरिका-ईरान जंग सात अप्रैल को रुक चुका था. इसका अर्थ है कि यह जंग करीब 40 दिन तक चला. हेगसेथ ने कहा कि इस समय सबसे बड़ा खतरा ईरान नहीं, बल्कि युद्ध विरोधी हैं. उन्होंने डेमोक्रेट और कुछ रिपब्लिकन का नाम लिया.
क्या है कानून
अमेरिका में वियतनाम युद्ध के बाद एक कानून तय किया गया था. इसे ‘वॉर पावर्स रिजोल्यूशन’ कहा गया. इस कानून के तहत, राष्ट्रपति संसद की मंजूरी के बिन मात्र 60 दिन के लिए सैन्य कार्रवाई कर सकता है. इस कानून के तहत राष्ट्रपति को या तो सेना वापस बुलानी होगी, या युद्ध को जारी रखने के लिए संसद की मंजूरी लेने की जरूरत होगी. इसमें 30 दिन का समय अतिरिक्त मांगना होता है. ट्रंप ने एक मार्च को संसद में ईरान पर हमले की जानकारी दी. ऐसे में 60 दिन की समयसीमा एक मई को पूरी होगी.
अब तक क्या अपडेट सामने आए?
ट्रंप ने ट्रूथ सोशल अकाउंट पर अपनी फोटो को शेयर करते हुए कहा, तूफान आगे बढ़ चुका है. इसे कोई रोक नहीं सकता है. इसके जवाब में सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई के अनुसार, हम हमलावरों को समंदर में डुबो देंगे. फारस की खाड़ी में उनके लिए किसी तरह की कोई जगह मौजूद नहीं है. मुजतबा खामेनेई की सेहत को लेकर अभी तक किसी तरह की जानकारी सामने नहीं आई है. वे अभी तक सार्वजनिक रूप से मीडिया के सामने नहीं आए हैं. इस बीच तेल की कीमतें बढ़ चुकी हैं. गुरुवार को कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़े. करीब 126 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गए. यह 4 साल में सबसे अधिक थे. ये दाम कम होकर 115 के करीब पहुंचे.
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