डीयूजेए पर हमले के खिलाफ एकजुट हुए बांग्लादेशी पत्रकार, जवाबदेही की मांग
ढाका, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। बांग्लादेश के करीब 370 कैंपस पत्रकारों (शैक्षिक संस्थानों में पत्रकारिता करने वाले छात्र) ने ढाका यूनिवर्सिटी जर्नलिस्ट एसोसिएशन के सदस्यों पर हालिया हमले की कड़ी निंदा की। सभी ने एक स्वर में हमलावरों को कठोर दंड दिए जाने की मांग उठाई है। स्थानीय मीडिया ने यह जानकारी दी।
बुधवार को जारी एक संयुक्त बयान में पत्रकारों ने इस घटना पर गहरी चिंता जताते हुए आक्रोश व्यक्त किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि हमला बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के छात्र संगठन जातीयबादी छात्र दल के नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया, जब डीयूजेए सदस्य अपने पेशेवर कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे थे। बांग्लादेश के प्रमुख दैनिक द ढाका ट्रिब्यून ने यह रिपोर्ट दी।
रिपोर्ट्स के अनुसार, शाहबाग पुलिस स्टेशन में उस समय हिंसक झड़प हुई जब सोशल मीडिया पर एक कथित आपत्तिजनक टिप्पणी वाला फर्जी स्क्रीनशॉट वायरल हुआ, जो प्रधानमंत्री तारिक रहमान की बेटी जैमा रहमान से जुड़ा बताया गया।
डीयूजेए के अनुसार, पत्रकार उस समय शाहबाग थाने में स्थिति को कवर कर रहे थे, जब उन पर हमला हुआ। संगठन ने आरोप लगाया कि छात्रदल के नेताओं ने पहले पत्रकारों को रोका, जिसके बाद 150 से 200 लोगों की भीड़ ने उन पर हमला कर दिया। इस घटना में करीब 10 पत्रकार घायल हो गए।
बयान में इस हमले को स्वतंत्र पत्रकारिता पर सीधा प्रहार और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया गया। हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा कि इस तरह की घटनाएं देश में प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
पत्रकारों ने यह भी कहा कि पत्रकारों पर हमले, उत्पीड़न और धमकी की घटनाएं अलग-थलग नहीं हैं, बल्कि एक व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा कि मीडिया राज्य और समाज का आईना है, और पत्रकारों की आवाज दबाने की कोशिश लोकतंत्र को कमजोर करती है।
बयान में दोषियों की जल्द पहचान के बाद गिरफ्तार कर कड़ी सजा की मांग की गई, साथ ही ढाका विश्वविद्यालय प्रशासन से आरोपी छात्रों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई करने को कहा गया।
पत्रकारों ने सरकार से निष्पक्ष जांच कराने, कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कथित लापरवाही की पड़ताल करने और आवश्यक कदम उठाने की भी अपील की।
उन्होंने कहा कि हमले, धमकी और दमन से सच की आवाज को दबाया नहीं जा सकता और वे ऐसी अन्यायपूर्ण घटनाओं के खिलाफ एकजुट रहेंगे।
--आईएएनएस
केआर/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
कोहिनूर को लेकर न्यूयार्क के मेयर का बड़ा बयान, बोले-हीरा भारत से की ब्रिटिश लूट का प्रतीक
न्यूयॉर्क, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। उपनिवेश-विरोधी बयानों से सुर्खियों में रहने वाले न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने कहा है कि अगर ब्रिटेन के किंग चार्ल्स उनसे मिलते, तो वे उनसे कोहिनूर हीरा भारत को लौटाने के लिए कहते। उन्होंने कहा कि कोहिनूर हीरा ब्रिटिश शासन द्वारा भारत से की गई लूट का प्रतीक बन चुका है।
ममदानी के इस बयान को उपनिवेशवाद के इतिहास और उससे जुड़े मुद्दों पर एक स्पष्ट रुख के रूप में देखा जा रहा है।
ममदानी बुधवार (स्थानीय समय) को 9/11 हमलों के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित एक समारोह के दौरान किंग चार्ल्स III से मिले। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में दोनों को संक्षिप्त बातचीत करते हुए देखा गया, जिसमें किंग चार्ल्स मुस्कुराते नजर आए।
हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका कि दोनों के बीच क्या बातचीत हुई और किंग चार्ल्स के हावभाव से यह भी नहीं लगा कि कोई गंभीर मुद्दा उठाया गया। यह मुलाकात भीड़भाड़ वाले माहौल में अन्य विशिष्ट लोगों के बीच हुई।
इस मुलाकात से पहले न्यूयॉर्क सिटी के मेयर ने कहा था कि अगर उन्हें अलग से बात करने का मौका मिला, तो वे किंग चार्ल्स से कोहिनूर हीरा भारत को लौटाने का आग्रह करेंगे।
चार्ल्स अमेरिका के चार दिन के दौरे पर हैं। अमेरिका अपनी आजादी की 250वीं सालगिरह मनाने की तैयारी में है। यह आजादी अमेरिका ने एक समय जॉर्ज तृतीय के शासन से जुड़ी ताकतों को खूनी क्रांति के जरिए हटाकर हासिल की थी।
किंग चार्ल्स 9/11 मेमोरियल पर फूल चढ़ाने, बिजनेस लीडर्स से मिलने और एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए न्यूयॉर्क गए।
उपनिवेशवाद के प्रभावों पर व्यापक लेखन करने वाले प्रोफेसर महमूद ममदानी के बेटे जोहरान ममदानी ने ब्रिटेन के राजा के दौरे को लेकर खास उत्साह नहीं दिखाया और संकेत दिया कि वे अपनी बातचीत को केवल औपचारिकताओं तक ही सीमित रखेंगे।
पूर्व मेयर माइकल ब्लूमबर्ग ने किंग चार्ल्स III और उनकी पत्नी क्वीन कैमिला को स्मारक स्थल तक ले जाकर फूल अर्पित कराए, न कि ममदानी ने।
106 कैरेट का कोहिनूर अब किंग चार्ल्स की दादी के ताज पर जड़ा है और टावर ऑफ लंदन में है। दुनिया के सबसे बड़े हीरों में से एक कोहिनूर को 1949 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने दूसरे एंग्लो-सिख युद्ध के बाद 11 साल के महाराज दलीप सिंह से जब्त कर लिया था।
ब्रिटेन का दावा है कि यह हीरा कानूनी तौर पर इसलिए मिला क्योंकि एक 11 साल के बच्चे ने उन्हें यह दिया था। भारत की आजादी के बाद से ही देश इस हीरे को वापस करने की मांग कर रहा है।
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने देश के दावे को संक्षेप में कहा, “भारत के लिए, यह उन कलाकृतियों और सांस्कृतिक खजानों का प्रतीक है जिन्हें साम्राज्य की ट्रॉफी के रूप में ब्रिटेन ले जाया गया था।”
यह हीरा आंध्र प्रदेश के वारंगल इलाके में माइनिंग से निकाला गया था और इसे बिना तराशे ब्रिटेन ले जाया गया, जहां इसमें 66 हिस्से काटे गए, जिससे यह बहुत चमकीला हो गया।
यह आंध्र प्रदेश के गुंटूर इलाके में कोल्लूर माइंस में मिला था। पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने भी इसे वापस करने की मांग की है। हालांकि ममदानी ने यह नहीं बताया कि इसे किस देश को वापस किया जाना चाहिए।
--आईएएनएस
केके/वीसी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation














.jpg)




