पेट्रोल ₹14 नुकसान में बेच रहीं तेल कंपनियां:डीजल पर ₹18 का घाटा, कच्चा तेल महंगा होने से रसोई गैस पर भी ₹80,000 करोड़ का बोझ
इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद रिटेल रेट न बढ़ने से कंपनियों को हर एक लीटर पेट्रोल और डीजल पर घाटा हो रहा है। रेटिंग एजेंसी इक्रा के मुताबिक, तेल कंपनियां पेट्रोल पर ₹14 और डीजल पर ₹18 प्रति लीटर का नुकसान झेल रही हैं। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण सप्लाई चैन प्रभावित हुई है, जिससे कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़े हैं। इससे तेल कंपनियों पर बोझ बढ़ रहा है। यही नहीं रसोई गैस के लिए भी सरकार पर ₹80,000 करोड़ का बोझ बढ़ रहा है। मिडिल ईस्ट में तनाव फिर बढ़ने से कच्चा तेल $120 के पार मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव फिर बढ़ने से कच्चे तेल की सप्लाई चेन चरमरा गई है। जो कच्चा तेल कुछ समय पहले 70-72 डॉलर प्रति बैरल मिल रहा था, उसकी कीमत अब 120-125 डॉलर के पार पहुंच गई है। तेल कंपनियों के लिए मुसीबत यह है कि वे महंगा तेल खरीदकर पुरानी कीमतों पर ही बेच रही हैं, जिससे उनका मुनाफा खत्म हो गया है। 61 दिन में इंडियन बास्केट 42 डॉलर महंगा होर्मुज रूट पर तनाव का असर दुनिया का लगभग 20% तेल और गैस (LNG) का व्यापार 'स्ट्रैट ऑफ होर्मुज' के समुद्री रास्ते से होता है। मिडिल ईस्ट संकट की वजह से इस रास्ते में बाधा आ रही है। इससे केवल पेट्रोल-डीजल ही नहीं, बल्कि खाद और केमिकल बनाने वाली कंपनियों की लागत भी बढ़ गई है। रसोई गैस और खाद भी महंगी हुई इस संकट का असर आपकी रसोई और खेतों तक भी पहुंच रहा है: सरल भाषा में कहें तो जब कंपनियों को कोई चीज बनाने या खरीदने में ₹100 खर्च करने पड़ते हैं, लेकिन सरकार या बाजार के दबाव में उसे ₹80 में ही बेचना पड़ता है, तो बचे हुए ₹20 के नुकसान को 'अंडर-रिकवरी' कहते हैं। पेट्रोल, डीजल और गैस के मामले में अभी यही हो रहा है। CNG और उद्योगों पर भी बुरा साया शहरों में गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाली CNG के मार्जिन में भी कमी आने की आशंका है, क्योंकि कंपनियां बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल पा रही हैं। इक्रा ने केमिकल, प्लास्टिक और खाद सेक्टर का भविष्य 'नेगेटिव' बताया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक दुनिया में चल रहे युद्ध और तनाव कम नहीं होते, तब तक इन सेक्टरों पर दबाव बना रहेगा।
भास्कर अपडेट्स:कैलाश मानसरोवर यात्रा के रजिस्ट्रेशन आज से, जून के पहले-दूसरे हफ्ते में शुरू होगी; 60 साल बाद दुर्लभ संयोग
कैलाश मानसरोवर यात्रा इस बार जून के पहले या दूसरे हफ्ते में शुरू होगी। यात्रा में उत्तराखंड के रास्ते पिथौरागढ़ जिले के लिपुलेख दर्रे से दस दलों में 500 यात्री रवाना होंगे। जबकि सिक्किम के नाथुला दर्रे से भी 500 शिवभक्त यात्रा पर जाएंगे। ऑनलाइन पंजीकरण गुरुवार, 30 अप्रैल से शुरू हो रहे हैं। कैलाश मानसरोवर की यात्रा इस साल नया इतिहास रचने जा रही है। इस बार भारत सहित पूरी दुनिया से श्रद्धालु आ सकते हैं। 60 साल बाद इस वर्ष अग्नि अश्व वर्ष का योग बन रहा है। इसे हिंदू, जैन और बौद्ध धर्म में मोक्ष प्राप्ति का सबसे बड़ा द्वार माना गया है। इसलिए इस साल तीनों धर्मों के लोग यात्रा करेंगे। तिब्बती ज्योतिषी दौलत रायपा के अनुसार तिब्बती ज्योतिष 60 वर्षों के चक्र पर चलता है। इसके मुताबिक, यह साल अग्नि तत्व और अश्व यानी घोड़ा राशि का दुर्लभ संगम है। भगवान बुद्ध का जन्म और उन्हें ज्ञान की प्राप्ति इसी अश्व वर्ष में हुई थी। यही नहीं, अश्व वर्ष में की गई एक परिक्रमा का फल सामान्य वर्षों में की गई 12 परिक्रमा के बराबर माना जाता है। आज की बाकी बड़ी खबरें… सीबीएसई 12वीं बोर्ड के नतीजे मई के तीसरे हफ्ते में सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने बुधवार को कहा कि 12वीं के नतीजे मई के तीसरे हफ्ते में आ सकते हैं। दरअसल, कुछ रिपोर्ट्स में दावा था कि ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ सिस्टम के तहत कॉपियों के मूल्यांकन में गड़बड़ियां और देरी हो रही है। भारद्वाज ने कहा कि यह प्रक्रिया ‘पूरी तरह से सही’ चल रही है और तय समय पर है। पुराने और बंद पड़े पीएफ खातों के लिए पोर्टल जल्द लॉन्च होगा रिटायरमेंट फंड संस्था ईपीएफओ जल्द वेब पोर्टल लॉन्च करेगी। इससे सदस्य अपने पुराने और बंद पड़े प्रॉविडेंट फंड खातों को ट्रैक कर सकेंगे और उन्हें फिर से चालू करवा सकेंगे। श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा, E-PRAAPTI पोर्टल आधार आधारित प्रमाणीकरण की आसान प्रक्रिया उपलब्ध कराएगा। शुरुआत में, इसका संचालन ‘सदस्य आईडी’ से किया जा सकेगा।
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