37 साल पुराना सावन का दर्दभरा गाना, तड़प-तड़प कर गाता रहा हीरो, बारिश में मदहोश होकर नाची हीरोइन
बरसात के मौसम में जब भी बॉलीवुड के सबसे दर्दभरे और सदाबहार गीतों की बात होती है, तो 'लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है' का नाम जरूर लिया जाता है. साल '1989 में रिलीज हुई फिल्म 'चांदनी' का यह गीत आज भी प्रेम, बिछड़न और अधूरी मोहब्बत का सबसे खूबसूरत प्रतीक माना जाता है. यह गाना फिल्म निर्माता 'यश चोपड़ा' की रोमांटिक फिल्मों की पहचान बन चुका है. ये सिर्फ एक रेन सॉन्ग नहीं, बल्कि विरह की ऐसी कहानी है, जिसमें बारिश यादों का प्रतीक बन जाती है. गीत के बोल और सुर श्रोताओं को सीधे भावनाओं से जोड़ते हैं. यही वजह है कि 37 साल बाद भी यह गाना हर सावन में रेडियो, टीवी, म्यूजिक ऐप्स और सोशल मीडिया पर खूब सुना जाता है.
भारत-पाक बंटवारे का वो दर्द जो TV पर हुआ अमर, शोले के डायरेक्टर का इकलौता सीरीयल, जिसके आज भी कायल हैं लोग
हिंदी सिनेमा की कल्ट फिल्म शोले बनाने वाले डायरेक्टर रमेश सिप्पी ने अपने पूरे करियर में सिर्फ एक ही टीवी सीरियल बनाया था. जो दूरदर्शन पर आया करता था. इस सीरियल ने बंटवारे के दर्द और रिफ्यूजी परिवारों के स्ट्रगल को इतनी सच्चाई के साथ दिखाया कि लोग आज भी इस क्लासिक शो और इसके किरदारों के दीवाने हैं. चलिए जानते हैं आखिर क्या है इसकी खासियत.
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