दिल्ली विधानसभा मानसून सत्र 2026: प्रश्नकाल को लेकर AAP और BJP में घमासान, हेल्थ सेक्टर में 650 करोड़ के घोटाले पर भी उठे सवाल
Delhi Assembly Monsoon Session 2026: दिल्ली विधानसभा का मानसून सत्र आज 7 अगस्त शुक्रवार को राष्ट्रगीत के साथ शुरू हुआ। पहले दिन सत्र में महरौली अग्निकांड के मृतकों और पूर्व विधायक बलजौर सिंह को श्रद्धांजलि दी गई, साथ ही विधायकों ने अपने क्षेत्रों की समस्याएं उठाईं। फिर नियम संख्या 280 में वर्णित विशेष उल्लेख के तहत विधायक अपने-अपने क्षेत्र की समस्याएं विधानसभा अध्यक्ष के सामने पेश करने लगे।
AAP और BJP विधायक के बीच जोरदार हंगामा
दिल्ली विधानसभा सत्र के दौरान AAP और BJP विधायक के बीच जोरदार हंगामा हो गया। बताया जा रहा है कि आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक कुलदीप कुमार और भाजपा विधायक रवि नेगी अपनी-अपनी सीटों से खड़े हो गए। दोनों नेताओं के बीच सदन के भीतर तीखी बहस और जमकर नोकझोंक हुई, जिससे कुछ देर के लिए सदन में हंगामे की स्थिति बन गई। बाद में दूसरे सदस्यों के दखल के बाद मामला शांत हो गया।
#WATCH | AAP MLA Kuldeep Kumar and BJP MLA Ravi Negi rose from their respective seats and engaged in a heated verbal exchange inside the House during the Delhi Legislative Assembly session. pic.twitter.com/L02zyMjpxW
— ANI (@ANI) August 7, 2026
मैं सख्त कार्रवाई कर सकता हूं-स्पीकर विजेंद्र गुप्ता
स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने विधायकों के बीच हुए हंगामे को लेकर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा, ‘यह असंसदीय है। कोई भी सदस्य आपस में बात नहीं करेगा। अभी जो यहां हो रहा था बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। मैं सख्त कार्रवाई कर सकता हूं, बहुत सख्त कार्रवाई कर सकता हूं। मैं दोनों सदस्यों से कहूंगा, दोनों को चेतावनी दे रहा हूं, सदन की मर्यादा से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा।
अपनी सीट से कोई दूसरे की सीट पर नहीं जाएगा। कोई किसी से अपशब्द नहीं करेगा। अमर्यादित और असंसदीय भाषा का प्रयोग नहीं होगा। चेयर को संबोधित करते हुए इजाजत से बोल सकते हैं। यदि बिना इजाजत के बोले तो अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।’
STORY | Delhi Assembly: 5 AAP party MLAs marshalled out amid party's protest over health sector 'scam'
— Press Trust of India (@PTI_News) August 7, 2026
Five AAP MLAs were marshalled out of the Delhi Assembly on the first day of the monsoon session on Friday after opposition members raised slogans and displayed posters alleging… pic.twitter.com/qLhN4vUwDS
प्रश्नकाल को लेकर नोकझोंक
विधानसभा मानसून सत्र के दौरान एजेंडे में प्रश्नकाल नहीं होने पर विपक्ष द्वारा नाराजगी जताई गई है। ऐसे में विपक्ष के आरोपों का मंत्री प्रवेश वर्मा और कपिल मिश्रा ने जवाब दिया है। कपिल मिश्रा ने विपक्ष को जवाब देते हुए कहा कि पिछली आम आदमी पार्टी सरकार में प्रश्न कल हुआ ही नहीं करते थे।
उन्होंने कहा कि मानसून सत्र का पहला दिन है लेकिन विपक्ष की गंभीरता नहीं दिखाई दे रही। पिछले 5 साल के कार्यकाल में AAP की सरकार में 5 प्रश्न काल भी नहीं हुए, विपक्ष ने अगर ये सवाल किया है तो उन्हें जवाब भी सुनना पड़ेगा।
सबसे बड़ी बात यह है की नेता विपक्ष सदन से गायब है जो कि यह साबित करता है कि आखिर विपक्ष कितना गंभीर है। आप के विधायक संजीव झा ने कहा कि सरकार के 20 महीने हो गए, अभी तक प्रश्नकाल नहीं हुआ, सरकार आम जनता से जुड़े मुद्दों, सवालों से बचना चाहती है।
2500 रुपये को लेकर सरकार का विपक्ष पर तंज
मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा कि इससे पहले के सत्र में विपक्ष पूछता था, 2500 रुपये कब देंगे, यह पूछते थे। अब जब सरकार देने जा रही है, तो विपक्ष के पेट मे दर्द हो रहा है। पिछले 5 साल में 74 बार सीटिंग हुई, केवल 9 बार प्रश्नकाल हुआ। उन्होंने कहा कि विपक्ष 24 घंटे झूठ बोलता है. दिल्ली में आतिशी कहीं दिखाई नहीं देती।
AAP ने खाद्य पदार्थ में मिलावटी का मुद्दा उठाया
आप जरनैल सिंह ने दिल्ली में मिलावटी के मुद्दे को उठाया, उन्होंने कहा कि सभी खाने-पीने के चीजों में मिलावट हो रही है. सीबीएसई की गाइडलाइंस के तहत स्कूलों में जंक फूड पर प्रतिबंध होना चाहिए।
हेल्थ सेक्टर में 650 करोड़ के घोटाले का विरोध
हेल्थ सेक्टर में 'घोटाले' को लेकर AAP के विरोध के बीच 5 विधायकों को मार्शल ने बाहर निकाला। शुक्रवार को मॉनसून सत्र के पहले दिन, हेल्थ सेक्टर में 650 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाते हुए विपक्ष के सदस्यों के नारेबाज़ी और पोस्टर दिखाने के बाद AAP के पांच विधायकों को दिल्ली विधानसभा से मार्शल के ज़रिए बाहर निकाल दिया गया।
अस्पताल में सुविधाओं की कमी का मुद्दा
आप विधायक मोहम्मद आले इकबाल ने दिल्ली गेट के समीप स्थित दिल्ली सरकार के सबसे बड़े अस्पताल एलएनजेपी अस्पताल और जीबी पंत में वेंटिलेटर की सुविधा बढ़िया नहीं होने के मुद्दे को उठाया। कहा वह उस क्षेत्र से विधायक हैं इस नाते सबसे अधिक लोगों के फोन आते हैं, वह पांच मिनट में अस्पताल पहुंच भी जाते, लेकिन वहां सुविधाओं का अभाव होने से असहाय हो जाते हैं. दिल्ली सरकार केंद्र सरकार से भी फंड लेकर सुविधाएं मुहैया कराए। अस्पताल में बाउंसर खड़े हैं जो मरीज और उनके परिजनों से बदतमीज़ी करते हैं।
ओ-ज़ोन में आने वाली कॉलोनियों का मुद्दा
आम आदमी पार्टी के बुराड़ी से विधायक संजीव झा ने कहा कि उनके विधानसभा के लोग बहुत परेशान हैं। करावल नगर में एक विधवा की 25 गज में मकान था, उसे तोड़ दिया गया। सरकार आश्वासन देती है,लेकिन कोर्ट इसे नहीं मानता। सरकार को कोर्ट में जाकर लीगल प्रोटेक्शन देना चाहिए।
भाजपा विधायक मोहन सिंह बिष्ट ने कहा 10 साल आम आदमी पार्टी की सरकार थी, तब उन्होंने कोर्ट में क्यों नहीं एफिडेविट दिया। हमारी सरकार इस पर फैसला लेने जा रही है। वर्ष 2019 में केंद्र सरकार ने अनधिकृत कॉलोनियों को बचाने के लिए पीएम उदय योजना लेकर आई. मंत्री कपिल मिश्रा ने इस विषय पर कहा कि उपराज्यपाल से लेकर कैबिनेट में इस पर चर्चा हुई. ओ जोन के दायरे में 30 लाख लोग आते हैं. सरकार किसी का घर नहीं टूटने देगी. उन्होंने कहा किसी का घर बन रहा तो आप के कार्यकर्ता ही शिकायत दर्ज करा रहे हैं.
डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग की एआई-संचालित लाइव ट्रांसक्रिप्शन
दिल्ली विधानसभा ने डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग को सदन की कार्यवाही के दौरान अपनी एआई-संचालित लाइव ट्रांसक्रिप्शन एवं अनुवाद प्रणाली का ट्रायल करने के लिए आमंत्रित किया है. इस पहल का उद्देश्य विधायी प्रबंधन की दक्षता और उत्पादकता बढ़ाने में प्रौद्योगिकी की क्षमता का आकलन करना है।
विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग, जिसका शुभारंभ प्रधानमंत्री द्वारा जुलाई 2022 में गांधीनगर, गुजरात में डिजिटल इंडिया सप्ताह के दौरान किया गया था, राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन है. इस पहल का उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को उनकी पसंदीदा भारतीय भाषा में जिसमें संवाद भी शामिल है।
हरीश खुराना ने उठाया अवैध ओयो और गेस्ट हाउस का मुद्दा
बीजेपी विधायक हरीश खुराना ने कहा नियमों का उल्लंघन करते हुए उनके विधानसभा क्षेत्र मोतीनगर और दिल्ली के अलग अलग इलाकों में ओयो जैसे कमरे, गेस्ट हाउस संचालित हो रहे हैं। ये सब बिना लाइसेंस, बिना फायर सेफ़्टी के चल रहे हैं।
इन जगहों पर संचालित गतिविधियों के कारण स्थानीय लोगों को परेशानी हो रही है. साथ ही, महिलाओं और बच्चों के लिए सुरक्षा की दृष्टि से चिंता उत्पन्न हो रही है।
इसके कारण पार्किंग, क़ानून व्यवस्था और कॉलोनियों की शांति पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. ऐसे प्रतिष्ठानों को चिन्हित करके कार्रवाई की जाए. मंत्री से निवेदन है कि DMs को आदेश देकर ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई की जाए।
अमेरिका परमाणु नीति बदल रहा:रूस-चीन से जंग हुई तो छोटे एटम बम इस्तेमाल होंगे; न्यूक्लियर वेपन सिर्फ डराने के लिए नहीं
अमेरिका चीन और रूस से बढ़ते तनाव को देखते हुए अपनी परमाणु नीति बदलने की तैयारी कर रहा है। NBC न्यूज के मुताबिक, पेंटागन ऐसी रणनीति बना रहा है, जिसमें बड़े परमाणु हथियारों के साथ छोटे एटम बम (टैक्टिकल न्यूक्लियर हथियार) भी इस्तेमाल का विकल्प होंगे। जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल दुश्मन के सैन्य ठिकानों या सीमित युद्ध में किया जा सकेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन के नीति प्रमुख एल्ब्रिज कोल्बी इस नई नीति पर काम कर रहे हैं। उनका मानना है कि अभी राष्ट्रपति के पास या तो बड़े परमाणु हमले का विकल्प है या फिर कोई जवाबी कार्रवाई नहीं करने का। नई रणनीति में बीच का रास्ता निकाला जा रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर छोटे परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर दुश्मन को रोका जा सके। टैक्टिकल न्यूक्लियर हथियार क्या हैं? टैक्टिकल न्यूक्लियर हथियार कम क्षमता वाले होते हैं। इन्हें पूरे शहर को तबाह करने के बजाय युद्ध के मैदान में दुश्मन के सैन्य ठिकानों, एयरबेस, मिसाइल लॉन्च साइट, टैंक फॉर्मेशन या सैनिकों की तैनाती जैसे सीमित लक्ष्यों पर इस्तेमाल करने के लिए बनाया जाता है। अमेरिका नीति क्यों बदल रहा है? अमेरिका को लगता है कि अगर भविष्य में चीन या रूस से जंग हुई, तो सिर्फ बड़े परमाणु हमले का विकल्प काफी नहीं होगा। इसलिए वह छोटे एटम बमों को भी अपनी सैन्य योजना में शामिल करना चाहता है। इससे दुश्मन पर दबाव बनेगा और जरूरत पड़ने पर सीमित जवाब देना आसान होगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर छोटे एटम बम इस्तेमाल का विकल्प बन गए, तो उन्हें चलाने की संभावना भी बढ़ जाएगी। इससे कोई भी सामान्य जंग देखते-देखते परमाणु जंग में बदल सकती है। रूस के पास सबसे ज्यादा परमाणु हथियार रूस दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु जखीरा रखने वाला देश है। SIPRI और FAS के मुताबिक उसके पास 5,459 परमाणु हथियार हैं। अमेरिका 5,177 हथियारों के साथ दूसरे स्थान पर है। दोनों देशों के पास दुनिया के करीब 88% परमाणु हथियार हैं। चीन के पास करीब 600 परमाणु हथियार हैं। संख्या में वह काफी पीछे है, लेकिन परमाणु हथियारों का जखीरा सबसे तेजी से वही बढ़ा रहा है। 1945 के बाद परमाणु हथियारों का इस्तेमाल क्यों नहीं हुआ? द्वितीय विश्व युद्ध में अगस्त 1945 में अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए थे। इसके बाद दुनिया ने परमाणु हथियारों की विनाशकारी क्षमता देखी। तभी से बड़ी परमाणु शक्तियों ने इन्हें युद्ध में चलाने के बजाय 'न्यूक्लियर डिटरेंस' (परमाणु प्रतिरोध) के हथियार के रूप में इस्तेमाल करना शुरू किया। न्यूक्लियर डिटरेंस क्या है? इस रणनीति का मतलब है कि अगर कोई देश परमाणु हमला करेगा, तो जवाब में उसे भी उतना ही विनाशकारी परमाणु हमला झेलना पड़ेगा। यानी दोनों पक्षों को भारी नुकसान होगा। इसी डर ने अमेरिका, रूस समेत परमाणु शक्तियों को 1945 के बाद युद्ध में परमाणु हथियार इस्तेमाल करने से रोके रखा है।
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