सुखबीर बादल की PM मोदी से मुलाकात, 2027 पंजाब चुनाव से पहले BJP-अकाली दल गठबंधन की अटकलें तेज
Sukhbir Badal PM Modi meeting: शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने शुक्रवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति और मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के कामकाज को लेकर चर्चा हुई। गौरतलब है कि पंजाब में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं।
इस मुलाकात को लेकर न तो सुखबीर बादल की ओर से और न ही प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की तरफ से कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है। हालांकि इस मुलाकात ने एक बार फिर इन अटकलों को हवा दे दी है कि अकाली दल एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ गठबंधन कर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में वापसी कर सकता है।
Delhi: Shiromani Akali Dal President Sukhbir Singh Badal left after meeting Prime Minister Narendra Modi pic.twitter.com/NHtDA1VRoA
— IANS (@ians_india) August 7, 2026
अकाली दल-बीजेपी गठबंधन का इतिहास
अकाली दल और बीजेपी लंबे समय तक एक-दूसरे के भरोसेमंद सहयोगी रहे हैं, लेकिन सितंबर 2020 में तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को लेकर मतभेदों के चलते दोनों दलों के रास्ते अलग हो गए थे। बाद में केंद्र सरकार ने इन कानूनों को वापस भी ले लिया था। दोनों पार्टियां छह लोकसभा चुनावों (1998, 1999, 2004, 2009, 2014 और 2019) और पांच पंजाब विधानसभा चुनावों (1997, 2002, 2007, 2012 और 2017) में साथ मिलकर चुनाव लड़ चुकी हैं।
2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में, जब दोनों दलों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था, अकाली दल को अपने राजनीतिक इतिहास का सबसे खराब प्रदर्शन झेलना पड़ा और पार्टी सिर्फ तीन सीटें ही जीत सकी। वहीं बीजेपी भी महज दो सीटों तक सिमट गई थी।
इसके उलट 2017 के चुनाव में, जब दोनों दल गठबंधन में साथ थे, अकाली दल ने 15 सीटें जीती थीं, जबकि बीजेपी को तीन सीटों पर जीत मिली थी।
2024 लोकसभा चुनाव में भी उठी थी गठबंधन की चर्चा
हाल के दिनों में लगातार ऐसी खबरें सामने आती रही हैं कि दोनों पार्टियां फिर से हाथ मिला सकती हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी दोनों दलों के बीच गठबंधन को लेकर चर्चाएं तेज हुई थीं, लेकिन यह गठबंधन सिरे नहीं चढ़ सका। नतीजतन, उस चुनाव में अकाली दल पंजाब में सिर्फ एक सीट ही जीत पाई थी, जबकि भगवा पार्टी राज्य में अपना खाता तक नहीं खोल सकी थी।
जालंधर रैली में मोदी की टिप्पणी और बादल की सफाई
इसी साल जुलाई में प्रधानमंत्री मोदी ने जालंधर में एक रैली को संबोधित करते हुए AAP, कांग्रेस और अकाली दल पर निशाना साधा था। हालांकि इसके बाद सुखबीर बादल ने प्रधानमंत्री का बचाव करते हुए कहा था कि मोदी ने उनकी पार्टी के खिलाफ नहीं, बल्कि अकाली दल के एक अन्य धड़े के खिलाफ बयान दिया था। इस सफाई ने राजनीतिक विश्लेषकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि पूर्व सहयोगी दल एक बार फिर गठबंधन में दिलचस्पी रखते हैं।
बादल के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने असल में शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) के खिलाफ टिप्पणी की थी, जो मूल अकाली दल से अलग हुआ एक धड़ा है।
अगले साल कई राज्यों में होने हैं विधानसभा चुनाव
पंजाब में अगले साल की शुरुआत में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर के साथ-साथ विधानसभा चुनाव होने हैं। गौरतलब है कि 2022 के पिछले चुनाव में AAP ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए 117 में से 92 सीटें अपने नाम की थीं, जबकि कांग्रेस को सिर्फ 18 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा था।
जापान में 200kmph की रफ्तार से बढ़ रहा डॉल्फिन तूफान:2.6 लाख लोगों को घर छोड़ने का आदेश; टोयोटा ने 9 फैक्ट्रियों में काम रोका
जापान की ओर करीब 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से डॉल्फिन तूफान बढ़ रहा है। इसकी वजह से 2.6 लाख लोगों को घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने के आदेश दिए गए हैं। जबकि 500 से ज्यादा उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। हालात को देखते हुए टोयोटा ने भी अपनी 9 फैक्ट्रियों में काम रोक दिया है। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) के मुताबिक, डॉल्फिन कैटेगरी-1 का तूफान है। इसकी लगातार हवा की रफ्तार 144 किमी प्रति घंटा और झोंकों की रफ्तार 198 किमी प्रति घंटा तक पहुंच रही है। यह तूफान क्यूशू और ओकिनावा के बीच स्थित द्वीपों की ओर बढ़ रहा है। ओकिनावा द्वीप पर सबसे ज्यादा असर तूफान की वजह से जापान का ओकिनावा द्वीप बुरी तरह प्रभावित हुआ है। वहां छुट्टियां मनाने गए कई हांगकांग के पर्यटक उड़ानें रद्द होने के कारण फंस गए हैं। उन्हें अब जरूरी सामान की कमी, बिजली कटने और पानी की सप्लाई बाधित होने की आशंका का सामना करना पड़ रहा है। हांगकांग से जुड़े ट्रैवल सोशल मीडिया अकाउंट्स पर साझा की गई तस्वीरों में सुपरमार्केट की ब्रेड की अलमारियां खाली दिखाई दे रही हैं। वहीं, कई इलाकों में मूसलाधार बारिश और तेज हवाएं चल रही हैं। रविवार को चीन पहुंच सकता है तूफान डॉल्फिन तूफान तेजी से चीन के पूर्वी तट की ओर बढ़ रहा है। चीन के मौसम विभाग के मुताबिक, शुक्रवार तक यह तूफान तट से करीब 820 किलोमीटर दूर था। इसके रविवार दोपहर से सोमवार सुबह के बीच झेजियांग और उत्तरी फुजियान के बीच कहीं टकराने की आशंका है। मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी रखा है, जो चार स्तरों वाली चेतावनी प्रणाली में तीसरा सबसे गंभीर स्तर है। झेजियांग, फुजियान और ताइवान में तेज हवाओं और भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। मौसम वैज्ञानिक शेन यूयांग के मुताबिक, शुक्रवार सुबह तक इस तूफान का दायरा झेजियांग प्रांत से करीब 13 गुना बड़ा हो चुका था। झेजियांग का आकार भारत के बिहार राज्य के बराबर है। मौसम विभाग ने कहा कि तूफान का दायरा बहुत बड़ा है, इसलिए सिर्फ तटीय नहीं बल्कि अंदरूनी इलाकों के लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। चीन में AI और ड्रोन की मदद से बचाव कार्य फिलहाल यह साफ नहीं है कि चीन में टकराने के बाद यह किस दिशा में जाएगा। तूफान के 48 घंटे के अलर्ट जोन में पहुंचने के बाद चीन ने तैयारियां और तेज कर दी हैं। सरकारी टीवी सीसीटीवी के मुताबिक, नेशनल मरीन एनवायरनमेंटल फोरकास्टिंग सेंटर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम तैयार किया है, जो अगले 240 घंटे (10 दिन) तक तूफान की दिशा, ताकत और कहां टकराएगा, इसका अनुमान लगा सकता है। इसके साथ ही ड्रोन और अन्य आधुनिक तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। जापान और चीन में बार-बार टाइफून क्यों आते हैं? 1. भूमध्य रेखा के पास और उत्तर में स्थित होना पश्चिमी प्रशांत महासागर में हर साल सबसे ज्यादा 25 से 30 तूफान आते हैं। यह दुनिया भर में आने वाले कुल तूफानों का लगभग 30% है। इसकी वजह इस इलाके का भूमध्य रेखा के पास (उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में) स्थित होना है। पृथ्वी के घूमने के कारण यहां हवाओं को गोल घुमाने वाला बल (कोरियोलिस इफेक्ट) बहुत मजबूत होता है। तूफान बनने के बाद ये हवाओं के बहाव के साथ जापान, ताइवान, चीन, कोरिया और फिलीपींस की तरफ बढ़ते हैं। यही वजह है कि इन देशों में सबसे ज्यादा तूफान आते हैं। 2. समुद्र का तेजी से गर्म होना टाइफून बनने और मजबूत होने की सबसे बड़ी वजह गर्म समुद्र है। जब समुद्र की सतह का तापमान बढ़ता है, तो पानी तेजी से भाप बनकर ऊपर उठता है। यह भाप तूफान के लिए ईंधन का काम करती है, जिससे हवाएं और बारिश दोनों बेहद तेज हो जाती हैं। 1901 में दुनिया भर के महासागरों की सतह का औसत तापमान लगभग 15.2°C से 15.3°C था। बीते कुछ साल में यह औसतन वैश्विक समुद्र सतह तापमान 21.1°C को पार कर गया है, जो इतिहास में सबसे ज्यादा है।
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