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'आपने आधी जिंदगी इसलिए बिताई ताकि आपको भुला दिया जाए': Smriti Irani का मातृत्व पर भावुक बयान हुआ वायरल

पूर्व केंद्रीय मंत्री और प्रसिद्ध अभिनेत्री स्मृति ईरानी ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान मां बनने के अनुभव, वर्किंग मदर्स (कामकाजी माताओं) की दैनिक चुनौतियों और बच्चों के बड़े होकर आत्मनिर्भर होने की भावनात्मक सच्चाई पर खुलकर अपने विचार साझा किए। 50 वर्षीया स्मृति ईरानी का यह प्रेरक और भावुक भाषण सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे अब तक 1 लाख 24 हजार से अधिक बार देखा जा चुका है। ईरानी ने कहा कि ज़्यादातर वर्किंग मदर्स को उन सालों के बारे में ज़्यादा कुछ याद नहीं रहता क्योंकि वे हर चीज़ को एक साथ संभालने में ही लगी रहती हैं।

उन्होंने कहा, "उन्हें काम पूरा करना होता था। उन्हें अपने बच्चे को खाना खिलाना होता था। उन्हें यह पक्का करना होता था कि होमवर्क हो गया है, और यह भी कि उनकी PPT भी तैयार है। कई रातें ऐसी गुज़रती थीं जब वे सो भी नहीं पाती थीं।"

उन्होंने इस बात पर मज़ाक भी किया कि बच्चे कितनी तेज़ी से बड़े हो जाते हैं - पहले उन्हें हर समय देखभाल की ज़रूरत होती है और फिर वे टीनएजर बन जाते हैं और पलटकर जवाब देने लगते हैं।

ईरानी ने कहा, "आप में से कितने लोग सोचते होंगे कि 'अभी तो मैं नैपी साफ़ कर रही थी और अब यह बच्चा मुझसे पलटकर बात कर रहा है?'" उनकी इस बात पर दर्शकों ने प्रतिक्रिया दी।

'मां होने का एहसास ऐसा ही होता है'
हालांकि, ईरानी के लिए मां बनने का मतलब सिर्फ़ बच्चों की परवरिश में बिताए गए साल नहीं हैं। उन्होंने इसे एक लंबा सफ़र बताया, जिसका असली मतलब तब समझ आता है जब बच्चे बड़े हो जाते हैं और अपनी ज़िंदगी जीने लगते हैं। उन्होंने कहा कि कई मांएं उन सालों के बारे में तब सोचती हैं जब उनके बच्चे बड़े हो जाते हैं और अपनी ज़िंदगी बना लेते हैं। उन्होंने कहा, "मां होने का एहसास ऐसा ही होता है। यह एक ऐसा काम है जो तभी पूरा माना जाता है जब बच्चे को आपकी ज़रूरत न रहे। और यही सबसे दुखद बात है।"

ईरानी ने इस बारे में भी बात की कि बेटियां और बेटे अपनी मां को किस तरह याद करते हैं। उन्होंने कहा, "बेटी को तब याद आती है जब उसका अपना बच्चा होता है," और आगे कहा कि बेटे शायद अपनी मां की अहमियत बहुत बाद में समझते हैं। इसे मातृत्व की "दुखद सुंदरता" बताते हुए उन्होंने कहा, "आप किसी को इसलिए बड़ा करते हैं ताकि उन्हें जाने दें। आप किसी को इसलिए बड़ा करते हैं ताकि वे आपको भूल जाएं। आप किसी को इसलिए बड़ा करते हैं जिन्हें भविष्य में आपकी कभी ज़रूरत न पड़े।"

'आपने अपनी ज़िंदगी का आधा हिस्सा इसलिए बिताया ताकि बाकी आधे हिस्से में आपको भुला दिया जाए'
ईरानी ने इस बात पर भी अपनी राय रखी कि बेटियां और बेटे अपनी मां को किन अलग-अलग तरीकों से याद कर सकते हैं। उन्होंने कहा, "और आपके पास बस एक तस्वीर, एक याद या एक टेक्स्ट मैसेज ही बचेगा। आप इसी चीज़ को बड़ा कर रही हैं। आपने अपनी ज़िंदगी का आधा हिस्सा इसलिए बिताया ताकि बाकी आधे हिस्से में आपको भुला दिया जाए।"

इसके बाद ईरानी ने मातृत्व को एंटरप्रेन्योरशिप और निवेश से जोड़ा। उन्होंने कहा कि अक्सर महिलाओं को "बहुत ज़्यादा भावुक" कहकर कम आंका जाता है, जबकि यही भावनाएं उन्हें ज़्यादा मज़बूत और दृढ़ बनाती हैं। उन्होंने पूछा, "क्या आप इसकी कोई आर्थिक कीमत तय कर सकती हैं?" इसके बाद उन्होंने कमरे में मौजूद कुछ भावुक महिलाओं की ओर इशारा किया।

उन्होंने कहा कि भावनाओं को कमज़ोरी नहीं समझना चाहिए, खासकर जब बात बिज़नेस में महिलाओं की हो। उन्होंने कहा, "लेकिन उन्हें यह एहसास नहीं होता कि यही भावना हमें ईमानदार बनाती है ताकि हम चुका सकें। यही भावना हमें कड़ी मेहनत करने, मज़बूती से आगे बढ़ने और तेज़ी से वापसी करने के लिए प्रेरित करती है।" उन्होंने अपनी बात खत्म करते हुए मातृत्व और नारीत्व से मिलने वाली मज़बूती पर ज़ोर दिया।

ईरानी ने कहा, "और जिस दिन किसी को यह एहसास हो जाए और वह आपके बिज़नेस में निवेश करे, तो वह एक समझदार निवेशक है क्योंकि पैसे से सब कुछ खरीदा जा सकता है। लेकिन पैसे से कभी भी किसी महिला की दृढ़ता नहीं खरीदी जा सकती। पैसे से कभी भी मां का प्यार नहीं खरीदा जा सकता।"

स्मृति ईरानी, ​​जिनकी शादी मुंबई के बिज़नेसमैन ज़ुबिन ईरानी से हुई है, के तीन बच्चे हैं: ज़ोहर, ज़ोइश और उनकी सौतेली बेटी शनेल। उन्हें अभी एकता कपूर के शो 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' में तुलसी के किरदार में देखा जा रहा है।
 

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180 छात्र हॉस्टल छोड़कर 12 किमी पैदल घर निकले:कमरों में ठूंसकर रखे गए, खाने में कीड़ों की शिकायत, प्रिंसिपल का हुआ ट्रांसफर

ओडिशा के एक हॉस्टल में लगभग 180 छात्र रह रहे थे। छात्रों ने आरोप लगाया कि उन्हें केवल दो कमरों में ठूंसकर रखा गया है। खाने की क्वालिटी खराब है। यहां तक कि चावल-दाल में कीड़े मिलने की शिकायत भी की। यह घटना ओडिशा के नबरंगपुर जिले के झरिगांव ब्लॉक स्थित सांतेमारा सरकारी उच्च विद्यालय के हॉस्टल से जुड़ी है। नाराज छात्र हॉस्टल छोड़कर घर के लिए निकले हॉस्टल की छत से बारिश का पानी टपकने, गंदे टॉयलेट और पानी की समस्याओं व खेल सामग्री की कमी की भी शिकायत की गई। नाराज छात्र अपने बैग लेकर हॉस्टल छोड़कर घरों की ओर निकल पड़े। ये सब देखकर शिक्षा एवं जनजातीय कल्याण विभाग के अधिकारियों ने पहुंचकर छात्रों और उनके माता-पिता से बातचीत की। उन्हें समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया। 12 किमी तक पैदल चले छात्र हॉस्टल के बदतर हालातों को बताते हुए छात्रों ने कहा - हॉस्टल में कमरों की संख्या कम होने के कारण कई छात्रों को भीड़भाड़ के बीच रहना पड़ता है जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है। इन छात्रों ने हॉस्टल से अपने गांव तक का 12 किमी सफर पैदल चलकर तय किया। प्रिंसिपल ने खराब खाने की बात से किया इंकार सूचना मिलने के बाद कई अभिभावक मौके पर पहुंचे और अपने बच्चों को अपने साथ घर ले गए। इस घटना के बाद राज्य में सरकारी आवासीय छात्रावासों की व्यवस्था और वहां उपलब्ध सुविधाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इस बारे में जब स्कूल की प्रिंसिपल राजलक्ष्मी महाराणा से बात की तो उन्होंने छात्रों के अधिकांश आरोपों से इनकार किया। हालांकि उन्होंने हॉस्टल में कुछ अव्यवस्थाओं की बात जरूर स्वीकार की। लेकिन इस बात को उन्होंने खारिज कर दिया कि हॉस्टल में छात्रों को सड़ा हुआ दाल - चावल परोसा जाता है। फिलहाल इस घटना ने सरकारी हॉस्टलों में छात्रों को मिलने वाली सुविधाओं और खाने की क्वालिटी पर बहस छेड़ दी है। नए प्रिंसिपल की नियुक्ति की गई असिस्टेंट ब्लॉक ऑफिसर दशरथ गोंड ने घटना के बारे में बताते हुए कहा, "हमें जब सूचना मिली तो हम तुरंत मौके पर पहुंचे। हमनें देखा कि बच्चे चलकर आ रहे थे। हमनें उन्हें दुकलपाड़ा स्कूल में रुकने को कहा। वहां उन्हें खाने-पीने की सुविधा दी गई। बच्चों से बात करने के बाद हमनें प्रिंसिपल का ट्रांसफर कर दिया है। यहां नए प्रिंसिपल की नियुक्ति की गई है जिनका नाम जिनका नाम गणेशराम नायक है। इसके बाद बच्चों के लिए गाड़ी की व्यवस्था कर उन्हें वापस स्कूल भेजा गया। मूक-बधिर छात्रों के स्कूल की हालत भी बदतर जयपुर के राजकीय सेठ आनंदीलाल पोद्दार मूक-बधिर उच्च माध्यमिक स्कूल में भी दो दिन पहले हंगामा हुआ। दिव्यांग छात्र-छात्राओं ने स्कूल में टॉयलेट की बदहाल स्थिति, पानी का संकट और जर्जर भवन की समस्या से परेशान होकर प्रदर्शन किया। क्लासरूम की दीवारों पर दरार जवाहरलाल नेहरू मार्ग में स्थित राजकीय सेठ आनंदीलाल पोद्दार स्कूल के छात्र प्रदर्शन करते गेट पर बैठ गए। छात्रों का कहना है कि स्कूल में लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। कई क्लासरूम की दीवारों और कमरों में दरारें पड़ चुकी हैं। इसके साथ ही पीने के पानी की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। स्टूडेंट्स का आरोप है कि इन समस्याओं को लेकर कई बार स्कूल प्रशासन और प्रिंसिपल को अवगत कराया गया, लेकिन शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। समस्याओं का समाधान नहीं होने पर मजबूरन प्रदर्शन करना पड़ा। पूर्व सीएम ने दिया समस्याओं के समाधान का आश्वासन मामले की सूचना पर शिक्षा विभाग की टीम, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली भी स्कूल पहुंचे। गहलोत ने कहा कि बच्चों की समस्या को लेकर मैं खुद सीएम भजनलाल शर्मा को पत्र लिखूंगा। उन्हें बताऊंगा कि स्कूल में ऐसे टीचर्स की नियुक्ति की गई है, जिन्हें खुद साइन लैंग्वेज नहीं आती है। वहीं हालात भी बद से बदतर है। निरीक्षण में कई खामियां सामने आने के बाद विभाग ने तत्काल प्रिंसिपल को हटा दिया। वहीं एक टीचर और एक फोर्थ ग्रेड कर्मचारी को भी APO कर दिया गया। विशेष कमेटी का भी गठन, स्कूल में होगा काम शिक्षा विभाग ने स्कूल में व्याप्त समस्याओं के समाधान के लिए एक विशेष कमेटी का भी गठन किया है। यह कमेटी स्कूल की सफाई व्यवस्था, पेयजल, भवन की स्थिति और अन्य मूलभूत सुविधाओं का आकलन कर जल्द रिपोर्ट देगी। रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक मरम्मत और सुधार कार्य कराए जाएंगे, ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सके। शिक्षा विभाग का कहना है कि विद्यार्थियों की सुविधाओं से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। स्कूल में सामने आई कमियों को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाएगा और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। ये खबर भी पढ़ें TGT भर्ती परीक्षा में 33 सवाल गलत:सचिव, परीक्षा नियंत्रक को अदालत में पेश होने के आदेश, कोर्ट ने कहा- परीक्षा प्रक्रिया बताए आयोग इलाहाबाद हाईकोर्ट ने परीक्षा में बड़ी संख्या में गलत प्रश्न पाए जाने पर उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) के सचिव और परीक्षा नियंत्रक को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि आयोग यह बताए कि प्रश्नपत्र कैसे तैयार किया जाता है और परीक्षा कराने की पूरी प्रक्रिया क्या है। पूरी खबर यहां पढ़ें

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