सैफ-अमृता की शादी में नहीं पहुंचीं सोहा-सबा:स्कूल प्रिंसिपल ने दी खबर, सबा ने बताया 19 की उम्र में रिश्ता टूटने के बाद क्यों सिंगल रहीं
सोहा अली खान और सबा अली खान ने हाल ही में बताया है कि वह भाई सैफ अली खान की पहली शादी में नहीं पहुंची थीं। दोनों तब स्कूल में थीं और शादी इतनी हड़बड़ी में हुई कि उन्हें खबर तक नहीं दी गई। उनकी स्कूल की प्रिंसिपल ने मीडिया रिपोर्ट्स देखने के बाद उन्हें सैफ की शादी की जानकारी दी थी। इसके अलावा सबा अली खान ने बताया है कि क्यों 19 की उम्र में कोलकाता के शख्स से शादी टूटने के बाद वो आज भी सिंगल हैं। शादी के समय स्कूल में थीं सोहा और सबा नेहा धूपिया और अंगद बेदी के शो 'डबल डेट' के लेटेस्ट एपिसोड में सोहा और सबा पहुंची थीं। बातचीत में सबा अली खान ने बताया कि जब सैफ और अमृता की शादी हुई, तब वह और सोहा दोनों ही स्कूल में थीं। सोहा ने भी बताया कि शादी बहुत जल्दबाजी में हुई थी, इसलिए दोनों बहनें इसका हिस्सा नहीं बन सकीं। प्रिंसिपल ऑफिस से आया था फोन सबा ने आगे बताया कि शादी की अचानक आई मीडिया खबरों के कारण स्कूल प्रशासन को दखल देना पड़ा था। सबा के मुताबिक, प्रिंसिपल के ऑफिस से उन्हें फोन आया था। उनसे कहा गया था कि जब तक पुष्टि न हो जाए, वे इस बारे में किसी से कोई बात न करें। सबा ने याद करते हुए कहा कि उन्हें निर्देश दिया गया था कि वे किसी को कुछ न बताएं, क्योंकि यह खबर मीडिया में आ चुकी थी और उन्हें इसकी सच्चाई नहीं पता थी। सबा अली खान ने बताया क्यों नहीं की शादी सबा अली खान ने अपनी शादी न होने के कारणों का खुलासा किया है। सबा ने बताया कि 18-19 साल की उम्र से ही उनके पास शादी के कई प्रस्ताव आने लगे थे, लेकिन उन्होंने किसी से शादी नहीं की। बातचीत के दौरान सबा ने कहा कि उनका कभी कोई बॉयफ्रेंड नहीं रहा। 19 साल की उम्र में वह कोलकाता के एक व्यक्ति से लगभग शादी करने ही वाली थीं, जिनसे उन्हें मिलवाया गया था। हालांकि, उस समय वह शादी के लिए तैयार नहीं थीं, इसलिए बात आगे नहीं बढ़ सकी। पिता जैसे शख्स की तलाश में थीं सबा सबा ने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ वह शादी के विचार के लिए तैयार थीं, लेकिन फिर उन्हें कोई ऐसा व्यक्ति नहीं मिला जो उनके साथ पूरी तरह मेल खाता हो। उन्होंने अपने दिवंगत पिता और पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान मंसूर अली खान पटौदी का जिक्र करते हुए कहा कि वह एक असाधारण व्यक्ति थे। सबा ने कहा कि वो चाहती थीं कि उनकी शादी पिता जैसे शख्स से हो, लेकिन ऐसा कोई नहीं मिला। सबा ने ये भी कहा है कि कई बार लोग उनसे पूछते हैं कि क्या वो वाकई सोहा और सैफ की बहन हैं। क्यों सैफ और अमृता ने की हड़बड़ी में शादी 1990 में सैफ अली खान, फिल्ममेकर राहुल रवैल की फिल्म बेखुदी से डेब्यू कर रहे थे। सैफ को लॉन्च करने से पहले राहुल रवैल ने कई बड़े एक्टर्स को सैफ के साथ फोटोशूट करने बुलाया। उनमें अमृता सिंह भी शामिल थीं, जो तब स्टार कही जाती थीं। वहीं सब सैफ को मंसूर अली खान पटौदी और शर्मिला टैगोर के बेटे के रूप में जानते थे। पहली बार तो अमृता ने सैफ को नजरअंदाज कर दिया, लेकिन फिर जब फोटोशूट के लिए सैफ ने उनके कंधे पर हाथ रखा तो अमृता ने उन्हें गुस्से में देखा। अमृता सैफ से 12 साल बड़ी थीं। पहली मुलाकात के बाद ही एक दिन सैफ ने अमृता के घर कॉल मिलाया। सैफ ने पूछा कि क्या अमृता उनके साथ डिनर पर जाएंगी। अमृता ने ये कहकर इनकार कर दिया कि वो डिनर पर बाहर नहीं जातीं। सैफ ने जब लंच का पूछा तब भी इनकार ही मिला। हालांकि अमृता ने ये जरूर कहा कि वो चाहें तो घर आकर साथ डिनर कर सकते हैं। सैफ उसी दिन अमृता के घर पहुंच गए। दोनों बात करने लगे और बातों-ही-बातों में दोनों के बीच अच्छी ट्विनिंग बैठ गई। दोनों ने एक दूसरे को किस किया और इसी के साथ सैफ ने अमृता से अपने प्यार का इजहार भी कर दिया। अमृता ने भी उनके प्रपोजल को कबूल कर लिया। इसके बाद दो दिनों तक सैफ अमृता के घर पर ही रहे। ये किस्सा खुद सैफ और अमृता ने सिमी गरेवाल के चैट शो में सुनाया था। दो दिनों बाद जब डेब्यू फिल्म बेखुदी के प्रोड्यूसर्स के लगातार कॉल आने लगे तो सैफ को मन मारकर शूटिंग के लिए निकलना पड़ा। सैफ के पास पैसे नहीं थे तो उन्होंने सेट तक पहुंचने के लिए अमृता से 100 रुपए उधार मांगे। अमृता ने उन्हें कहा कि वो उनकी कार इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन सैफ ने इनकार कर दिया और 100 रुपए लेकर निकल गए। बार-बार सेट पर देर से पहुंचने पर सैफ को फिल्म बेखुदी से निकाल दिया गया। धर्म बदलकर की थी नवाब खानदान में शादी, अमृता छोड़नी पड़ी इंडस्ट्री 1991 में सैफ अली खान और अमृता ने एक दिन शादी करने का फैसला किया और 2 दिनों बाद ही शादी कर ली। नवाब खानदान में शादी करने के लिए अमृता ने धर्म बदल लिया। शादी के तुरंत बाद अमृता सिंह ने इंडस्ट्री से दूरी बना ली, जबकि उनके पास कई बड़ी फिल्मों का ऑफर था और वो करियर के टॉप पर थीं। शादी के 4 साल बाद अमृता ने बेटी सारा अली खान को जन्म दिया फिर उन्हें एक बेटा इब्राहिम अली खान हुआ। बच्चे होने के चंद सालों बाद ही सैफ और अमृता के बीच झगड़े शुरू हो गए और दोनों ने 2004 में तलाक ले लिया।
पेपर लीक की जड़ तक पहुंचना होगा:हिमांश कोहली बोले- सोनम वांगचुक का सम्मान करता हूं, युवाओं की आवाज सुनी जाए, तभी बदलेगी शिक्षा व्यवस्था
फिल्म 'आर्यभट्ट का जीरो' के प्रमोशन के दौरान अभिनेता हिमांश कोहली, अभिनेत्री सोनाली सहगल और निर्देशक कमल चंद्रा ने सोनम वांगचुक के समर्थन, NEET-UG समेत विभिन्न परीक्षाओं में पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था पर अपनी राय रखी। हिमांश ने कहा कि देश और आने वाली पीढ़ी के बेहतर भविष्य के लिए आवाज उठाने वालों को सुना जाना चाहिए। सोनाली ने मुद्दे को राजनीति से ऊपर बताते हुए सकारात्मक नतीजे की उम्मीद जताई। कमल चंद्रा ने कहा कि सिर्फ सरकार को दोष देने से समाधान नहीं निकलेगा, बल्कि सिस्टम की जड़ तक पहुंचना जरूरी है। सवाल: आपने सोनम वांगचुक के समर्थन में पोस्ट किया था और उनके स्वास्थ्य के लिए भी प्रार्थना की थी। इसे आप कैसे देखते हैं? युवाओं से आपका यह जुड़ाव कैसा है? जवाब (हिमांश कोहली): मेरे करियर में युवाओं का हमेशा बड़ा योगदान रहा है। मेरे टीवी शो से लेकर फिल्म 'आर्यभट्ट का जीरो' तक, मेरा काम युवाओं को प्रेरित करने की कोशिश करता है। बेहतर शिक्षा और देश के भविष्य के लिए आवाज उठाने वाले युवाओं को सुना जाना चाहिए। मैं सोनम वांगचुक का बहुत सम्मान करता हूं। उन्होंने देश, खासकर भारतीय सेना और नवाचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनकी सोच और काम ने मुझे भी प्रेरित किया है। आज की Gen-Z अपनी बात हिम्मत से रखती है। हमारी पीढ़ी में लोग इतनी खुलकर अपनी बात नहीं कह पाते थे। युवा सिर्फ बहादुर ही नहीं, बल्कि रचनात्मक भी हैं। अगर उनकी मांग देश के बेहतर भविष्य और अच्छी शिक्षा के लिए है तो मैं उनके साथ खड़ा हूं। मेरी कामना है कि सभी पक्ष बातचीत के जरिए समाधान तक पहुंचें। सवाल: बॉलीवुड के कलाकारों से लोग उम्मीद करते हैं कि वे ऐसे मुद्दों पर खुलकर बोलें। आपने सबसे पहले समर्थन किया था। क्या कहना चाहेंगे? जवाब (हिमांश कोहली): मुझे याद है कि उस समय शायद सबसे पहले मैंने ही पोस्ट किया था और इसके लिए मुझे ट्रोल भी किया गया। लेकिन अगर बात सच्चाई और आने वाली पीढ़ी के भविष्य की हो, तो चुप नहीं रहना चाहिए। हम सभी चाहते हैं कि बच्चों को अच्छी शिक्षा और बेहतर अवसर मिलें। इसके लिए आवाज उठाना जरूरी है। यह आवाज शांतिपूर्ण होनी चाहिए और सुनी भी जानी चाहिए। सवाल: आपको लगता है कि यह आवाज सरकार तक पहुंची? जवाब (हिमांश कोहली): जी, मुझे लगता है कि बात सरकार तक पहुंची है। उम्मीद है कि इससे शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव आएगा और आने वाली पीढ़ी को अपनी पसंद का करियर चुनने के बेहतर अवसर मिलेंगे। सोनाली सहगल: मुझे भी लगता है कि इस मुद्दे का सकारात्मक परिणाम निकलना चाहिए। इसे राजनीतिक बहस बनाने के बजाय समाधान पर ध्यान देना चाहिए। जब कोई आंदोलन होता है तो उसका सार्थक निष्कर्ष भी निकलना चाहिए। प्रधानमंत्री भी इस मुद्दे पर बोल चुके हैं। हमें उम्मीद है कि आगे बेहतर बदलाव देखने को मिलेगा। सवाल: दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात हो रही है। आप इसे कैसे देखते हैं? जवाब (हिमांश कोहली): यह अच्छी बात है। हर इंसान की तीन बुनियादी जरूरतें हैं- अच्छी शिक्षा, अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं और भोजन। अच्छी शिक्षा हर व्यक्ति का अधिकार है और इसमें किसी तरह की गड़बड़ी नहीं होनी चाहिए। कमल चंद्रा: हर बात को राजनीतिक बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। पेपर लीक की जड़ तक पहुंचना होगा। कोई मंत्री खुद पेपर लीक नहीं करता, बीच में कुछ भ्रष्ट लोग होते हैं। असली जरूरत सिस्टम की खामियों को दूर करने की है। मैंने एक छात्र की कहानी देखी थी जिसने तीन-चार साल तक 16-17 घंटे पढ़ाई की। उसे 550 अंक मिले और वह खुश था कि उसकी मेहनत रंग लाई। लेकिन परीक्षा रद्द होने के बाद वह मानसिक रूप से टूट गया और आखिरकार उसने आत्महत्या कर ली। यह बेहद दुखद है। ऐसी घटनाएं बताती हैं कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार बेहद जरूरी है। सिर्फ आरोप लगाने से नहीं, बल्कि सिस्टम की कमियों को दूर करने से बदलाव आएगा। सरकार को इस दिशा में सख्त कदम उठाने चाहिए, क्योंकि यह लाखों छात्रों के भविष्य का सवाल है। _________________________________________ यह इंटरव्यू भी पढ़ें.. फिल्म फ्लॉप हुई तो रोती हुई घर गईं सोनाली सहगल:हिमांश कोहली ने कहा- ‘यारियां’ के बाद लगा, अब सब खत्म हो गया फिल्म 'आर्य भट्ट का जीरो' खुद पर भरोसा और सपनों के लिए संघर्ष की कहानी है। दैनिक भास्कर से बातचीत में सोनाली सहगल, हिमांश कोहली और डायरेक्टर कमल चंद्रा ने ऐसे अनुभव साझा किए, जब लोगों ने उन पर भरोसा नहीं किया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। सोनाली ने बताया कि एक फिल्म के फ्लॉप होने के बाद वह कार में रोते हुए घर गई थीं। हिमांश ने कहा कि 'यारियां' के बाद लगातार फिल्में नहीं चलीं तो लगा कि करियर खत्म हो गया।पूरा इंटरव्यू पढ़ें..
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