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Kanwar Yatra Guidelines 2026: पहली बार कांवड़ यात्रा करने वाले इन नियमों का रखें विशेष ध्यान

Kanwar Yatra Guidelines 2026: कांवड़ यात्रा केवल पैदल चलकर गंगाजल लाने की परंपरा नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति श्रद्धा, संयम और समर्पण का प्रतीक मानी जाती है। पहली बार कांवड़ यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए कुछ विशेष नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करना धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।

कांवड़ को कभी सीधे जमीन पर न रखें
कांवड़ यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण नियम यह माना जाता है कि कांवड़ को सीधे जमीन पर नहीं रखा जाता। यदि विश्राम करना हो तो कांवड़ स्टैंड या किसी साफ और ऊंचे स्थान का उपयोग करें। इससे गंगाजल की पवित्रता बनी रहती है और यात्रा की मर्यादा भी कायम रहती है।

सात्विक भोजन और संयम रखें
यात्रा के दौरान सात्विक भोजन करना चाहिए। लहसुन, प्याज, मांसाहार और नशे जैसी चीजों से पूरी तरह दूरी बनाकर रखें। साथ ही वाणी में संयम रखें और किसी प्रकार के विवाद या अपशब्द से बचें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यात्रा के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन भी शुभ माना जाता है।

पहनावे और स्वच्छता का रखें ध्यान
कांवड़ यात्रा में साफ-सुथरे और सरल वस्त्र पहनने की सलाह दी जाती है। चमड़े से बनी बेल्ट, पर्स या जूते-चप्पल का उपयोग नहीं करना चाहिए। कांवड़ को छूने से पहले हाथ-पैर साफ करना और व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखना भी जरूरी माना जाता है।

यात्रा का उद्देश्य केवल भक्ति रखें
कांवड़ यात्रा को मनोरंजन या प्रदर्शन का माध्यम नहीं, बल्कि शिव भक्ति का पर्व माना जाता है। यात्रा के दौरान भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें, मन शांत रखें और जरूरतमंदों की सहायता करने का प्रयास करें। विनम्र व्यवहार और सेवा भावना यात्रा के आध्यात्मिक महत्व को और बढ़ाती है।

पहली बार यात्रा करने वाले रखें ये बातें याद

  • कांवड़ को कभी जमीन पर न रखें।
  • सात्विक भोजन और शुद्ध आचरण अपनाएं।
  • चमड़े की वस्तुओं का उपयोग न करें।
  • बिना हाथ-पैर धोए कांवड़ को स्पर्श न करें।
  • विवाद और क्रोध से दूर रहें।
  • शिव नाम का स्मरण करते हुए यात्रा पूरी करें।
  • यात्रा के नियमों का पालन श्रद्धा और अनुशासन के साथ करें।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सच्ची श्रद्धा, संयम और नियमों का पालन करते हुए की गई कांवड़ यात्रा भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का माध्यम मानी जाती है।

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Kamika Ekadashi 2026: कामिका एकादशी व्रत कैसे रखें? क्या खाएं, क्या नहीं, जानें पूजा विधि और पारण का समय

Kamika Ekadashi 2026: सावन माह के कृष्ण पक्ष की कामिका एकादशी भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा के लिए विशेष महत्व रखती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखने से पापों का नाश होता है और परिवार में सुख, शांति तथा समृद्धि का वास होता है। सावन का महीना होने के कारण इस दिन भगवान शिव की आराधना का भी विशेष फल प्राप्त होता है।

कामिका एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त
एकादशी तिथि प्रारंभ: 8 अगस्त 2026, दोपहर 1:59 बजे
एकादशी तिथि समाप्त: 9 अगस्त 2026, सुबह 11:04 बजे
व्रत पारण का समय: 10 अगस्त 2026, प्रातः 5:47 बजे से सुबह 8:00 बजे तक

कामिका एकादशी व्रत रखने का सही तरीका
कामिका एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर में दीप प्रज्ज्वलित कर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। भगवान को पीले फूल, तुलसी दल और फल अर्पित करें। पूजा के दौरान 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। पूरे दिन संयमित व्यवहार रखें, क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहें तथा संभव हो तो रात्रि में भजन-कीर्तन और जागरण करें।

व्रत में क्या खा सकते हैं?
फलाहार करने वाले श्रद्धालु इन चीजों का सेवन कर सकते हैं-

  • दूध और दही
  • ताजे मौसमी फल
  • मखाना
  • कुट्टू और सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजन
  • सेंधा नमक
  • आलू और शकरकंद
  • नारियल पानी और नींबू पानी

हल्का और सात्विक भोजन शरीर को ऊर्जा देता है और पूजा में मन एकाग्र रखने में मदद करता है।

व्रत में क्या नहीं खाना चाहिए?
कामिका एकादशी के दिन कुछ खाद्य पदार्थों का सेवन वर्जित माना गया है

  • चावल
  • गेहूं, जौ और अन्य अनाज
  • सभी प्रकार की दालें
  • साधारण नमक
  • प्याज और लहसुन
  • तामसिक एवं तला-भुना भोजन
  • बैंगन और मूली

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन नियमों का पालन करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

पारण कब करें?
एकादशी व्रत का पारण 10 अगस्त 2026 को सुबह 5:47 बजे से 8:00 बजे के बीच करना शुभ रहेगा। पारण निर्धारित समय पर करने के बाद ही व्रत पूर्ण माना जाता है। श्रद्धालु पारण से पहले भगवान विष्णु का स्मरण करें और अपनी क्षमता के अनुसार दान-पुण्य भी करें।

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Success Story: रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर, फिर भी नहीं मानी हार; झुंझुनूं की लक्ष्मी बनीं टीम इंडिया की उपकप्तान

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