Gold ETF Demand: गोल्ड ईटीएफ में निवेश 136% बढ़ा, ज्वेलरी की मांग क्यों घटी?
सोने की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई के करीब होने के बावजूद निवेशकों का भरोसा गोल्ड पर लगातार मजबूत बना हुआ। हालांकि महंगे दामों की वजह से लोगों ने ज्वेलरी की खरीदारी कम की, लेकिन निवेश के लिए गोल्ड ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) की ओर रुझान तेजी से बढ़ा।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल-जून 2026 तिमाही में गोल्ड ईटीएफ में निवेश मूल्य के हिसाब से दोगुने से भी अधिक बढ़कर 6300 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
गोल्ड ईटीएफ में 49 फीसदी अधिक निवेश
रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2026 तिमाही में गोल्ड ईटीएफ में 4.2 टन का शुद्ध निवेश हुआ, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 2.8 टन था। यानी निवेश की मात्रा में 49% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं मूल्य के लिहाज से निवेश 2670 करोड़ रुपये से बढ़कर 6300 करोड़ रुपये हो गया, जो 136% की शानदार वृद्धि है। डॉलर में देखें तो निवेश 0.3 अरब डॉलर से बढ़कर 0.6 अरब डॉलर हो गया, यानी इसमें 104% का इजाफा हुआ।
ज्वेलरी की जगह ईटीएफ में बढ़ा निवेश
विशेषज्ञों का कहना है कि सोने की ऊंची कीमतों के कारण जहां ज्वेलरी खरीदना महंगा हो गया, वहीं निवेशकों ने गोल्ड ईटीएफ को बेहतर विकल्प माना। गोल्ड ETF में निवेश करने पर मेकिंग चार्ज, शुद्धता (Purity) और स्टोरेज जैसी परेशानियां नहीं होतीं। यही वजह है कि अनिश्चित बाजार और वैश्विक तनाव के बीच निवेशकों ने फिजिकल गोल्ड की बजाय फाइनेंशियल गोल्ड को प्राथमिकता दी।
भारत की गोल्ड डिमांड घटी
दिलचस्प बात यह है कि इस दौरान भारत की कुल गोल्ड डिमांड 6% घटकर 131.4 टन रह गई। ज्वेलरी की मांग में 15% की गिरावट आई और यह 75.1 टन पर पहुंच गई। इसके विपरीत, निवेश के उद्देश्य से खरीदे जाने वाले गोल्ड बार और सिक्कों की मांग 9% बढ़कर 50.3 टन हो गई। इससे साफ है कि महंगे दामों के बावजूद निवेशकों का सोने पर भरोसा कायम है।
जून तिमाही में गोल्ड ETF की प्रमुख बातें
- गोल्ड ETF में शुद्ध निवेश: 4.2 टन
- पिछले साल: 2.8 टन
- मात्रा में बढ़ोतरी: 49%
- निवेश मूल्य: 6300 करोड़
- पिछले साल: 2670 करोड़
- मूल्य में बढ़ोतरी: 136%
- डॉलर में निवेश: 0.3 अरब डॉलर से बढ़कर 0.6 अरब डॉलर
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की वरिष्ठ बाजार विश्लेषक लुईस स्ट्रीट के अनुसार, दूसरी तिमाही में कीमतों में कुछ नरमी आने के बावजूद गोल्ड की सुरक्षित निवेश और पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन की भूमिका मजबूत बनी रही। वहीं वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल इंडिया के रीजनल सीईओ सचिन जैन ने कहा कि वैश्विक स्तर पर ईटीएफ से निकासी के बावजूद भारत में गोल्ड ETF में 4.2 टन का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव, महंगाई की चिंता, ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और डिजिटल निवेश प्लेटफॉर्म की आसान पहुंच ने गोल्ड ETF में निवेश को बढ़ावा दिया है। आने वाले त्योहारी और शादी के सीजन में फिजिकल गोल्ड की मांग बढ़ सकती है, लेकिन यदि मौजूदा रुझान जारी रहा तो आने वाले महीनों में भारत के निवेश बाजार में गोल्ड ईटीएफ की हिस्सेदारी और बढ़ सकती है।
(प्रियंका कुमारी)
RBI FD Rules: 1 अक्टूबर से बदलेंगे FD के नियम, जानें ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा
भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंक डिपॉजिट से जुड़े नियमों में अहम बदलाव किए। नए नियम 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे। इनका मकसद बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना, ग्राहकों को समान ब्याज दर पक्का करना और बैंकों को बड़े डिपॉजिट के मामले में अधिक लचीलापन देना है। हालांकि, RBI ने साफ किया है कि इन बदलावों का मतलब यह नहीं है कि 1 अक्टूबर से फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की ब्याज दरें अपने आप बढ़ जाएंगी या घट जाएंगी।
RBI के नए नियम कमर्शियल बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक, रीजनल रूरल बैंक (RRB), लोकल एरिया बैंक, पेमेंट बैंक और शहरी सहकारी बैंकों पर लागू होंगे। यानी लगभग सभी प्रमुख बैंकिंग संस्थानों को इन नियमों का पालन करना होगा।
आरबीआई ने नियमों में किए बदलाव
नए नियमों के तहत बैंकों को डिपॉजिट और बल्क डिपॉजिट पर मिलने वाली ब्याज दरें पहले से अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक करनी होंगी। खासतौर पर बल्क डिपॉजिट की ब्याज दरें प्रत्येक कारोबारी दिन सुबह 10 बजे वेबसाइट पर जारी करनी होंगी। अगर किसी कारण से देरी होती है, तो अधिकतम 10:10 बजे तक इन्हें अपडेट करना अनिवार्य होगा।
एक तारीख पर जमा पैसे पर एक जैसा ब्याज
आरबीआई ने यह भी साफ किया है कि समान राशि और समान तारीख पर जमा किए गए डिपॉजिट पर सभी ग्राहकों को एक जैसी ब्याज दर मिलेगी। बैंक किसी शाखा, ग्राहक या स्थान के आधार पर अलग-अलग ब्याज दर नहीं दे सकेंगे। इससे ग्राहकों के बीच पारदर्शिता और समानता सुनिश्चित होगी।
हालांकि, रिजर्व बैंक ने बैंकों को बल्क डिपॉजिट पर अलग-अलग ब्याज दर तय करने की छूट भी दी है। बैंक यह फैसला अपनी फंडिंग जरूरत, बाजार की स्थिति, लिक्विडिटी और लिक्विडिटी कवरेज रेशियो से जुड़े नियमों को ध्यान में रखते हुए कर सकेंगे।
RBI के नए डिपॉजिट नियमों की बड़ी बातें
- नए नियम 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे।
- सभी बैंक वेबसाइट पर पहले से ब्याज दरें सार्वजनिक करेंगे।
- बल्क डिपॉजिट की ब्याज दरें हर कारोबारी दिन सुबह 10 बजे तक जारी करनी होंगी।
- समान राशि और तारीख वाले डिपॉजिट पर सभी ग्राहकों को समान ब्याज मिलेगा।
- बल्क डिपॉजिट पर बैंक जरूरत के अनुसार अलग ब्याज दर तय कर सकेंगे।
- नए नियमों में FD ब्याज दर बढ़ाने या घटाने का कोई निर्देश नहीं दिया गया है।
आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिक्स्ड डिपॉजिट की ब्याज दरें पहले की तरह बैंक ही तय करेंगे। इन पर बैंक की लिक्विडिटी, फंडिंग लागत, बाजार की स्थिति और आर्थिक परिस्थितियों का असर रहेगा। यानी 1 अक्टूबर से केवल नियम बदलेंगे, लेकिन FD की ब्याज दरों में कोई स्वतः बदलाव नहीं होगा।
कुल मिलाकर, रिजर्व बैंक के नए नियम ग्राहकों के लिए ज्यादा पारदर्शी और निष्पक्ष व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में कदम माने जा रहे हैं। इससे बैंकिंग प्रणाली में एकरूपता बढ़ेगी और ग्राहकों को ब्याज दरों की जानकारी पहले से स्पष्ट रूप से मिल सकेगी।
(प्रियंका कुमारी)
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