Bengal Election 2026: दूसरे चरण के चुनाव मे 2.3 लाख CAPF जवान और 38 हजार पुलिसकर्मी संभालेंगे मोर्चा
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण का मतदान बुधवार को होने जा रहा है। इस चरण में 7 जिलों की कुल 142 विधानसभा सीटों पर वोट डाले जाएंगे। अतीत में हुई चुनावी हिंसा और वर्तमान जोखिमों को देखते हुए चुनाव आयोग ने पूरे मतदान क्षेत्र को एक अभेद्य किले में तब्दील कर दिया है।
भारतीय चुनाव इतिहास में शायद ही कभी किसी राज्य में एक चरण के लिए इतनी भारी सुरक्षा तैनाती देखी गई हो। सुरक्षा के ऐसे कड़े इंतजाम किए गए हैं कि संवेदनशील इलाकों में परिंदा भी पर नहीं मार सकेगा।
सुरक्षा बलों की अभूतपूर्व तैनाती
चुनाव आयोग ने इस चरण के लिए सुरक्षा का जो खाका तैयार किया है, वह किसी सैन्य अभियान जैसा है। पूरे क्षेत्र में 2.3 लाख से अधिक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के जवान तैनात किए गए हैं। इनके साथ समन्वय के लिए 38,297 राज्य पुलिसकर्मियों को भी ड्यूटी पर लगाया गया है।
इसके अतिरिक्त, चुनाव की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए 142 सामान्य पर्यवेक्षक, 95 पुलिस पर्यवेक्षक और 100 व्यय पर्यवेक्षक तैनात हैं। सबसे खास बात यह है कि एनआईए (NIA) की विशेष टीमें भी संवेदनशील बूथों पर अपनी पैनी नजर रख रही हैं।
उपद्रवियों पर 'सर्जिकल स्ट्राइक'
मतदान से पहले ही चुनाव आयोग की सख्ती का असर दिखने लगा है। पिछले 72 घंटों के भीतर आयोग के कड़े निर्देशों के तहत 2,348 कथित उपद्रवियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। गिरफ्तार होने वालों में पानीहाटी और बर्धमान के टीएमसी पार्षद भी शामिल हैं, जिन पर चुनावी माहौल बिगाड़ने का आरोप है। इसके अलावा, 653 गैर-जमानती वारंट जारी किए गए हैं, ताकि मतदान के दौरान कोई भी बाहरी तत्व अशांति पैदा न कर सके।
संवेदनशील बूथों पर थ्री-लेयर सिक्योरिटी
कुल 41,001 मतदान केंद्रों में से लगभग 12,000 बूथों को संवेदनशील घोषित किया गया है। दक्षिण 24 परगना के भांगर, कैनिंग, फाल्टा और सोनारपुर जैसे इलाकों के साथ-साथ पूर्वी बर्धमान के केतुग्राम में त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT) तैनात किए गए हैं।
कोलकाता में सुरक्षा व्यवस्था सबसे अधिक सख्त है, जहाँ केंद्रीय बलों की 274 कंपनियां और 7,250 शहरी पुलिसकर्मी मिलकर 5,172 बूथों की सुरक्षा करेंगे। यह कोलकाता के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी सुरक्षा तैनाती है।
सात जिलों का चुनावी समीकरण
बुधवार को होने वाले इस मतदान में पूर्वी बर्धमान, हुगली, दक्षिण 24 परगना और कोलकाता समेत सात जिलों के मतदाता अपनी सरकार चुनेंगे। पूर्वी बर्धमान में 263 और हुगली ग्रामीण क्षेत्रों में 236 कंपनियों की तैनाती यह दर्शाती है कि आयोग किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।
चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन से निगरानी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा योजना को निर्वाचन क्षेत्रवार तैयार किया गया है, जिसमें भीतरी इलाकों और ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है।
Bengal Election 2026: अजय पाल शर्मा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका, बंगाल चुनाव से तुरंत हटाने की मांग
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच उत्तर प्रदेश के 'सिंघम' कहे जाने वाले IPS अजय पाल शर्मा की तैनाती को लेकर सियासी घमासान अब कानूनी लड़ाई में तब्दील हो गया है। चुनाव आयोग द्वारा दक्षिण 24 परगना में पुलिस ऑब्जर्वर बनाए गए अजय पाल शर्मा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है।
इस याचिका में मांग की गई है कि उन्हें तुरंत बंगाल की चुनावी ड्यूटी से हटाया जाए, ताकि राज्य में स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित हो सके।
याचिका में 'निष्पक्षता' पर उठाए गए गंभीर सवाल
सुप्रीम कोर्ट में ई-फाइलिंग के जरिए दाखिल इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि अजय पाल शर्मा एक निर्वाचन अधिकारी के रूप में अपनी निष्पक्षता खो चुके हैं। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि उनकी कार्यशैली और हालिया व्यवहार से मतदाताओं के मन में भय का माहौल पैदा हो रहा है।
याचिका में उनके 'एनकाउंटर स्पेशलिस्ट' वाले रिकॉर्ड का भी जिक्र किया गया है और कहा गया है कि उनकी मौजूदगी चुनाव प्रक्रिया के 'लेवल प्लेइंग फील्ड' को खराब कर रही है।
वायरल वीडियो और टीएमसी के आरोप बने आधार
यह मामला उस समय गरमाया जब दक्षिण 24 परगना के फलता इलाके का एक वीडियो वायरल हुआ। इस वीडियो में IPS अजय पाल शर्मा टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान के परिवार को सख्त चेतावनी देते और 'बदमाशी' करने पर गंभीर नतीजे भुगतने की बात कहते नजर आए थे। टीएमसी ने इसे डराने-धमकाने की राजनीति बताया है, जबकि अखिलेश यादव ने भी इस अफसर को 'भाजपा का एजेंट' करार दिया था। याचिका में इन्हीं घटनाओं को आधार बनाकर दावा किया गया है कि अजय पाल शर्मा अपने संवैधानिक दायरे से बाहर जाकर काम कर रहे हैं।
अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट से तुरंत दखल की मांग
याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 32 का हवाला देते हुए शीर्ष अदालत से तुरंत हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। याचिका में कहा गया है कि चुनाव आयोग के ऑब्जर्वर को एक तटस्थ संवैधानिक पदाधिकारी के रूप में काम करना चाहिए, लेकिन अजय पाल शर्मा का आचरण इसके विपरीत है। याचिका में जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 के प्रावधानों का जिक्र करते हुए कहा गया है कि यदि किसी अधिकारी की मौजूदगी से चुनावी माहौल दूषित होता है, तो उसे तुरंत हटाया जाना अनिवार्य है।
अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी नजरें
सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर जल्द ही सुनवाई कर सकता है। चूंकि बंगाल में दूसरे चरण का मतदान करीब है, इसलिए इस याचिका को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चुनाव आयोग ने अब तक अजय पाल शर्मा का बचाव करते हुए कहा है कि उनकी तैनाती कानून-व्यवस्था बनाए रखने और वोटरों को डराने-धमकाने वालों पर लगाम लगाने के लिए की गई है। अब देखना यह होगा कि देश की सबसे बड़ी अदालत यूपी के इस तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी की बंगाल में पारी जारी रखती है या उन्हें वापस भेजने का आदेश देती है।
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