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Explainer: लेजर हथियारों पर इतना बड़ा दांव क्यों लगा रहा अमेरिका? क्या ईरान के खिलाफ खोलेगा बड़ा मोर्चा

Explainer: अमेरिका और ईरान के बीच जंग शुरू हुए पांच महीने 10 दिन हो चुके हैं. दोनों देशों के बीच युद्ध कभी थम जाता है तो कभी ताबड़तोड़ हमले होने लगते हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अगस्त को इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ हमले रद्द कर दिए, हालांकि उन्होंने ये भी धमकी दी कि अगर 'जल्द' कोई समझौता नहीं हुआ तो उनके तो ईरान के लिए बुरा होगा. इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरानी नेतृत्व के सामने दो विकल्प रखे हैं, जिसमें पहला समझौता करना और दूसरा पूरी तरह आत्मसमर्पण करना.

ईरान और ओमान के बीच चल रही बातचीत

फिलहाल ईरान और ओमान के बीच बातचीत चल रही है. हालांकि ये बातचीत दोनों देशों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए चल रही है. इस बातचीत के तहत कमर्शियल शिपिंग के लिए एक प्रस्तावित ढांचे को अंतिम रूप देने के करीब हैं. एक नए रास्ते को लेकर भी चर्चा हो रही है. लेकिन अमेरिका के साथ बातचीत फिलहाल टली हुई है. क्योंकि ईरान ने अमेरिका से बातचीत करने से इनकार किया है. 

ईरान के साथ मुश्किल भरी होगी बातचीत- वेंस

अमेरिकी राष्ट्रपति जेडी वेंस ने हाल ही में फॉक्स न्यूज के एक इंटरव्यू में कहा कि बातचीत मुश्किल भरी होगी, क्योंकि उन्होंने ईरानियों को "बेहद मुश्किल लोग" बताया. इस बीच, ईरान समर्थित हूतियों ने इलाके में जहाजों को निशाना बनाया. हूती विद्रोहियों ने दो हमले किए. जिनमें एक भारतीय जहाज पर किया गया. दुबई के जेबेल अली में 5 अगस्त तड़के सात धमाकों की खबर मिली; इराकी मीडिया का कहना है कि ये धमाके यमन से हुए मिसाइल हमले के कारण हुए. बाद में नासा की थर्मल इमेजिंग से बंदरगाह के पास एक गोदाम में आग लगने का पता चला.

अपनी एयर डिफेंस रणनीति को बदलने जा रहा अमेरिका

इस बीच खबर है कि आधुनिक युद्ध की बढ़ती चुनौतियों के बीच, अमेरिका अपनी एयर डिफेंस रणनीति में दशकों के सबसे बड़े बदलावों में से एक करने जा रहा है. पेंटागन अब 'डायरेक्टेड-एनर्जी हथियारों' को अमेरिकी सेना के कॉम्बैट शस्त्रागार का स्थायी हिस्सा बनाने की तैयारी कर रहा है. बीते मंगलवार को आई एक रिपोर्टों से इसकी पुष्टि हुई कि अमेरिकी रक्षा विभाग आधिकारिक तौर पर हाई-एंड 'डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स' (निर्देशित ऊर्जा हथियार) को अमेरिकी लड़ाकू हथियारों के जखीरे का एक स्थायी और बड़े पैमाने पर खरीदे जाने वाला हिस्सा बना रहा है.

पांच दशकों से ज्यादा समय तक प्रयोगशाला में परीक्षण, सीमित प्रोटोटाइप के इस्तेमाल और महंगे प्रायोगिक विफलताओं के बाद, पेंटागन 'एंड्योरिंग हाई एनर्जी लेजर' (EHEL) प्रोग्राम के लिए एक अहम समझौते को अंतिम रूप दे रहा है. इस खरीद प्रक्रिया के साथ-साथ अमेरिकी वायु सेना यूरोप में सक्रिय रूप से इन्हें तैनात भी कर रही है.

रक्षा उद्योग अब सस्ते और बड़े पैमाने पर बनने वाले दुश्मन के ड्रोनों पर करोड़ों डॉलर के 'काइनेटिक इंटरसेप्टर' (टक्कर मारकर नष्ट करने वाले हथियार) दागने का जोखिम नहीं उठा सकता. इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और नए कम लागत वाले इंटरसेप्टर के साथ हाई-एनर्जी टैक्टिकल लेजर तैनात करके, पेंटागन आधुनिक, बड़े पैमाने पर होने वाले और ऑटोमेटेड युद्ध की हकीकत को ध्यान में रखते हुए एक बहु-स्तरीय हवाई रक्षा कवच तैयार कर रहा है.

'एंड्योरिंग हाई एनर्जी लेजर' समझौता

अमेरिकी सेना ने आधिकारिक तौर पर 'एंड्योरिंग हाई एनर्जी लेजर' (EHEL) पहल के लिए प्रतिबद्धता जताई है. सेना द्वारा जारी किए गए ड्राफ्ट प्रस्तावों से पुष्टि होती है कि वे तत्काल ऑपरेशनल बेस की सुरक्षा के लिए 24 तक स्टैंडर्ड EHEL सिस्टम बनाने और तैनात करने की उद्योग की क्षमता की जांच करने की योजना बना रहे हैं. इस बात की जानकारी सबसे पहले 'वायर्ड' ने दी थी. पहले के प्रोटोटाइप प्रोजेक्ट्स के उलट, जिनमें बहुत कम संख्या में और खास मकसद वाली यूनिट्स बनाई जाती थीं. जिन्हें मिलिट्री अधिकारी अक्सर "onesies and twosies" (बहुत कम संख्या) कहते थे. ईएसआईएल प्रोग्राम एक ऐसा प्रोडक्शन मॉडल है जिसे बार-बार दोहराया जा सकता है, जो मॉड्यूलर है और जिसे जरूरत के हिसाब से बढ़ाया जा सकता है.

क्या हैं हाई एनर्जी लेजर सिस्टम की खास बातें

  • सिस्टम आर्किटेक्चर: हाई-एनर्जी, मॉड्यूलर सॉलिड-स्टेट फाइबर लेजर सिस्टम.
  • ऑपरेशनल पावर आउटपुट: शुरुआती प्रोडक्शन यूनिट्स की क्षमता शॉर्ट-रेंज पॉइंट डिफेंस के लिए लगभग 30 kW से 50 kW है, और इसे और बढ़ाने की सुविधा भी है.
  • मेंटेनेंस स्टैंडर्ड: इसे लाइन-रिप्लेसेबल यूनिट्स (LRUs) के आधार पर डिजाइन किया गया है. ज्यादा खराब होने वाले ऑप्टिकल पार्ट्स, थर्मल कूलिंग लाइन्स और डायोड मॉड्यूल्स को मिलिट्री के लोग फील्ड में ही बदल सकते हैं; इसके लिए लैब-ग्रेड "क्लीन रूम" की जरूरत नहीं होती.
  • प्लेटफॉर्म डीकपलिंग: इसमें ओपन-आर्किटेक्चर कमांड सॉफ़्टवेयर (जैसे AI-आधारित इंटीग्रेटेड बैटल कमांड सिस्टम मैन्यूवर, या IBCS-M) शामिल है, जो मुख्य डायरेक्टेड-एनर्जी इंजन को गाड़ी/कंटेनर माउंटिंग से अलग रखता है.
  • US एयर फोर्स ने यूरोप और अफ्रीका में CLWS को तैनात किया है. अमेरिका ने यूरोप में कुछ गुप्त और बहुत संवेदनशील एयर बेस पर बोइंग के कॉम्पैक्ट लेजर वेपन सिस्टम को ऑपरेशन के लिए तैनात किया है. अमेरिका ने यह कदम पिछले 24 महीनों में NATO के ठिकानों और एयर बेस के पास सैकड़ों अनधिकृत ड्रोन घुसपैठ और जासूसी उड़ानों का पता चलने के बाद उठाया गया है.

प्रकाश की गति से इंटरसेप्ट: यह एक केंद्रित हाई-पावर फोटॉन बीम छोड़ता है जो कुछ ही सेकंड में एयरफ्रेम के ढांचे को पिघलाने, गाइडेंस इलेक्ट्रॉनिक्स को जलाने या पेलोड ऑप्टिक्स को नष्ट करने में सक्षम है.

  • बड़ी मैगजीन क्षमता: यह सिस्टम सीधे स्थानीय मिलिट्री जनरेटर या भारी टैक्टिकल बैटरी एरे से बिजली लेता है, इसलिए इसकी मैगजीन क्षमता लगभग असीमित होती है, जो केवल थर्मल कूलिंग साइकिल से सीमित होती है.
  • मल्टी-कॉन्फ़िगरेशन इंटीग्रेशन: यह रनवे की सुरक्षा के लिए कंटेनर वाले स्थिर यूनिट के रूप में या तेजी से आगे तैनात करने के लिए हल्के टैक्टिकल वाहनों पर सीधे लगाकर इस्तेमाल किया जा सकता है.
  • पैसिव टैक्टिकल फुटप्रिंट: लेजर फायर करने से कोई विस्फोटक धमाका या फायर करने की आवाज नहीं होती, जिससे दुश्मन के रडार सिस्टम के लिए डिफेंस सिस्टम की जमीन पर सटीक लोकेशन का पता लगाना मुश्किल हो जाता है.

अमेरिका ने क्यों किया अपनी सेना में बदलाव

पेंटागन का लेजर को प्रोडक्शन में लाने का फैसला आर्थिक जरूरतों की वजह से लिया गया है. पूर्वी यूरोप और रेड सी में आधुनिक युद्ध अभियानों से एयर डिफेंस में लागत का एक खतरनाक अंतर सामने आया है.

  • दुश्मन अक्सर लंबी दूरी तक मार करने वाले 'लोइटरिंग म्यूनिशन' (जैसे ईरान में बने शाहेद-136) या कमर्शियल रेसिंग ड्रोन का इस्तेमाल करते हैं, जिनमें विस्फोटक लगे होते हैं और जिनकी कीमत $500 से $35,000 के बीच होती है.
  • हवाई सुरक्षा की पारंपरिक रणनीतियां MIM-104 पैट्रियट, RIM-116 RAM या FIM-92 स्टिंगर जैसी रडार-गाइडेड सतह-से-हवा में मार करने वाली मिसाइलों पर निर्भर थीं.

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