सरफराज खान की जगह टीम में शामिल हुआ 25 साल का खिलाड़ी, घरेलू क्रिकेट में मचा चुका है धमाल
मुंबई से आने वाले सरफराज खान की लंबे समय बाद टीम इंडिया में वापसी हुई है. उन्हें श्रीलंका दौरे पर खेली जाने वाले दो टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए टीम इंडिया के स्क्वाड में शामिल किया गया है. उन्हें चोटिल साई सुदर्शन की जगह टीम इंडिया में जगह मिली है. इंजरी की वजह से साई सुदर्शन श्रीलंका टेस्ट सीरीज से बाहर हो गए, जिसके बाद सरफराज खान को रिप्लेसमेंट के तौर पर टीम में शामिल किया गया. सरफराज खान ने अपना आखिरी टेस्ट मैच नवंबर 2024 में खेला था. बता दें कि सरफराज दलीप ट्रॉफी 2026 के लिए वेस्ट जोन की टीम का हिस्सा थे, लेकिन अब उन्हें नेशनल टीम में मौका मिला है, तो दलीप ट्रॉफी में उनकी जगह खाली हो गई है, जिसके बाद वेस्ट जोन की टीम ने अब सरफराज के रिप्लेसमेंट का ऐलान कर दिया है. टीम में सौराष्ट्र के 25 साल के बल्लेबाज जय गोहिल को शामिल किया गया है.
सौराष्ट्र के लिए जय गोहिल का प्रदर्शन रहा था शानदार
वेस्ट जोन और मुंबई के चीफ सेलेक्टर राजेश पवार ने बताया कि सरफराज खान की जगह जय गोहिल को टीम में शामिल किया गया है. इससे पहले उन्हें रिजर्व खिलाड़ियों में रखा गया था. गोहिल ने रणजी ट्रॉफी के उस सीजन में शानदार प्रदर्शन किया था. बता दें कि जय गोहिल वेस्ट जोन की टीम में विकेटकीपर हार्विक देसाई के बाद सौराष्ट्र के दूसरे खिलाड़ी बन गए हैं. उन्होंने अपने पहले फर्स्ट-क्लास मैच में डेब्यू दिसंबर 2022 में असम के खिलाफ किया था. गोहिल रणजी ट्रॉफी 2022-23 का खिताब जीतने वाली सौराष्ट्र टीम का भी हिस्सा थे. उस सीजन में उन्होंने लगभग 37 की औसत से कुल 337 रन बनाए थे.
???? Saurashtra batter Jay Gohil, who was in the standbyes, to replace Sarfaraz Khan in the West Zone squad for the Duleep Trophy. Gohil scored 523 runs in 6 matches AVG 58.11, including 1 century & 4 half centuries for Saurashtra in the 2025-26 Ranji Trophy season.#JayGohil https://t.co/OirbmgOHpv pic.twitter.com/zjT3VovqUX
— hemanttt (@UmeansRUTU31) August 10, 2026
दलीप ट्रॉफी 2026 के लिए वेस्ट जोन का स्क्वॉड: ऋतुराज गायकवाड़ (कप्तान), शम्स मुलानी (उपकप्तान), शार्दुल ठाकुर, मुशीर खान, तुषार देशपांडे, तनुश कोटियन, सिद्धार्थ देसाई, अतीत शेठ, पृथ्वी शॉ, शिवालिक शर्मा, मुकेश चौधरी, हार्विक देसाई (विकेटकीपर), जयमीत पटेल, उर्विल पटेल और जय गोहिल
गुजरात में चांदीपुरा वायरस के 225 संदिग्ध मामले, मरने वालों की संख्या बढ़कर 25 हुई
गांधीनगर, 10 अगस्त (आईएएनएस)। गुजरात में 30 जून से अब तक चांदीपुरा वायरस के 225 संदिग्ध मामले सामने आए हैं। इनमें से 39 मामलों की पुष्टि लैब टेस्ट से हुई है और पुष्टि किए गए मरीजों में से 25 की मौत हो चुकी है। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग ने सोमवार को ताजा आंकड़े जारी किए।
इस महीने की शुरुआत में राज्य की पिछली ब्रीफिंग में 184 संदिग्ध मामले बताए गए थे, जिनकी संख्या अब 41 बढ़कर 225 हो गई है, जबकि पुष्टि किए गए मामलों की संख्या 39 पर ही बनी हुई है।
चांदीपुरा-पॉजिटिव मरीजों में मरने वालों की संख्या 22 से बढ़कर 25 हो गई है। 225 संदिग्ध मामलों में से 212 की लैब टेस्टिंग पूरी हो चुकी है। बाकी 13 सैंपल के नतीजों का इंतजार है, यानी उन रिपोर्ट के आने के बाद पुष्टि किए गए मामलों की संख्या बदल सकती है। ताजा आंकड़े 30 जून से 10 अगस्त तक की अवधि के हैं।
इस बीमारी का पता सबसे पहले पंचमहल में चला था, जहां जुलाई की शुरुआत में चांदीपुरा संक्रमण के लक्षण दिखने के बाद दो छोटे बच्चों की मौत हो गई थी। इन मौतों के बाद प्रभावित इलाकों में निगरानी, टेस्टिंग और वेक्टर-कंट्रोल (रोग फैलाने वाले कीटों पर नियंत्रण) के उपाय तेज कर दिए गए। इसके बाद पूरे राज्य में मामलों की संख्या बढ़ गई।
20 जुलाई को स्वास्थ्य विभाग ने 63 संदिग्ध मामलों की जानकारी दी थी, जिनमें से 12 की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। उस समय आठ सैंपल के नतीजे आने बाकी थे।
स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानसेरिया ने कहा था कि विभाग प्रभावित इलाकों पर बारीकी से नजर रख रहा है, मरीजों की यात्रा और केस हिस्ट्री की जांच कर रहा है और वेक्टर-कंट्रोल के उपायों को मजबूत कर रहा है।
अगस्त की शुरुआत तक, राज्य में 184 संदिग्ध मामले, 35 पुष्टि किए गए संक्रमण और 22 मौतें दर्ज की गई थीं।
उस समय की रिपोर्ट में बताया गया था कि पुष्टि किए गए सभी मरीज 15 साल से कम उम्र के थे और संक्रमण गुजरात के अलग-अलग हिस्सों से सामने आया था, न कि किसी एक गांव या जिले तक सीमित था।
चांदीपुरा वायरस एक वेक्टर-जनित (कीटों से फैलने वाला) संक्रमण है, जो खासकर बच्चों में एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (मस्तिष्क में गंभीर सूजन) का कारण बन सकता है।
यह मुख्य रूप से सैंडफ्लाई के जरिए फैलता है और मानसून के मौसम में इसके मामले ज्यादा सामने आते हैं। महामारी की शुरुआत में स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टरों को सलाह दी थी कि वे बच्चों के संदिग्ध मामलों को बिना देरी किए ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की सुविधा वाले अस्पतालों में भेजें।
पानसेरिया ने यह भी कहा था कि समय पर बीमारी का पता लगाने के लिए लैब टेस्टिंग में तेजी लाई जा रही है। 13 लैब रिपोर्ट अभी भी आनी बाकी हैं, इसलिए स्वास्थ्य अधिकारी निगरानी और टेस्टिंग जारी रखे हुए हैं और राज्य महामारी पर नजर बनाए हुए है।
--आईएएनएस
एएसएच/डीकेपी
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