इन दिनों इंस्टाग्राम पर ‘वृत्तिका पटेल’ नाम की एक लाइफस्टाइल क्रिएटर को लेकर जबरदस्त चर्चा हो रही है। शुरुआत में लोग उन्हें एक आम इन्फ्लुएंसर समझ रहे थे, लेकिन बाद में खुलासा हुआ कि वह कोई वास्तविक व्यक्ति नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तैयार किया गया एक डिजिटल किरदार है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बड़ी संख्या में यूजर्स इस वर्चुअल पर्सनालिटी के कंटेंट को देखने के लिए पैसे भी चुका रहे हैं। इसी वजह से सोशल मीडिया पर अब इस तरह के एआई अवतारों की विश्वसनीयता और नैतिक पहलुओं को लेकर बहस तेज हो गई है।
कौन हैं आखिर वृत्तिका पटेल?
सोशल मीडिया पर वृत्तिका पटेल के अकाउंट पर आपको फैशन और लाइफस्टाइल से संबंधित बेहद ही शानदार तस्वीरें देखने को मिलेंगी। तस्वीरों में वह कभी नीले कुर्ते में फूलों के बैकग्राउंड में पोज देती नजर आएंगी या फिर दीव के बीच पर घूमती हुई या कैफे में पास्ता खाती दिखाई देती हैं। ये तस्वीरें इतनी असली लगती हैं किसी के लिए यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि यह एक एआई के दौरान बनाई गई है तस्वीर है या असली इंसान।
एआई इन्फ्लुएंसर्स आखिर क्यों होते हैं
वृतिका पटेल उन ‘एआई इन्फ्लुएंसर्स’ की नई लहर का हिस्सा हैं, जो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। ‘इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग हब’ की रिपोर्ट के मुताबिक, एआई इन्फ्लुएंसर दरअसल वर्चुअल कैरेक्टर होते हैं, जिन्हें तकनीक की मदद से डिजाइन किया जाता है। इन डिजिटल अवतारों को एक खास पहचान और व्यक्तित्व दिया जाता है, ताकि वे असली इंसानों की तरह कंटेंट बना सकें, लोगों से जुड़ सकें और ब्रांड्स को प्रमोट कर सकें।
एआई इन्फ्लुएंसर्स का बढ़ता हुआ ट्रेंड
वृत्तिका पटेल की तरह कई प्रोफाइल इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रही है। एआई-जनरेटेड इनफ्लुएंसर्स की एक नई और बड़ी कैटेगरी का हिस्सा हैं। इन किरदारों को बनाने के लिए आपको सिर्फ आधुनिक एआई टूल्स का सहारा मिलेगा। जो काफी सटीकता से काम करता हो, जो कि इंसान और कंप्यूटर के जरिए तैयार तस्वीरों या वीडियो के बीच का अंतर लगभग खत्म हो जाता है।
एआई मॉडल से कैसे हो रही है लाखों की कमाई?
चाहे वृतिका पटेल असली न हों, लेकिन उनके पीछे काम कर रहा इंसान को असली पैसे मिल रहे हैं। फरवरी 2026 की बिजनेस ऑफ फैशन की रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे फेक इन्फ्लुएंसर ब्रांड कोलैबोरेशन, एफिलिएट लिंक और सब्सक्रिप्शन मॉडल के जरिए असली कैश जनरेट करता है।
यदि वृतिका की कमाई के गणित को समझें तो यह वाकई हैरान कर देगा। उनके इंस्टा पर कुछ ऐसे प्रशंसक हैं जिन्होंने उनका पेड़ सब्सक्रिप्शन लिया हुआ है। हर सब्सक्राइबर इसके लिए हर महीने 399 रुपए फीस देता है, जिसका सीधा अर्थ हैकि सिर्फ सब्सक्रिप्शन के जरिए एआई इन्फ्लुएंसर वृतिका या उनकी टीम हर महीने 1,19,700 रुपये कमा रही हैं।
वहीं, करीब 1.1 लाख रुपये की कमाई तो महज शुरुआत है। इसमें ब्रांड कोलैबोरेशन और विज्ञापनों से होने वाली इनकम को अभी जोड़ा ही नहीं गया है।
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दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने महिलाओं को 2,500 रुपये प्रति माह देने के चुनावी वादे को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर मंगलवार को सवाल उठाए और आम आदमी पार्टी (आप) के सात राज्यसभा सदस्यों के भाजपा में शामिल होने को ‘‘असंवैधानिक’’ करार दिया।
आतिशी ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पिछले साल हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने जनवरी में वादा किया था कि राष्ट्रीय राजधानी की महिलाओं को उसी साल आठ मार्च से हर महीने 2,500 रुपये उनके बैंक खातों में मिलने लगेंगे।
उन्होंने कहा कि महिलाओं से अपने बैंक खातों को मोबाइल नंबर से लिंक करने के लिए कहा गया था और यह आश्वासन दिया गया था कि राशि जमा होने की पुष्टि का संदेश उन्हें मिलेगा।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “आठ मार्च 2025 गुजर चुका है और अब आठ मार्च 2026 भी बीत गया लेकिन दिल्ली की महिलाओं के खातों में 2,500 रुपये नहीं आए हैं।”
आतिशी ने आरोप लगाया कि भाजपा ने इस वादे के आधार पर महिलाओं के वोट हासिल किए और कहा कि शहर की महिलाएं अब भी इस वित्तीय सहायता के मिलने का इंतजार कर रही हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि महिलाओं को सार्वजनिक सेवाओं का लाभ लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जो महिलाएं पहले डीटीसी बसों में आसानी से सफर करती थीं, अब उन्हें ‘पिंक कार्ड’ के लिए कतार में खड़ा होना पड़ रहा है, जबकि मुफ्त दवाओं, इलाज और जांच की सुविधाएं भी प्रभावित हुई हैं।
आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सदस्यों के भाजपा में शामिल होने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इस फैसले को स्वीकार करना संवैधानिक प्रावधानों और दलबदल विरोधी कानून के खिलाफ है।
उन्होंने कहा कि संविधान के अनुसार किसी विलय को मान्यता देने के लिए मूल राजनीतिक दल का विलय होना जरूरी है और इसके लिए विधायी दल के कम से कम दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन होना चाहिए।
उनके अनुसार, ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो मूल पार्टी के विलय के बिना केवल दो-तिहाई सांसदों को किसी अन्य दल में शामिल होने की अनुमति देता हो।
आम आदमी पार्टी के नेताओं ने भी कहा है कि यह कदम दलबदल विरोधी ढांचे का उल्लंघन करता है और वे इस मुद्दे को संवैधानिक और कानूनी माध्यमों से उठाते रहेंगे।
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