'अहंकारी रावण का अंत माता सीता के अपमान...', महिला आरक्षण को लेकर विपक्ष पर बरसे CM धामी, विधानसभा के विशेष सत्र में हंगामा
Uttarakhand Assembly Special Session 2026: विधानसभा के विशेष सत्र में सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उन्हें (विपक्ष को) डर था कि सामान्य घर की महिलाएं राजनीति में आएंगी तो इनकी वंशवाद की राजनीति खत्म हो जाएगी।
बोली लगाकर बनते हैं भगवान के माता-पिता! जैन पंच कल्याण महोत्सव की अनोखी परंपरा का अद्भुत सच
Jain Five Auspicious Events : जैन धर्म में पंच कल्याण महोत्सव सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और अनोखी मान्यताओं का जीवंत संगम है. यह भव्य महोत्सव आमतौर पर नए जैन मंदिर की प्रतिष्ठा के दौरान आयोजित किया जाता है, जिसमें भगवान के जीवन के पांच प्रमुख चरण - गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान और मोक्ष - का विस्तार से वर्णन और मंचन किया जाता है. इस आयोजन की सबसे खास और चर्चा में रहने वाली परंपरा है भगवान के माता-पिता बनने के लिए बोली लगाना. श्रद्धालु इस भूमिका को निभाने के लिए बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं और कई बार यह बोली लाखों से लेकर करोड़ों रुपये तक पहुंच जाती है. धार्मिक दृष्टि से यह केवल आर्थिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि गहरी आस्था और समर्पण का प्रतीक माना जाता है. बोली जीतने वाले श्रद्धालु भगवान महावीर स्वामी के माता-पिता - माता त्रिशला और राजा सिद्धार्थ - का स्वरूप धारण करते हैं और पूरे आयोजन के दौरान सख्त नियमों का पालन करते हैं. उनके खान-पान, व्यवहार और जीवनशैली में पूरी पवित्रता जरूरी होती है. तीन दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में भगवान के जीवन से जुड़े प्रसंगों का भव्य मंचन होता है, जिसमें हर भूमिका को श्रद्धा के साथ निभाया जाता है. यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करता है, बल्कि समाज की सामूहिक भागीदारी और परंपराओं की खूबसूरती को भी उजागर करता है.
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