बिहार में बदमाशों ने पति-पत्नी और बच्चे को मारी गोली, नाक-कान और गले से गहने नोच लिए
अपराधियों ने करीब एक किमी तक उनका पीछा किया और रेपुरा चौर में सुनसान जगह पर ओवरटेक कर घेर लिया। श्वेता की कनपटी पर पिस्टल सटाकर गहने उतारने को बोला। इसका पति व पत्नी ने विरोध किया। इस पर गोली चला दी। श्वेता की कनपटी में गोली लगी।
ईरान ने अमेरिका की दुखती रग पर रखा हाथ: 'आर्थिक नाकेबंदी खत्म करो, होर्मुज का रास्ता ले लो', जानिए पूरा मामला
ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) को लेकर अमेरिका के सामने एक अहम प्रस्ताव रखा है।
ईरान का कहना है कि वह जहाजों की आवाजाही के लिए इस रास्ते को पूरी तरह खोलने के लिए तैयार है, लेकिन इसके बदले अमेरिका को उस पर लगी कड़ी आर्थिक पाबंदियां हटानी होंगी। यह प्रस्ताव एक ऐसे समय में आया है जब पूरी दुनिया तेल संकट और युद्ध की आहट से सहमी हुई है।
पाकिस्तान बना 'शांति का दूत', अमेरिका तक पहुंचा संदेश
हैरानी की बात यह है कि ईरान ने यह प्रस्ताव सीधे तौर पर नहीं, बल्कि पाकिस्तान के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया है। ईरान का तर्क है कि यदि अमेरिका उसकी आर्थिक नाकेबंदी खत्म करता है और तनाव कम करने की दिशा में ठोस कदम उठाता है, तो वह इस समुद्री मार्ग को दोबारा सुचारू कर देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान इस प्रस्ताव के जरिए अमेरिका पर दबाव बनाना चाहता है, क्योंकि होर्मुज के बंद होने का सीधा असर वैश्विक बाजार पर पड़ता है।
दुनिया की 20% तेल सप्लाई और होर्मुज की अहमियत
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग है, क्योंकि यहाँ से विश्व की कुल तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। इस रास्ते पर ईरान का नियंत्रण होने के कारण वैश्विक तेल की कीमतों पर उसका सीधा प्रभाव रहता है। यही वजह है कि संयुक्त राष्ट्र (UN) प्रमुख ने भी अमेरिका-ईरान वार्ता ठप होने के बीच इस रास्ते को खोलने का आग्रह किया है। यूएन का मानना है कि व्यापारिक जहाजों के लिए 'कोई टोल और कोई भेदभाव नहीं' की नीति अपनाई जानी चाहिए।
डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी और ईरान का रुखअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले भी कई बार ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चेतावनी दी है। ट्रंप प्रशासन का रुख हमेशा से सख्त रहा है, और उन्होंने ईरान को इसे पूरी तरह खोलने के लिए मजबूर करने की कोशिश की है। हालांकि, ईरान ने अभी तक इसे पूरी तरह नहीं खोला है और इसे एक सौदेबाजी के हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। ईरान का कहना है कि जब तक उसकी अर्थव्यवस्था को दबाया जाएगा, तब तक वह भी अपने हितों की रक्षा के लिए इस समुद्री मार्ग पर नियंत्रण बरकरार रखेगा।
क्या थमेगा तनाव या बढ़ेगी तकरार?
संयुक्त राष्ट्र के हस्तक्षेप और ईरान के नए प्रस्ताव के बाद अब गेंद अमेरिका के पाले में है। यदि अमेरिका पाबंदियां हटाने पर विचार करता है, तो यह मध्य पूर्व में शांति की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकता है। लेकिन अगर वार्ता विफल रहती है, तो आने वाले समय में तेल की कीमतों में भारी उछाल और सामरिक तनाव और बढ़ने की आशंका है। पूरी दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि अमेरिका इस 'ऑफर' पर क्या प्रतिक्रिया देता है।
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