Amrit Bharat Trains: यूपी से महाराष्ट्र जाना होगा अब बेहद सस्ता, इस रूट पर दौड़ेंगी 2 नई अमृत भारत एक्सप्रेस
Amrit Bharat Trains: भारतीय रेलवे ने आम आदमी के सफर को सुगम और सस्ता बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है. 28 अप्रैल से देश के रेल नेटवर्क में दो नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें शामिल होने जा रही हैं. यह ट्रेनें विशेष रूप से उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच चलने वाली भीड़ को ध्यान में रखकर शुरू की जा रही हैं. रेलवे का यह फैसला उन लाखों यात्रियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जो अक्सर काम के सिलसिले में या धार्मिक यात्रा के लिए इन दो राज्यों के बीच आवाजाही करते हैं. इन ट्रेनों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इन्हें कम आय और निम्न मध्यम वर्ग के यात्रियों की जरूरतों को देखते हुए तैयार किया गया है.
इन रूटों पर शुरू होंगी नई ट्रेनें
रेलवे द्वारा जारी जानकारी के अनुसार पहली अमृत भारत एक्सप्रेस बनारस (वाराणसी) से हडपसर (पुणे) के बीच चलाई जाएगी. वहीं दूसरी ट्रेन अयोध्या कैंट से लोकमान्य तिलक टर्मिनस (मुंबई) के बीच अपनी सेवाएं देगी. इन दोनों ही रूटों पर यात्रियों का भारी दबाव रहता है. वाराणसी और अयोध्या जैसे धार्मिक केंद्रों का सीधा संपर्क मुंबई और पुणे जैसे आर्थिक केंद्रों से होने के कारण अब यात्रियों को कंफर्म टिकट मिलने में आसानी होगी. इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि उत्तर प्रदेश के लोगों का महाराष्ट्र के बड़े शहरों से संपर्क और भी मजबूत हो जाएगा.
आम आदमी की जरूरतों का रखा गया ख्याल
अमृत भारत एक्सप्रेस को अक्सर आम आदमी की वंदे भारत कहा जाता है. जहां वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनों का किराया अधिक होता है, वहीं अमृत भारत को इस तरह डिजाइन किया गया है कि लंबी दूरी की यात्रा बहुत ही कम खर्च में पूरी की जा सके. यह ट्रेनें उन प्रवासी मजदूरों और श्रमिकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं जो रोजी रोटी की तलाश में मुंबई और पुणे जैसे शहरों में रहते हैं. इसके अलावा अयोध्या और वाराणसी जाने वाले तीर्थयात्रियों के लिए भी यह एक किफायती विकल्प साबित होगी. सरकार का मुख्य उद्देश्य कम बजट में यात्रियों को बेहतरीन और सुरक्षित यात्रा का अनुभव देना है.
आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे डिब्बे
सुविधाओं की बात करें तो इन ट्रेनों में कुल 22 डिब्बे होंगे. इसमें स्लीपर क्लास और जनरल क्लास के डिब्बों का मानक संयोजन रखा गया है ताकि अधिक से अधिक लोग यात्रा कर सकें. यात्रियों की सुविधा के लिए ट्रेन में पैंट्री कार की व्यवस्था भी की गई है जिससे लंबे सफर के दौरान खाने पीने की चिंता नहीं रहेगी. सुरक्षा के लिहाज से हर डिब्बे में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और बैठने के लिए पहले से बेहतर और आरामदायक सीटों का इस्तेमाल किया गया है. इन ट्रेनों में पुश पुल तकनीक का प्रयोग होता है जिससे ट्रेन की रफ्तार और पकड़ दोनों ही शानदार रहती है.
कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास को मिलेगी गति
इन नई ट्रेनों की शुरुआत केवल यात्रा तक सीमित नहीं है बल्कि इसका व्यापक असर आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ेगा. वाराणसी और अयोध्या उत्तर प्रदेश के प्रमुख पर्यटन और व्यापारिक केंद्र हैं. इन शहरों का जुड़ाव जब देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से होगा तो व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. रेलवे की इस बड़ी योजना का लक्ष्य उन रेल मार्गों पर भीड़ कम करना है जहां साल भर यात्रियों की लंबी प्रतीक्षा सूची रहती है. इन ट्रेनों के चलने से सड़क मार्ग और निजी बसों पर निर्भरता कम होगी जिससे आम नागरिक का पैसा बचेगा.
हर वर्ग उठा सकेगा आधुनिक सुविधाओं का लाभ
भारतीय रेलवे का यह विस्तार दिखाता है कि भविष्य में रेल यात्रा केवल अमीरों तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि हर वर्ग का व्यक्ति आधुनिक सुविधाओं का लाभ उठा सकेगा. 28 अप्रैल से शुरू होने वाली यह सेवाएं भारतीय रेल के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ेंगी. यात्रियों को उम्मीद है कि आने वाले समय में ऐसे और भी रूट चिन्हित किए जाएंगे जहां अमृत भारत जैसी ट्रेनों की सख्त जरूरत है. फिलहाल वाराणसी और अयोध्या के लोगों के बीच इस नई शुरुआत को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है.
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दक्षिण चीन सागर में ‘बालिकातन’ अभ्यास, सात देशों के 11 जहाजों का संयुक्त समुद्री शक्ति प्रदर्शन
मनीला, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। दक्षिण चीन सागर में सोमवार को फिलीपींस, जापान, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अमेरिका के कुल 11 जहाज एक साथ रवाना हुए। सैन्य अभ्यास बालिकातन के तहत 11 जहाजों ने संयुक्त समुद्री शक्ति प्रदर्शन किया।
इस मल्टीनेशनल समुद्री अभ्यास में फिलीपींस की सशस्त्र सेनाएं, जापान की मरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स (जेएसडीएफ), रॉयल ऑस्ट्रेलियन नेवी, रॉयल कैनेडियन नेवी, यूएस कोस्ट गार्ड और यूएस नेवी के जहाज शामिल हैं।
फिलीपींस नेवी ने बताया कि बालिकातन एक पुराना और हर साल होने वाला अभ्यास है, जो फिलीपींस और अमेरिका की सेनाओं के बीच साझेदारी को दिखाता है। इसका मकसद मिलकर काम करने की क्षमता को बेहतर बनाना और क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखना है।
अमेरिकी नौसेना ने कहा कि यह अभ्यास दिखाता है कि सभी देश मिलकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
यह बालिकातन अभ्यास आठ मई तक चलेगा और इसमें कुल सात देशों के लगभग 17,000 सैनिक हिस्सा ले रहे हैं। इनमें कनाडा, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड भी शामिल हैं।
इस अभ्यास का मकसद सभी देशों की सेनाओं के बीच तालमेल को बेहतर बनाना है। इसमें जापान की सेल्फ-डिफेंस फोर्स भी शामिल है, जिसने फिलीपींस और अमेरिका के साथ बड़े स्तर पर इस ड्रिल में हिस्सा लिया है।
जापान की प्रमुख समाचार एजेंसी क्योदो के मुताबिक, 2012 से जापान की सेल्फ-डिफेंस फोर्स सिर्फ आपदा राहत वाले हिस्से में हिस्सा लेती थी और पर्यवेक्षक की भूमिका में रहती थी, लेकिन पिछले साल फिलीपींस और जापान के बीच एक रक्षा समझौता हुआ, जिससे अब जापान को और ज्यादा अभ्यासों में हिस्सा लेने की अनुमति मिल गई है।
17 अप्रैल को जापान का युद्धपोत जेएस इकाजुची ताइवान स्ट्रेट से होकर गुजरा था, और वह भी इस बालिकातन अभ्यास में हिस्सा ले रहा है जो 8 मई तक चलेगा।
क्योदो ने बताया कि जापान पहले ताइवान स्ट्रेट से अपने जहाज नहीं भेजता था, ताकि चीन को भड़काया न जाए, लेकिन सितंबर 2024 में पहली बार जापानी जहाज साजनामी वहां से गुजरा। इसके बाद फरवरी और जून 2025 में भी जापानी जहाज उस रास्ते से गए।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
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