देश के सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र को लेकर बाजार में चिंता बढ़ती नजर आ रही है, जहां हालिया नतीजों ने निवेशकों के भरोसे को कुछ हद तक कमजोर किया है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, देश की प्रमुख सॉफ्टवेयर सेवा कंपनी इन्फोसिस लिमिटेड ने आने वाले वित्त वर्ष के लिए आय वृद्धि का अनुमान बाजार की उम्मीद से कम रखा है। इसके ठीक पहले एचसीएल टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के नतीजे भी उम्मीद से कमजोर रहे थे, जिसके बाद दोनों कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखने को मिली है।
गौरतलब है कि इन घटनाओं के बाद पूरे क्षेत्र पर असर पड़ा है और सूचना प्रौद्योगिकी सूचकांक में तेज गिरावट दर्ज की गई है, जो पिछले कई महीनों के निचले स्तर पर पहुंच गया है हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि इस क्षेत्र में दबाव अभी और बने रहने की आशंका जताई जा रही है।
बता दें कि भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग, जिसकी कुल क्षमता सैकड़ों अरब डॉलर की मानी जाती है, इस समय दोहरी चुनौती का सामना कर रहा है। एक ओर वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव के कारण कंपनियां तकनीकी खर्च में कटौती कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर कृत्रिम बुद्धिमत्ता का तेजी से बढ़ता प्रभाव पारंपरिक कारोबार मॉडल के लिए चुनौती बनता जा रहा है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, इस गिरावट की शुरुआत तब और तेज हुई जब टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने अपने नतीजों का ऐलान किया था। तब से अब तक इस क्षेत्र की कंपनियों के बाजार मूल्य में बड़ी कमी दर्ज की जा चुकी है, जिसका असर व्यापक शेयर बाजार पर भी पड़ा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय निवेशकों की नजर इस बात पर टिकी है कि भारतीय आईटी कंपनियां कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में खुद को कितनी तेजी से ढाल पाती हैं। इन्फोसिस जैसी कंपनियां अपने उत्पादों और सेवाओं में नई तकनीक को शामिल कर लागत कम करने और ग्राहकों को आकर्षित करने की कोशिश कर रही हैं, जबकि टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने भी नई साझेदारियों के जरिए इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
गौरतलब है कि भारतीय आईटी कंपनियों ने पहले भी कई वैश्विक संकटों और तकनीकी बदलावों का सामना किया है, लेकिन इस बार चुनौती का स्वरूप अलग माना जा रहा है, क्योंकि इसमें तकनीक खुद ही मौजूदा कामकाज को बदलने की क्षमता रखती है।
हालांकि कुछ बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार गिरावट के बाद अब इस क्षेत्र के शेयरों का मूल्यांकन आकर्षक स्तर पर पहुंच गया है, लेकिन निवेशक तब तक पूरी तरह सकारात्मक रुख अपनाने से बच रहे हैं जब तक कंपनियां ठोस प्रदर्शन नहीं दिखाती हैं।
कुल मिलाकर देखा जाए तो भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र फिलहाल अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है, जहां वैश्विक परिस्थितियों और नई तकनीकों के बीच संतुलन बनाना कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है हैं
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राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की स्पेशल कोर्ट ने 2022 के मंगलुरु प्रेशर कुकर ब्लास्ट मामले में एक बड़े फैसले में आरोपी मोहम्मद शारिक को 10 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने उस पर 92 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
NIA की जांच में सामने आया कि शारिक प्रतिबंधित आतंकी संगठन ISIS की विचारधारा से प्रभावित था। उसे इस रास्ते पर लाने में उसके सहयोगी अराफात अली की भूमिका सामने आई, जो शिवमोग्गा ISIS साजिश मामले में पहले से ही सजा काट रहा है।
IED धमाकों के जरिए लोगों में डर फैलाना मकसद
जांच एजेंसी के मुताबिक, शारिक ने अपने साथियों और विदेशी हैंडलर के साथ मिलकर भारत में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने की साजिश रची थी। उसका मकसद IED धमाकों के जरिए लोगों में डर फैलाना था। वह फंडिंग जुटाने और विस्फोटक सामग्री इकट्ठा करने में भी शामिल था।
बताया गया कि शारिक ने फर्जी पहचान पत्र, सिम कार्ड और बैंक खातों का इस्तेमाल किया और सबूत मिटाने के लिए बार-बार मोबाइल फोन बदलता रहा। उसने मैसूर में ठिकाना बनाकर IED तैयार करने की सामग्री जुटाई और मंगलुरु, उडुपी व दावणगेरे जैसे इलाकों में संभावित टारगेट की रेकी भी की।
क्या था मामला
नवंबर 2022 में शारिक एक ऑटो में प्रेशर कुकर IED लेकर जा रहा था, जिसे वह मंदिर के पास लगाने की फिराक में था। लेकिन रास्ते में ही बम में विस्फोट हो गया, जिसमें वह खुद घायल हो गया और एक अन्य व्यक्ति भी जख्मी हुआ।
इस मामले की शुरुआती जांच कर्नाटक पुलिस ने की थी, जिसके बाद NIA ने केस अपने हाथ में लेकर पूरे आतंकी नेटवर्क का खुलासा किया। फिलहाल एजेंसी इस साजिश से जुड़े अन्य आरोपियों और नेटवर्क की जांच में जुटी हुई है।
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