गूगल में एक बार फिर बड़े स्तर पर बदलाव देखने को मिल रहा है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुंदर पिचाई ने कर्मचारियों को भेजे संदेश में एआई से जुड़े कामकाज को लेकर नई जिम्मेदारियों और लीडरशिप में बदलाव की जानकारी दी है। इन बदलावों में गूगल डीपमाइंड के सह-संस्थापक डेमिस हसाबिस को नई बड़ी जिम्मेदारी देना और कंपनी के लंबे समय से प्रमुख तकनीकी चेहरों में शामिल जेफ डीन का गूगल से अलग होकर नई कंपनी शुरू करना शामिल है।
सुंदर पिचाई के अनुसार, डेमिस हसाबिस अब गूगल डीपमाइंड के अध्यक्ष और अल्फाबेट के मुख्य वैज्ञानिक के रूप में काम करेंगे। वह इस भूमिका के साथ भविष्य की एआई और विज्ञान से जुड़े अहम कामों पर ज्यादा ध्यान देंगे। हालांकि, हसाबिस अपनी दवा अनुसंधान कंपनी आइसोमॉर्फिक लैब्स का नेतृत्व भी जारी रखेंगे। वह गूगल डीपमाइंड की टीम से पूरी तरह अलग नहीं होंगे और एआई के मॉडल और शोध से जुड़े कामों में सलाह देते रहेंगे।
गौरतलब है कि डेमिस हसाबिस लंबे समय से एआई के क्षेत्र में गूगल के सबसे प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं। गूगल डीपमाइंड के विकास में उनकी बड़ी भूमिका रही है। सुंदर पिचाई ने अपने संदेश में कहा कि हसाबिस अब अपना ज्यादा समय कृत्रिम सामान्य इंटेलिजेंस के भविष्य को दिशा देने में लगा सकेंगे। उनका मानना है कि यह काम अल्फाबेट और व्यापक तौर पर पूरी दुनिया के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
इसी बदलाव के तहत कोराय कावुक्कुओग्लू को भी नई जिम्मेदारी दी गई है। वह अभी गूगल डीपमाइंड के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी और कंपनी के मुख्य एआई आर्किटेक्ट हैं। अब वह गूगल डीपमाइंड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष के रूप में काम करेंगे और सीधे सुंदर पिचाई को रिपोर्ट करेंगे। उनके जिम्मे जेमिनी मॉडल का विकास, अत्याधुनिक एआई अनुसंधान, जेमिनी अनुप्रयोग और उसके विकासकर्ता दल की जिम्मेदारी होगी।
मौजूद जानकारी के अनुसार, कोराय कावुक्कुओग्लू गूगल डीपमाइंड के शुरुआती दौर से ही इससे जुड़े हुए हैं और करीब 13 वर्षों से कंपनी में काम कर रहे हैं। उन्होंने गहन सीखने वाली तकनीक से जुड़े दल की शुरुआत में अहम भूमिका निभाई थी। वेवनेट और डी-क्यू-एन जैसी तकनीकों के विकास में भी उनका योगदान रहा है।
दूसरी ओर, गूगल के लिए करीब 27 साल काम कर चुके जेफ डीन अब कंपनी से अलग होकर एक स्वतंत्र सार्वजनिक हित वाली कंपनी शुरू करने जा रहे हैं। इस काम में उनके साथ गूगल के वरिष्ठ फेलो संजय घेमावत भी होंगे। नई कंपनी का उद्देश्य मशीन आधारित सीखने, विज्ञान और अभियांत्रिकी के क्षेत्र में नई खोजों को तेज करना होगा। गूगल इस नई कंपनी में शुरुआती निवेशक और क्लाउड सेवा साझेदार के रूप में जुड़ा रहेगा।
बता दें कि जेफ डीन और संजय घेमावत गूगल की शुरुआती तकनीकी यात्रा के बेहद महत्वपूर्ण नाम रहे हैं। शुरुआती खोज ढांचे से लेकर आधुनिक एआई के विकास में इस्तेमाल होने वाले तंत्रिका नेटवर्क तक, दोनों ने कंपनी की तकनीकी दिशा को आकार देने में अहम भूमिका निभाई है।
सुंदर पिचाई ने अपने संदेश में गूगल के एआई क्षेत्र में हालिया प्रदर्शन का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जेमिनी अनुप्रयोग के मासिक उपयोगकर्ताओं की संख्या 95 करोड़ से अधिक हो चुकी है। वहीं, जेम्मा मॉडल के डाउनलोड की संख्या 90 करोड़ से ज्यादा पहुंच गई है। कंपनी के मुताबिक जेमिनी मॉडल को विकासकर्ताओं और कारोबार जगत से भी अच्छी मांग मिल रही है।
गौरतलब है कि गूगल इस समय एआई की दौड़ में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए लगातार अपने उत्पादों, शोध और तकनीकी ढांचे में बदलाव कर रहा है। कंपनी का जोर एक तरफ मौजूदा एआई उत्पादों को तेजी से आगे बढ़ाने पर है, तो दूसरी तरफ कृत्रिम सामान्य इंटेलिजेंस और वैज्ञानिक शोध के लंबे दौर के काम पर भी ध्यान दिया जा रहा है। ताजा बदलावों से संकेत मिलता है कि गूगल आने वाले समय में इन दोनों मोर्चों को अलग-अलग नेतृत्व के जरिए और तेजी से आगे बढ़ाना चाहता है।
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वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने सोमवार को संसद को बताया कि सरकार पुरानी पेंशन योजना (OPS) को वापस नहीं ला रही है, क्योंकि इससे सरकारी खजाने पर बहुत ज़्यादा वित्तीय बोझ पड़ेगा। हालांकि राजस्थान और पंजाब जैसे कुछ राज्य पुरानी योजना पर वापस लौट रहे हैं, लेकिन चौधरी ने साफ़ कर दिया कि मौजूदा नियमों के तहत, अगर राज्य नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) से बाहर निकलते हैं, तो उन्हें NPS से कोई रिफंड नहीं मिलेगा।
चौधरी ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश की सरकारों ने केंद्र और पेंशन निधि नियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) को राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) से ओपीएस में वापसी के बारे में सूचित किया है। उन्होंने कहा कि पीएफआरडीए अधिनियम, 2013, जिसे पीएफआरडीए (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के तहत निकासी) विनियम, 2015 और अन्य प्रासंगिक विनियमों के साथ पढ़ा जाता है, के तहत कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत नौकरीपेशा लोगों के संचित कोष-- जैसे कि सरकारी अंशदान, एनपीएस के लिए कर्मचारियों के अंशदान के साथ-साथ संचय को वापस किया जा सकता है और राज्य सरकार को वापस जमा किया जा सकता है।
एक अन्य प्रश्न का उत्तर देते हुए, चौधरी ने कहा कि राज्यों में ओपीएस की बहाली विशेष रूप से राज्य नीति विवेकाधिकार के अंतर्गत आती है। उन्होंने कहा कि हालांकि, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने अपनी हालिया राज्य वित्त ऑडिट रिपोर्ट में राज्यों द्वारा ओपीएस को वापस लेने के वित्तीय निहितार्थों को रेखांकित किया है। राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) एक परिभाषित योगदान-आधारित योजना है जिसे 1 जनवरी 2004 को या उसके बाद सेवा में शामिल होने वाले केंद्र सरकार के कर्मचारियों (सशस्त्र बलों को छोड़कर) के लिए पेश किया गया था।
चौधरी ने कहा कि ऐसे कर्मचारियों के लिए पेंशन लाभ में सुधार की दृष्टि से, एनपीएस को संशोधित करने के उपाय सुझाने के लिए तत्कालीन वित्त सचिव की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था। हितधारकों के साथ समिति के विचार-विमर्श के आधार पर, एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) पहले ही 1 अप्रैल 2025 से एनपीएस के तहत एक विकल्प के रूप में पेश की जा चुकी है, जिसका उद्देश्य एनपीएस के तहत आने वाले केंद्र सरकार के कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद प्रति माह 10,000 रुपये के न्यूनतम सुनिश्चित भुगतान के साथ मुद्रास्फीति से जुड़े लाभ प्रदान करना है।
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