व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए एसोचैम ने भारत-न्यूजीलैंड व्यापार परिषद के साथ किया समझौता, आर्थिक संबंधों को मिलेगी नई मजबूती
नई दिल्ली, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। प्रमुख उद्योग संगठन एसोचैम ने सोमवार को भारत-न्यूजीलैंड व्यापार परिषद (आईएनजेडबीसी) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इसका उद्देश्य भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत उद्योगों से जुड़े कदमों को व्यवस्थित रूप से लागू करना और दोनों देशों के व्यवसायों को इस समझौते से मिलने वाले अवसरों का पूरा लाभ दिलाना है।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, आने वाले वर्षों में भारत और न्यूजीलैंड के बीच साझेदारी की पूरी क्षमता को हासिल करने के लिए बेहतर कनेक्टिविटी और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करना बहुत महत्वपूर्ण होगा।
उद्योग संगठन ने कहा कि व्यापार और उद्योग संस्थाओं के बीच बढ़ता सहयोग दोनों देशों के बीच व्यापार को आसान बनाएगा और प्रक्रियाओं में आने वाली बाधाओं को कम करेगा। साथ ही, बेहतर हवाई संपर्क और पर्यटन सहयोग आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करेगा।
22 दिसंबर 2025 को सिर्फ नौ महीनों में पूरा हुआ यह एफटीए और सोमवार को हस्ताक्षरित समझौता, दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच वस्तुओं का व्यापार लगभग 1.3 अरब डॉलर और सेवाओं का व्यापार 634 मिलियन डॉलर है, जिसे अगले पांच वर्षों में 5 अरब डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। न्यूजीलैंड में लगभग 3 लाख भारतीयों का समुदाय इस साझेदारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
बयान में कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर व्यापार में अनिश्चितता और सप्लाई चेन में बदलाव के बीच यह समझौता इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की रणनीतिक विविधता और मजबूत, समावेशी तथा भविष्य के लिए तैयार आर्थिक साझेदारी बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
न्यूजीलैंड के साथ एफटीए से व्यापार और निवेश की नई संभावनाएं खुल रही हैं। इसके तहत भारत के निर्यात को न्यूजीलैंड में 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जो भारत के एफटीए इतिहास में एक नया अध्याय है।
इसके साथ ही अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर के निवेश का भी वादा किया गया है, जो दोनों देशों के बीच मजबूत साझेदारी को और पक्का करेगा।
एसोचैम के महासचिव सौरभ सान्याल ने कहा कि इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ने की उम्मीद है। भारत से टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, पेट्रोलियम उत्पाद और मशीनरी का निर्यात बढ़ेगा, जबकि न्यूजीलैंड से कच्चा माल और अन्य जरूरी वस्तुएं आयात होंगी।
उन्होंने यह भी बताया कि भारत का सेवा क्षेत्र, खासकर आईटी, वित्तीय सेवाएं, शिक्षा, बिजनेस सेवाएं और अन्य पेशेवर सेवाएं, न्यूजीलैंड में अपनी पहुंच बढ़ाकर खास फायदा उठा सकते हैं।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
'घर लौट आओ, भारत को तुम्हारी प्रतिभा की जरूरत है', श्रीधर वेम्बु ने अमेरिका में रहने वाले भारतीयों से की अपील
नई दिल्ली, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। जोहो के मुख्य वैज्ञानिक और सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बु ने सोमवार को अमेरिका में रहने वाले भारतीयों से भारत लौटने की अपील की। उन्होंने कहा कि उन्हें वापस आकर भारत की तकनीकी क्षमता को बढ़ाने और देश के विकास में योगदान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि दुनिया भर में भारतीयों को जो सम्मान मिलता है, साथ ही देश की समृद्धि और सुरक्षा, यह सब भारत की तकनीकी क्षमता पर निर्भर करेगा।
वेम्बु ने एक्स पर “भारत के भाइयों और बहनों” को संबोधित करते हुए एक खुला पत्र पोस्ट किया। इसमें उन्होंने 37 साल पहले अमेरिका जाने के अपने अनुभव को याद किया, जब उनके पास कोई पैसा नहीं था, लेकिन उनके पास भारत से मिली अच्छी शिक्षा और सांस्कृतिक विरासत थी।
उन्होंने कहा, “आपने बहुत बड़ी सफलता हासिल की है। अमेरिका हमारे लिए अच्छा रहा है। इसके लिए हमें हमेशा आभारी रहना चाहिए, आभार जताना ही हमारा भारतीय तरीका है।”
हालांकि, उन्होंने आगे कहा कि इस समय कई अमेरिकी लोगों का मानना है कि भारतीय अमेरिकी लोगों की नौकरियां “छीन लेते हैं” और अमेरिका में भारतीयों की सफलता को गलत तरीके से देखा जाता है।
वेंबू ने कहा कि अमेरिका में ऐसे विचार रखने वाले लोगों की संख्या शायद बहुमत में नहीं है, लेकिन वह बहुत कम भी नहीं है।
उन्होंने कहा कि अमेरिकी राजनीति में भारतीय सिर्फ दर्शक की भूमिका में हैं। उन्होंने आगे कहा कि उनके पास केवल “कट्टर दक्षिणपंथी” और “जागरूक वामपंथी” के बीच चुनने का विकल्प है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि इनमें से कोई भी पक्ष विदेशों में भारतीयों के सम्मान की गारंटी नहीं देता।
उन्होंने लिखा, “आपको लग सकता है कि अगला चुनाव इस समस्या को ठीक कर देगा, लेकिन आपकी पसंद ऐसे लोगों के बीच होगी जो हमारी भारतीय सभ्यता से नफरत करते हैं और ऐसे लोगों के बीच जो सभ्यता से ही नफरत करते हैं। यही ‘कट्टर दक्षिणपंथी’ बनाम ‘जागरूक वामपंथी’ की लड़ाई है।”
उन्होंने अमेरिका में सफलता पाने वाले लोगों से आग्रह किया कि वे भारत लौटकर अपनी तकनीकी दक्षता से देश के निर्माण में मदद करें। उन्होंने लिखा, “जैसे-जैसे हम भारत में यह दक्षता विकसित करेंगे, हमारी सभ्यतागत शक्ति स्वयं स्थापित होती जाएगी।”
पोस्ट में कहा गया, “अगर भारत गरीब बना रहता है, तो ‘वोक लेफ्ट’ हमें दया भाव से नैतिक उपदेश देगा और ‘हार्ड राइट’ तिरस्कार के साथ अलग तरह के नैतिक उपदेश देगा। हमें इन दोनों में से किसी को भी सम्मान नहीं मानना चाहिए।”
उन्होंने कहा, “हालांकि आपमें से कई लोगों के लिए इस बात पर विचार करना मुश्किल हो सकता है, फिर भी कृपया घर लौट आइए। भारत माता को आपकी प्रतिभा की आवश्यकता है। हमारी विशाल युवा आबादी को उस तकनीकी नेतृत्व की जरूरत है, जिसे आपने इन वर्षों में हासिल किया है, ताकि उन्हें समृद्धि की राह पर आगे बढ़ाया जा सके। आइए, हम सब मिलकर इसे एक मिशनरी उत्साह के साथ पूरा करें।”
श्रीधर वेम्बु का यह पोस्ट ऐसे समय में आया जब एच-1बी वीज़ा प्रोग्राम, जिसका इस्तेमाल अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को नौकरी पर रखने के लिए करती हैं, अमेरिकी प्रशासन की ओर से नए दबाव का सामना कर रहा था।
रिपब्लिकन सांसदों के एक समूह ने एक कानून प्रस्तावित किया है, जिसमें एच-1 बी कार्यक्रम को तीन साल के लिए निलंबित करने की मांग की गई है। उनका कहना है कि इस कार्यक्रम का दुरुपयोग करके अमेरिकी कर्मचारियों की जगह कम वेतन वाले विदेशी श्रमिकों को रखा जा रहा है।
--आईएएनएस
एसएचके/डीएससी
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