‘रवीना टंडन’ नाम की मिसाइल से कांप उठा था पाकिस्तान! क्या है इस दिलचस्प किस्से की पूरी कहानी?
Raveena Tandon Named Missile Story: भारत के 80वें इंडिपेंडेंस डे से पहले देश की आजादी और हमारे देश के वीर जवानों से जुड़े किस्से याद किए जा रहे हैं. कारगिल युद्ध भी इंडियन हिस्ट्री का एक ऐसा चैप्टर है. जब हमारे सैनिकों ने बॉर्डर पर दुश्मनों के सामने अपना अदम्य साहस दिखाया था. इसी युद्ध से जुड़ा एक किस्सा बॉलीवुड एक्ट्रेस रवीना टंडन के नाम से भी जुड़ा हुआ है. कई रिपोर्ट्स में दावा किया जाता है कि कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान के सैनिक ने शहीद भारतीय सैनिकों के बदले रवीना टंडन और माधुरी दीक्षित को भेजने की डिमांड रखी थी. जिस पर भारत के सैनिकों ने पाकिस्तान को ऐसा मुंह जवाब दिया था, जो आज भी इतने सालों बाद याद किया जाता है. आइए जानते हैं कि कैसे रवीना टंडन के नाम की मिसाइल से पाकिस्तान कांप उठा था.
कारगिल युद्ध में क्यों आया रवीना टंडन का नाम?
दरअसल, साल 1999 में भारत और पाकिस्तान के बीच कारगिल युद्ध हुआ था. इस दौरान हमारे देश के बहादुर जवानों ने ऊंची पहाड़ियों पर कब्जा जमाए पाकिस्तानी सैनिकों को खदेड़ने के लिए बहादुरी और समझ से काम लिया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बताया जाता है कि इस यु्द्ध के दौरान जब भारत ने पाकिस्तानी सैनिकों से शहीद भारतीय जवानों के बॉडी वापस करने की मांग की, तो जवाब में रवीना टंडन और माधुरी दीक्षित को भेजने की डिमांड की थी. यह बात जितनी अजीब थी, उतनी ही यह भी दिखाती थी कि उस दौर में हमारे देश के सितारों की पॉपुलैरिटी कितनी तगड़ी थी. रवीना उस समय बॉलीवुड की बड़ी एक्ट्रेस में शामिल थीं और उनकी फिल्मों, गानों और ग्लैमरस बाहर के देशों में भी होती थी.
इंडियन एयरफोर्स ने दिया करारा जवाब
रवीना टंडन से जुड़ा यह किस्सा यहीं खत्म नहीं हुआ. उस समय के पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के साथ भी उनका नाम एक दिलचस्प अंदाज में जोड़ा जाता है. रिपोर्ट्स और पुराने किस्सों में दावा किया जाता है कि नवाज शरीफ ने रवीना टंडन को अपनी पसंदीदा एक्ट्रेस बताया था. इसके बाद कारगिल युद्ध के दौरान इंडियन एयरफोर्स से जुड़ी एक फोटो खूब चर्चा में आई. इस तस्वीर में इंडियन मिसाइल पर ‘रवीना टंडन की तरफ से नवाज शरीफ को’ जैसा मैसेज लिखा दिखाई देता है. दोनों नामों के साथ दिल और तीर का निशान भी बनाया गया था. इस तस्वीर को लंबे समय तक पाकिस्तान को भारतीय सेना की ओर से जवाब को तौर पर ट्रोल के तौर पर याद किया जाता है. हालांकि, इस किस्से की आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं होती है लेकिन जब भारतीय सेना ने रवीना के नाम की मिसाइल दागी तो पाकिस्तान कांप उठा था.
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कारगिल युद्ध के बारे में जानिए
आइए अब कारगिल युद्ध के बारे में जानते हैं. आपको बता दें कि कारगिल युद्ध की शुरुआत 1999 में हुई थी. 3 मई 1999 को लोकल चरवाहों ने लद्दाख के कारगिल और बटालिक सेक्टर में भारत की सीमा में मौजूद ऊंची पहाड़ियों पर पाकिस्तानी सैनिकों और घुसपैठियों की मौजूदगी नोटिस की थी. इसके बाद इंडियन आर्मी ने इलाके की जांच की और घुसपैठों को खदड़ने के लिए ऑपरेशन चलाया. भारतीय सेना ने इस ऑपरेशन को विजय नाम दिया था. यह युद्ध बहुत ही कठिन परिस्थिति में लड़ा गया था क्योंकि हमारे सैनिकों को हजारों फीट ऊंची पहाड़ियों पर चढ़कर दुश्मन को खदेड़ना पड़ा. वहां ठंडा मौसम भी जवानों के लिए बड़ी चुनौती था. इसके बावजूद इंडियन आर्मी ने कई पॉइंट पर दोबारा कब्जा किया. भारतीय सेना ने अदम्य साहस और पराक्रम दिखाते हुए कारगिल की पहाड़ियों पर फिर से तिरंगा फहराया और पाकिस्तानी घुसपैठियों को पूरी तरह खदेड़ दिया था. इस तरह हमारे देश के वीर जवानों ने पाकिस्तानी सैनिकों को करारी शिकस्त दी थी.
गुजरात में राज्यव्यापी डीवर्मिंग अभियान के तहत 1.84 करोड़ बच्चों और किशोरों को दवा देने का लक्ष्य
गांधीनगर, 10 अगस्त (आईएएनएस)। राज्य के राष्ट्रीय डीवर्मिंग दिवस अभियान के तहत गुजरात भर में 19 साल तक की उम्र के 1.84 करोड़ से ज्यादा बच्चों और किशोरों को डीवर्मिंग की दवा दी जाएगी। इस कार्यक्रम का मकसद युवाओं में पेट के कीड़ों की वजह से होने वाले एनीमिया (खून की कमी) को रोकना है।
राष्ट्रीय डीवर्मिंग दिवस का राज्य-स्तरीय कार्यक्रम गांधीनगर के सरकारी प्राइमरी स्कूल में आयोजित किया गया, जिसमें स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया भी मौजूद थे।
मंत्री ने दूसरे अधिकारियों के साथ मिलकर कार्यक्रम के दौरान स्कूली बच्चों को डीवर्मिंग की गोलियां बांटीं।
वहां मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए पानशेरिया ने कहा कि राज्य ने 19 साल तक की उम्र के 1.84 करोड़ से ज्यादा बच्चों और किशोरों को डीवर्मिंग की दवा देने का लक्ष्य रखा था।
उन्होंने छात्रों से बातचीत भी की और उन्हें अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में अच्छी आदतें अपनाने, साफ-सफाई बनाए रखने और अपने माता-पिता का सम्मान करने के लिए प्रोत्साहित किया।
मंत्री ने स्कूल परिसर में एक पेड़ भी लगाया। स्वास्थ्य आयुक्त (ग्रामीण) डॉ. रतनकंवर गढ़वी चरण ने कहा कि यह अभियान 1 से 19 साल की उम्र के बच्चों में पेट के कीड़ों से होने वाले एनीमिया को रोकने के लिए महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता मिलकर यह सुनिश्चित कर रहे थे कि राज्य में कोई भी बच्चा पेट के कीड़े मारने वाली दवा (डीवर्मिंग दवा) से वंचित न रहे।
इस मौके पर गांधीनगर की मेयर मीरा पटेल, चिल्ड्रन्स यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर डॉ. जोशी, स्वास्थ्य विभाग के एडिशनल डायरेक्टर डॉ. नयन जानी और सूचना विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. शैलेश परमार मौजूद थे।
कार्यक्रम में सीनियर अधिकारी, टीचिंग स्टाफ और छात्र भी शामिल हुए। मंत्री का यह बयान सूरत न्यू सिविल हॉस्पिटल में एक रेजिडेंट डॉक्टर की आत्महत्या के मामले में हाई-लेवल जांच के आदेश देने के एक दिन बाद आया।
9 अगस्त को पानशेरिया ने अधिकारियों को रैगिंग, मानसिक या शारीरिक उत्पीड़न या लापरवाही की संभावना की जल्द जांच करने और 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था।
गांधीनगर में मेडिकल एजुकेशन के एडिशनल डायरेक्टर की सीधी देखरेख में सिविल हॉस्पिटल के डीन और सुपरिटेंडेंट संयुक्त रूप से जांच कर रहे हैं और साथ ही साथी छात्रों व रेजिडेंट डॉक्टरों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा था कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
--आईएएनएस
एमएस/
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