यूपी बना 'सुरक्षा कवच': एक्सप्रेसवे पर सर्वाधिक एयरस्ट्रिप वाला राज्य, फाइटर जेट्स के लिए तैयार हुआ 'बैकअप रनवे'
उत्तर प्रदेश वर्तमान में बुनियादी ढांचे के विकास में न केवल देश का नेतृत्व कर रहा है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी एक महत्वपूर्ण धुरी बनकर उभरा है। गंगा एक्सप्रेसवे पर नई एयरस्ट्रिप के निर्माण के साथ ही यूपी अब देश का ऐसा पहला राज्य बन गया है, जहाँ चार प्रमुख एक्सप्रेसवे पर लड़ाकू विमानों की लैंडिंग और टेक-ऑफ के लिए विशेष पट्टियां उपलब्ध हैं।
यह उपलब्धि राज्य को वैश्विक सामरिक मानचित्र पर एक सुरक्षित और सुदृढ़ प्रदेश के रूप में स्थापित करती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने बुनियादी ढांचे को केवल यातायात तक सीमित न रखकर, उसे राष्ट्र रक्षा के एक अभेद्य कवच के रूप में विकसित किया है।
इंजीनियरिंग का कमाल: कैसे सामान्य सड़क से अलग होती है एयरस्ट्रिप?
इन एयरस्ट्रिप का निर्माण सामान्य डामर की सड़कों से बिल्कुल भिन्न होता है। इसमें जिस तकनीक और सामग्री का उपयोग किया जाता है, वह इसे एक पूर्ण सैन्य रनवे के समकक्ष बनाती है:
PQC (Pavement Quality Concrete) तकनीक: एयरस्ट्रिप के निर्माण में उच्च श्रेणी के कंक्रीट का उपयोग किया जाता है, जो फाइटर जेट्स के लैंडिंग के समय उत्पन्न होने वाले प्रचंड घर्षण और तापमान को सहन कर सके।
लोड बेयरिंग कैपेसिटी: इन्हें इस तरह डिजाइन किया गया है कि ये 30 टन से अधिक वजन वाले भारी विमानों के झटके झेल सकें। जहाँ सामान्य सड़क 15-20 सेमी मोटी होती है, वहीं एयरस्ट्रिप की परतें काफी सघन और मजबूत बनाई जाती हैं।
रडार और सिग्नलिंग इंटीग्रेशन: आपात स्थिति में इन पट्टियों पर पोर्टेबल लाइटिंग और रडार सिस्टम तैनात करने की व्यवस्था होती है, जिससे शून्य दृश्यता (Zero Visibility) में भी विमान सुरक्षित उतर सकें।
ड्रेनेज और ग्रिप: इनके किनारे इस तरह बनाए जाते हैं कि पानी का जमाव न हो और विमान के टायरों को अधिकतम ग्रिप मिले।
यूपी के चार सामरिक स्तंभ: इन एक्सप्रेसवे पर है एयरस्ट्रिप की सुविधा
उत्तर प्रदेश ने चरणबद्ध तरीके से अपने प्रमुख एक्सप्रेसवे को रक्षा मानकों के अनुरूप तैयार किया है:
गंगा एक्सप्रेसवे: देश के सबसे लंबे एक्सप्रेसवे में से एक, जहाँ हाल ही में एयरस्ट्रिप की सुविधा जोड़ी गई है। यह पश्चिमी यूपी को पूर्वी यूपी से जोड़ते हुए रणनीतिक बढ़त प्रदान करता है।
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे: यह राज्य का पहला ऐसा आधुनिक मार्ग था, जिस पर वायु सेना ने पहली बार फाइटर जेट्स की लैंडिंग कराकर इतिहास रचा था।
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे: इस पर बनी एयरस्ट्रिप ने 'गगन शक्ति' जैसे बड़े वायु सेना अभ्यासों के दौरान अपनी सक्षमता सिद्ध की है।
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे: सामरिक दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों को जोड़ने वाला यह मार्ग डिफेंस कॉरिडोर के विकास में भी सहायक है।
सामरिक महत्व: दुश्मन के लिए अभेद्य चुनौती
भारत की भौगोलिक सुरक्षा स्थितियों को देखते हुए एक्सप्रेसवे पर एयरस्ट्रिप एक दूरदर्शी कदम है। युद्ध के समय यदि मुख्य वायु सेना स्टेशन दुश्मन के निशाने पर आते हैं, तो ये 'बैकअप रनवे' के रूप में काम करते हैं:
त्वरित जवाबी कार्रवाई: सुखोई-30 एमकेआई, मिराज-2000 और जगुआर जैसे फाइटर जेट इन पट्टियों का उपयोग करके पुन: ईंधन भरने और उड़ान भरने में सक्षम हैं।
विकेंद्रीकृत संपदा: सभी विमानों को एक ही बेस पर रखने के बजाय, उन्हें अलग-अलग एक्सप्रेसवे पैच पर फैलाया जा सकता है, जिससे दुश्मन के लिए उन्हें निशाना बनाना असंभव हो जाता है।
लॉजिस्टिक हब: ये सड़कें C-130J सुपर हरक्यूलिस जैसे भारी मालवाहक विमानों के लिए भी सक्षम हैं, जो युद्ध के समय टैंक और रसद पहुंचा सकते हैं।
आपातकाल में 'संजीवनी' और आर्थिक विकास
यह विज़न केवल युद्ध तक सीमित नहीं है। प्राकृतिक आपदाओं या मेडिकल इमरजेंसी में ये एयरस्ट्रिप बेहद महत्वपूर्ण हैं:
आपदा प्रबंधन: बाढ़ या भूकंप के समय यदि हवाई संपर्क टूट जाए, तो इन एयरस्ट्रिप के जरिए तत्काल राहत सामग्री पहुंचाई जा सकती है।
एयर एम्बुलेंस: भविष्य में इनका उपयोग एयर एम्बुलेंस के लिए किया जा सकता है, जिससे गंभीर मरीजों को बड़े शहरों तक मिनटों में पहुँचाया जा सकेगा।
डिफेंस कॉरिडोर: एक्सप्रेसवे के किनारे बन रहे डिफेंस कॉरिडोर इन एयरस्ट्रिप के साथ मिलकर एक संपूर्ण इकोसिस्टम बना रहे हैं, जहाँ हथियारों का निर्माण, परीक्षण और परिवहन एक ही जगह से संभव होगा।
आत्मनिर्भर भारत की मजबूती
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यूपी ने 'एक्सप्रेसवे इकोनॉमी' के साथ 'सुरक्षा इकोनॉमी' का जो मेल बैठाया है, वह भारत को बाहरी खतरों के प्रति अधिक लचीला बनाता है। आने वाले समय में, ये एयरस्ट्रिप उत्तर प्रदेश को दक्षिण एशिया के सबसे मजबूत सामरिक हब के रूप में स्थापित करेंगे, जहाँ विकास की गति और राष्ट्र की सुरक्षा साथ-साथ कदम मिलाकर चलेंगे।
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