जापान में 6.2 तीव्रता का भूकंप, पीएम ताकाइची ने लोगों को अलर्ट रहने की दी चेतावनी
टोक्यो, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। सोमवार सुबह उत्तरी जापान के एक हिस्से में 6.2 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस हुए। हालांकि, किसी नुकसान या किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने लोगों को अलर्ट रहने की चेतावनी दी है।
जापान टुडे के अनुसार, जापान मौसम एजेंसी ने सुनामी की कोई एडवाइजरी जारी नहीं की। अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक, भूकंप जापान के सबसे उत्तरी मुख्य द्वीप होक्काइडो के छोटे से शहर साराबेत्सु से 18 किलोमीटर पश्चिम में 81 किलोमीटर की गहराई पर आया। अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार, भूकंप की तीव्रता 6.1 मापी गई।
वहीं पीएम ताकाइची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, आज सुबह करीब 5:24 बजे, होक्काइडो के टोकाची इलाके के दक्षिणी हिस्से में भूकंप का केंद्र था और होक्काइडो के उराहोरो टाउन में जापानी सीस्मिक स्केल पर सबसे ज्यादा 5-कम इंटेंसिटी का तेज झटका महसूस किया गया। सुनामी की कोई चिंता नहीं है।
उन्होंने आगे लिखा, सरकार के तौर पर, भूकंप के तुरंत बाद, हमने प्राइम मिनिस्टर ऑफिस क्राइसिस मैनेजमेंट सेंटर और प्राइम मिनिस्टर ऑफिस कम्युनिकेशन रूम बनाया और मेरे निर्देशों के आधार पर, हम नुकसान की स्थिति को समझने और जनता को सही जानकारी देने जैसे रिस्पॉन्स के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। जिन इलाकों में झटके तेज थे, हम उनसे अपील करते हैं कि आप इसी तरह की तीव्रता वाले भूकंप की संभावना के लिए अलर्ट रहें।
जापान की मॉनिटरिंग एजेंसी के अधिकारी ने चेतावनी दी कि जिन इलाकों में तेज झटके महसूस हुए, वहां चट्टानें गिरने और भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। एजेंसी ने यह भी चेतावनी दी कि आने वाले हफ्ते में इस इलाके में इसी तरह की ताकत वाले और भूकंप आने की बहुत ज्यादा संभावना है।
जापान में एक हफ्ते पहले, 7.7 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। इसके बाद जापान ने देश के उत्तर-पूर्वी तटीय इलाकों में मेगाक्वेक के थोड़े ज्यादा खतरे की एडवाइजरी जारी की थी।
--आईएएनएस
केके/एएस
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Mohini Ekadashi 2026: मोहिनी एकादशी आज, नोट कर लें पूजन का शुभ मुहूर्त, विधि और धार्मिक महत्व
Mohini Ekadashi 2026: सनातन धर्म में एकादशी व्रत की विशेष महिमा बताई गयी है. एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है. वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी कहा जाता है. इस एकादशी को साल 24 एकादशी में से एक बड़ी एकादशी माना जाता है. यह एकादशी भगवान विष्णु को बहुत अधिक प्रिय है. इस एकादशी तिथि को भगवान विष्णु ने मोहिनी रुप धारण किया था. यही वजह है इस एकादशी को मोहिनी एकादशी कहा जाता है. इस एकादशी का व्रत रखकर विधि-विधान के साथ भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. सभी तरह के संकट और कष्ट समाप्त हो जाते हैं. मोह-माया के बंधनों से मुक्ति प्राप्ति होती है. आइए जानते हैं आज मोहिनी एकादशी पर पूजा का मुहूर्त और विधि क्या होगी.
मोहिनी एकादशी पूजा मुहूर्त (Mohini Ekadashi Pujan Shubh Muhurat)
27 अप्रैल सोमवार को अभिजीति मुहूर्त सुबह 11 बजकर 49 मिनट से दोपहर 12 बजकर 42 मिनट तक रहेगा. विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 28 मिनट से दोपहर 03 बजकर 21 मिनट तक रहेगा. अमृत काल मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 41 मिनट से शाम 04 बजकर 20 मिनट तक रहेगा. इन मुहुर्त में पूजा करने से पूजा का पूरा फल प्राप्त होगा.
व्रत पारण का मुहूर्त
मोहिनी एकादशी व्रत का पारण 28 अप्रैल मंगलवार को सुबह 05 बजकर 38 मिनट से सुबह 08 बजकर 17 मिनट तक करना शुभ होगा. शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण करने से ही व्रत का पूरा फल प्राप्त होता है. इसलिए इस मुहूर्त में मोहिनी एकादशी व्रत का पारण अवश्य करें.
मोहिनी एकादशी पर दिव्य संयोग
इस साल मोहिनी एकादशी का व्रत 27 अप्रैल सोमवार को है. पंचांग के अनुसार, इस दिन बेहद प्रभावशाली ध्रुव योग रहेगा. ध्रुव योग सुबह से लेकर रात 09 बजकर 36 मिनट तक रहेगा. ध्रुव योग भगवान विष्णु से जुड़ा हुआ है यह स्थिरता का प्रतीक है. इस योग में पूजा करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है. मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
मोहिनी एकादशी पूजा विधि (Mohini Ekadashi Puja Vidhi)
आज मोहिनी एकादशी पर सूर्योदय से पहले स्नान कर, व्रत संकल्प लें. उत्तर-पूर्व दिशा में एक चोकी बिछाकर उस पर पीला या लाल कपड़ा बिछाएं. चौकी पर श्रीलक्ष्मीनारायण जी के श्रीविग्रह की स्थापना करें. शालिग्राम शिला हो तो उसकी स्थापना चौकी पर करें. गंगाजल से श्रीलक्ष्मीनारायण और पंचामृत से शालिग्राम शिला का अभिषेक करें. चंदन और सुंगधित फूलों से श्रंगार करें. तुलसी पत्र अवश्य चढ़ाएं. मौसम फल और दूध से बने पदार्थों का भोग लगाएं. श्रद्धा भक्ति के साथ आरती करें. आरती के बाद आसन पर बैठकर ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र की माला जाप करें. विष्णुसहस्त्रनाम या गोपालसहस्त्रनाम का पाठ करें. मोहिनी एकादशी व्रत कथा सुनें या पढ़ें. विष्णु चालीसा का पाठ करें. अपनी सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मण और गरीबों को दान दें. संभव हो तो रात्रि जागरण करें.
मोहिनी एकादशी व्रत का महत्व
धर्मग्रंथों के अनुसार, वैशाख मास परम कल्याणकारी मास है. इस मास के शुक्ल पक्ष की मोहिनी एकादशी बेहद खास है. इस एकादशी का व्रत रखकर भगवान लक्ष्मीनारायण की पूजा करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है. धन की समस्या से छुटकारा मिल जाता है. इसके साथ ही सभी तरह के कष्ट और पाप कर्म नष्ट हो जाते हैं. इस दिन अन्न, वस्त्र, जल, ऋतु फल का दान करने से गरीबी दूर होती है. साधक को भगवान विष्णु के बैकुंठ लोक में स्थान प्राप्त होता है.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. न्यज नेशन इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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