ब्रिक्स में 'मिडिल-ईस्ट' पर रार: सदस्य देशों में नहीं बनी सहमति, भारत ने फलस्तीन के पक्ष में बुलंद की आवाज
मिडिल-ईस्ट में जारी भीषण संघर्ष के बीच भारत ने ब्रिक्स (BRICS) देशों के मंच पर अपना रुख साफ कर दिया है। भारत की अध्यक्षता में हो रही ब्रिक्स की महत्वपूर्ण बैठक में सदस्य देशों के बीच गहरा मतभेद उभरकर सामने आया है, जिसके कारण किसी भी आम सहमति वाले दस्तावेज पर मुहर नहीं लग सकी।
हालांकि, इस कूटनीतिक गतिरोध के बावजूद भारत ने स्पष्ट किया है कि वह फलस्तीन के मुद्दे और 'दो-राष्ट्र समाधान' (Two-State Solution) के अपने पुराने और विश्वसनीय स्टैंड पर मजबूती से कायम है।
साझा दस्तावेज पर रार: बंटे नजर आए सदस्य देश
भारतीय अधिकारियों के अनुसार, मिडिल-ईस्ट के हालात पर एक साझा राय बनाने की कोशिशें फिलहाल नाकाम साबित हुई हैं। रूस, चीन और ब्राजील जैसे देशों के साथ इस संघर्ष पर दृष्टिकोण में भिन्नता होने के कारण कोई सर्वसम्मत घोषणापत्र तैयार नहीं हो सका।
अगले महीने होने वाली विदेश मंत्रियों की बैठक से पहले यह गतिरोध भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है, लेकिन भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपनी कूटनीतिक प्राथमिकताओं से समझौता नहीं करेगा।
फलस्तीन की संप्रभुता और UN सदस्यता का समर्थन
भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फलस्तीन के प्रति अपनी नीति को फिर से परिभाषित किया है। सरकार का मानना है कि शांति का एकमात्र रास्ता एक स्वतंत्र और संप्रभु फलस्तीन राष्ट्र की स्थापना है, जो सुरक्षित सीमाओं के भीतर इजरायल के साथ सह-अस्तित्व में रह सके।
हाल ही में 26 जनवरी को अरब लीग के साथ किए गए समझौते का हवाला देते हुए भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) में फलस्तीन की पूर्ण सदस्यता के लिए अपना समर्थन एक बार फिर दोहराया है।
मानवीय मदद का सिलसिला जारी: गाजा के साथ खड़ा भारत
युद्ध और तबाही के बीच भारत ने गाजा के नागरिकों के लिए मदद का हाथ और फैला दिया है। अब तक भारत की ओर से 70 मीट्रिक टन मानवीय सहायता भेजी जा चुकी है, जिसमें जीवन रक्षक दवाएं और मेडिकल उपकरण शामिल हैं।
इसके अलावा, भारत ने 'संयुक्त राष्ट्र राहत और कार्य एजेंसी' (UNRWA) को 5 मिलियन डॉलर की वित्तीय सहायता भी प्रदान की है। यह मदद इस बात का प्रमाण है कि भारत इस संकट में केवल कूटनीति ही नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं को भी प्राथमिकता दे रहा है।
पेट्रोल-डीजल की किल्लत या पैनिक खरीदारी? इस राज्य में धड़ाधड़ बंद हो गए 421 पंप, अब एक्शन में आए सीएम
Petrol Diesel Shortage: पेट्रोल-डीजल की किल्लत की अटकलों के बीच इन दिनों खूब अफरातफरी देखी जा रही है. अधिकारियों ने बताया कि राज्य में कुल 4,510 पेट्रोल पंप हैं, जिनमें से करीब 421 पंप अस्थायी रूप से बंद हो गए हैं. इस कारण से जो पंप खुले हैं वहां लोगों लंबी कतारें लग गईं.
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