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ट्रंप ने की 30 दिनों के भीतर फिर से व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर आयोजित करने की अपील

वाशिंगटन, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स डिनर को 30 दिनों के भीतर फिर से आयोजित किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि किसी “पागल व्यक्ति” की वजह से प्रेस की आजादी से जुड़े इस पुराने कार्यक्रम को बाधित नहीं होने देना चाहिए।

कार्यक्रम स्थल के पास एक बंदूकधारी द्वारा सुरक्षा घेरा तोड़कर गोलीबारी करने की घटना के बाद, सीबीएस के 60 मिनट्स कार्यक्रम में दिए गए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि वह चाहते हैं कि इस सालाना कार्यक्रम को जल्द से जल्द और भी ज़्यादा सुरक्षा उपायों के साथ दोबारा आयोजित किया जाए।

उन्होंने कहा, मैं चाहता हूं कि वे इसे फिर से करें। हम किसी चीज को ऐसे ही खत्म नहीं होने दे सकते। मुझे लगता है कि यह बहुत जरूरी है कि वे इसे फिर से करें।

उन्होंने भरोसा जताया कि अगली बार सुरक्षा और बेहतर होगी। उन्होंने कहा, “इस बार और ज्यादा सुरक्षा होगी, बड़ा सुरक्षा घेरा होगा, सब ठीक रहेगा।”

यह घटना शनिवार देर रात वाशिंगटन के एक होटल में हुई, जहां 2,500 से ज्यादा लोग मौजूद थे। इनमें सरकार के बड़े अधिकारी, लॉमेकर्स, राजनयिक और पत्रकार शामिल थे। सुरक्षा कर्मियों ने आरोपी को जल्दी ही काबू में कर लिया और इस घटना में किसी की मौत नहीं हुई।

ट्रंप ने बताया कि उन्होंने आयोजकों से कहा था कि अगर संभव हो तो कार्यक्रम जारी रखें। उन्होंने कहा कि वे नहीं चाहते कि इस तरह की घटना के कारण कार्यक्रम रद्द किया जाए।

उन्होंने कहा कि ऐसी घटना की वजह से ऐसे सार्वजनिक कार्यक्रमों को बंद नहीं किया जाना चाहिए। ट्रंप ने कहा, “मैं नहीं चाहता कि कोई पागल व्यक्ति इस तरह के कार्यक्रम को रद्द करा दे।”

राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि हमले के बाद वहां मौजूद लोगों में एकता देखने को मिली। उन्होंने कहा, “मैंने वहां एक ऐसा माहौल देखा, जहां सब एकजुट थे। एक तरह से वह बहुत अच्छा दृश्य था।”

हालांकि, ट्रंप ने अमेरिकी मीडिया के कुछ हिस्सों की आलोचना भी की। उन्होंने कहा कि मीडिया का एक हिस्सा “बहुत ज्यादा उदार या प्रगतिशील” है, लेकिन उन्होंने यह भी माना कि प्रेस में कई अच्छे और निष्पक्ष लोग भी हैं।

ट्रंप ने एक बार फिर इस डिनर को जारी रखने का समर्थन किया। इस परंपरा को फर्स्ट अमेंडमेंट (संविधान के पहले संशोधन) और राष्ट्रपति पद तथा प्रेस जगत के बीच के संबंधों का प्रतीक माना जाता है।

यह कार्यक्रम आम तौर पर राजनीतिक नेताओं, पत्रकारों और सार्वजनिक हस्तियों को एक साथ लाता है। इसमें औपचारिक भाषणों के साथ हल्का-फुल्का मजाक और मीडिया की भूमिका पर चर्चा भी होती है।

--आईएएनएस

एएस/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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ट्रंप ने अमेरिका-ईरान की जंग जल्द खत्म होने के दिए संकेत, कहा- 'उनकी हालत बहुत खराब'

US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच अभी भी कोई समझौता नहीं हुआ है. हालांकि इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच जंग जल्द समाप्त हो सकती है. उन्होंने कहा कि बढ़ते सैन्य और आर्थिक दबाव ने तेहरान को कमजोर कर दिया है और इससे वह किसी समाधान की ओर बढ़ सकता है. फॉक्स न्यूज से बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ वर्तमान हालातों का जिक्र किया.

ट्रंप ने फिर किया ईरान की सैन्य ताकत को नष्ट करने का दावा

इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक बार फिर से ईरान की सैन्य ताकत को नष्ट करने का भी दावा किया. उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि सबसे बड़ा फायदा यह है कि हमने उनकी नौसेना को पूरी तरह से नष्ट कर दिया है. उनके पास अब वायु सेना नहीं बची है. उनके पास नौसेना भी नहीं बची है. उनकी हालत बहुत खराब है. मेरा मतलब है, उनकी हालत वाकई बहुत खराब है. और हां, हमने नाकाबंदी कर दी है, और यह नाकाबंदी बेहद प्रभावी साबित हुई है, जिसका मतलब है कि अब उन्हें और पैसा नहीं मिल सकता." इसके साथ ही ट्रंप ने ईरान की सैन्य और औद्योगिक क्षमताओं को हुए व्यापक नुकसान का जिक्र किया.

ईरान के नेतृत्व में आंतरिक मतभेद- ट्रंप

इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि उनके (ईरान) के नेतृत्व में आपसी मतभेद है. उन्होंने कहा कि ईरान के नेतृत्व में आंतरिक मतभेद इस मामले को और भी तेजी से सुलझाने में मददगार हो सकते हैं. उन्होंने कहा, "उनके नेता जा चुके हैं, जो अच्छी बात है. वे उन लोगों की तुलना में कहीं अधिक कट्टरपंथी थे जिनसे हम अभी निपट रहे हैं. उनमें से कुछ बहुत ही समझदार हैं, और कुछ नहीं. और उनके बीच तालमेल नहीं है. जैसा कि आप जानते हैं, उनके बीच बहुत आंतरिक कलह चल रही है. लेकिन उनके पास विमानरोधी उपकरण नहीं हैं, उनके पास रडार उपकरण नहीं हैं. सब कुछ नष्ट हो चुका है. उनके कारखाने, उनके मिसाइल बनाने वाले कारखाने लगभग 75 प्रतिशत क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जो 100 फीसदी नहीं है, इसलिए वहां खतरा बना हुआ है."

जंग हम ही जीतेंगे- अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप

इसके साथ ही ट्रंप ने उम्मीद जताई कि तेहरान आगे चलकर व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाएगा. राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बात के भी संकेत दिए कि उन्हें विश्वास है कि यह स्थिति वाशिंगटन के पक्ष में समाप्त हो सकती है. उन्होंने कहा, "मुझे उम्मीद है कि वे समझदारी से काम लेंगे, और अगर वे समझदारी से काम नहीं भी लेते हैं, तो भी हम जीतेंगे." यह संकेत देते हुए कि गतिरोध का अंत निकट आ सकता है.

ईरान के पास नहीं हो सकते परमाणु हथियार- ट्रंप

इससे पहले रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वाशिंगटन वार्ता के लिए विदेशों में प्रतिनिधिमंडल नहीं भेजेगा, बल्कि ईरान से संपर्क शुरू करने का आग्रह करेगा. ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से कहा, "अगर वे बात करना चाहते हैं, तो वे हमारे पास आ सकते हैं या हमें फोन कर सकते हैं. हम लोगों को 18 घंटे की यात्रा करके मिलने के लिए नहीं भेज रहे हैं." ट्रंप के इस बयान से दोनों देशों के बीच फोन पर ही बातचीत के संकेत मिलते हैं. उन्होंने दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी. उन्होंने कहा, "उनके पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते. अन्यथा, मिलने का कोई कारण नहीं है." उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई चर्चा होगी, तो वह अब टेलीफोन के माध्यम से होगी.

ये भी पढ़ें: क्या एक बार फिर शुरू होगी जंग? ट्रंप का ऐलान, अब सीजफायर को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा

दबाव में बात नहीं करेगा ईरान- पेजेश्कियन

इस बीच, ईरान ने अपनी राजनयिक पहल जारी रखी है. विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने ओमान, पाकिस्तान और रूस के बीच यात्रा करके संवाद बनाए रखने और तनाव कम करने के रास्ते तलाशने का प्रयास किया है. हालांकि, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने स्पष्ट किया कि तेहरान दबाव में बातचीत नहीं करेगा और अमेरिकी कार्रवाइयों की आलोचना करते हुए उन्हें राजनयिक प्रतिबद्धताओं के विपरीत बताया. उन्होंने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के प्रति ईरान के रुख को दोहराया और सहयोग के माध्यम से क्षेत्रीय स्थिरता की अपील की.

ये भी पढ़ें: क्या IRGC के आगे ट्रंप के दांव बेअसर? बड़े हमले के बाद भी ईरान टूटने को तैयार नहीं

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