AI Summit में छाया भारतीय इनोवेशन, ‘Teach Genie’ ने बदला पढ़ाने का तरीका
Teach Genie Teachers Smart Assistant: AI Summit में तकनीक और शिक्षा के संगम की एक शानदार झलक देखने को मिली, जहां Lovely Professional University के छात्र द्वारा तैयार किया गया ‘Teach Genie’ AI टूल खास आकर्षण का केंद्र बना. यह एजेंटिक AI सिस्टम शिक्षकों की रोजमर्रा की चुनौतियों को आसान बनाने के लिए डिजाइन किया गया है, जो मिनटों में पूरा लेसन प्लान तैयार कर देता है. इससे न केवल शिक्षकों का समय बचता है, बल्कि पढ़ाने का तरीका भी ज्यादा व्यवस्थित, इंटरैक्टिव और प्रभावी बनता है. रिपोर्ट- शुभांगी तिवारी
जरूरत की खबर- तकिए से तय होती नींद की क्वालिटी:आपके लिए कौन सा तकिया है सही, कैसे करें चुनाव, बता रहे हैं न्यूरोलॉजिस्ट
रात की नींद तय करती है कि हम अगले दिन कितने प्रोडक्टिव रहेंगे। कई लोग अच्छी नींद के लिए तकिया लगाते हैं। लेकिन कम लोग ही जानते हैं कि उनके लिए तकिया लगाना सही है या नहीं। यह छोटा-सा फैसला हमारी नींद की क्वालिटी तय करता है। गलत तकिया लगाने से सुबह गर्दन और पीठ में दर्द हो सकता है, जबकि सही तकिया गहरी और आरामदायक नींद में मदद करता है। सवाल यह है कि क्या हर किसी के लिए तकिया लगाकर सोना सही है? ‘जरूरत की खबर’ में आज जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. राजुल अग्रवाल, डायरेक्टर, न्यूरोलॉजी, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली सवाल- तकिया हमारी नींद को कैसे प्रभावित करता है? जवाब- तकिया हमारी स्लीप क्वालिटी को सीधे प्रभावित करता है। सही तकिया से आरामदायक और अच्छी नींद आती है, जबकि गलत तकिया नींद खराब कर सकता है और शरीर में दर्द की वजह बन सकता है। इसका नींद पर 5 तरह से असर होता है- सवाल- रात में तकिया लगाकर सोना सही है या तकिए के बिना? जवाब- यह सोने की आदत पर निर्भर करता है। सवाल- ‘न्यूट्रल स्पाइन अलाइनमेंट’ क्या होता है? सोते समय यह क्यों जरूरी है? जवाब- न्यूट्रल स्पाइन अलाइनमेंट का मतलब है कि हमारी रीढ़ (स्पाइन) अपने नेचुरल S-शेप कर्व में रहे। इस S शेप के दौरान रीढ़ की हड्डी के 3 मुख्य कर्व होते हैं- सर्वाइकल (गर्दन)- हल्का आगे की ओर कर्व। थोरेसिस (पीठ)- हल्का पीछे की ओर। लंबर (कमर)- आगे की ओर। जब हम सीधे बैठते या खड़े होते हैं तो ये कर्व अपनी नेचुरल पोजिशन में रहते हैं। इसे ही 'न्यूट्रल स्पाइन' कहते हैं। सोते समय इसके लिए गर्दन पर सपोर्ट की जरूरत होती है। इसलिए सोते समय तकिया लगाना जरूरी है। सवाल- सोते समय ‘न्यूट्रल स्पाइन अलाइनमेंट’ होना क्यों जरूरी है? जवाब- अगर स्पाइन अलाइनमेंट सही न रहे तो मसल्स और लिगामेंट्स पर दबाव पड़ता है। ग्राफिक में देखिए, न्यूट्रल स्पाइन अलाइनमेंट’ क्यों जरूरी है- सवाल- ‘न्यूट्रल स्पाइन अलाइनमेंट’ में तकिया कैसे मदद करता है? जवाब- सोते समय तकिया ‘न्यूट्रल स्पाइन अलाइनमेंट’ में ऐसे मदद करता है- सवाल- किन लोगों को तकिया लगाकर सोना चाहिए? जवाब- करवट और पीठ के बल सोने वालों को सही तकिया लगाकर सोना चाहिए। पूरी लिस्ट ग्राफिक में देखें- सवाल- किन लोगों को तकिया नहीं लगाना चाहिए? जवाब- कुछ लोगों को तकिया लगाकर सोने से बचना चाहिए। पूरी लिस्ट ग्राफिक में देखिए- सवाल- अपने लिए सही तकिए का चयन कैसे करें? जवाब- सही तकिया चुनना जरूरी है, क्योंकि इससे नींद और रीढ़ दोनों प्रभावित होते हैं। इसके लिए ये बातें ध्यान रखें- सवाल- गलत तकिया लगाने पर कौन-सी हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं? जवाब- गलत तकिया रखने से शरीर की नेक अलाइनमेंट बिगड़ जाती है, जिससे कई हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं। ग्राफिक में देखिए- सवाल- तकिया लगाते हुए लोग कौन-सी गलतियां करते हैं? जवाब- तकिया लगाने में लोग कुछ कॉमन गलतियां करते हैं- तकिया और नींद से जुड़े कुछ कॉमन सवाल-जवाब सवाल- क्या छोटे बच्चों के लिए तकिया सही है? जवाब- शिशुओं की रीढ़ सीधी होती है। इसलिए उन्हें तकिया लगाकर नहीं सुलाना चाहिए। सवाल- क्या एक से ज्यादा तकिए लगाना सही है? जवाब- एक साथ ज्यादा तकिए लगाने से सर्वाइकल स्पाइन का अलाइनमेंट बिगड़ सकता है। गलत एंगल मसल्स में स्ट्रेन और स्टिफनेस बढ़ा सकता है। सवाल- क्या तकिए के मटेरियल से भी फर्क पड़ता है? जवाब- अच्छी कुशनिंग और सपोर्ट के लिए सही मटेरियल का चुनाव जरूरी है। मेमोरी फोम या कॉटन का तकिया ही बेहतर होता है। सवाल- क्या पुराना तकिया इस्तेमाल करना नुकसानदायक हो सकता है? जवाब- समय के साथ तकिया शेप और मजबूती खो देता है। इसमें डस्ट-माइट्स, बैक्टीरिया जमा हो सकते हैं। इससे एलर्जी हो सकती है। साथ ही खराब सपोर्ट गर्दन और कंधों में दर्द पैदा कर सकता है। ……………… ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- फर्मेंटेड फूड खाने से बच्ची की मौत:गर्मियों में ओवर फर्मेंटेशन से इन हेल्थ प्रॉब्लम्स का रिस्क, बरतें 5 सावधानियां ओडिशा के मयूरभंज जिले के एक सरकारी स्कूल में फर्मेंटेड चावल खाने के बाद एक 12 साल की बच्ची की मौत हो गई। वहीं 150 से ज्यादा बच्चे बीमार पड़ गए। बच्चों ने पखाला भात (फर्मेंटेड चावल), आलू भरता और आम की चटनी खाई थी। आगे पढ़िए…
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News18
















.jpg)



