तमिलनाडु: पटाखा फैक्ट्री में जोरदार धमाका, 23 की मौत, मृतकों मे 16 महिलाएं
(तमिलनाडु)। तमिलनाडु के विरुधुनगर जिले में स्थित एक पटाखा फैक्ट्री में हुए जोरदार विस्फोट ने पूरे इलाके को दहला दिया। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 6 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, फैक्ट्री के अंदर अचानक तेज धमाका हुआ, जिसकी आवाज काफी दूर तक सुनी गई। विस्फोट इतना भीषण था कि फैक्ट्री का बड़ा हिस्सा पूरी तरह ध्वस्त हो गया और देखते ही देखते आग फैल गई।
घटना की जानकारी मिलते ही फायर ब्रिगेड और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं और तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। मलबे में अभी भी कुछ लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।
घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कुछ की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।
सीएम एमके स्टालिन ने जताया दुख
तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने X पर लिखा- इस हादसे में कई लोगों की मौत की खबर बेहद दुखद है। मैं मृतकों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं।
सीएम ने मंत्रियों को तुरंत घटनास्थल पर जाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने जिला कलेक्टर से बात कर सभी जरूरी सहायता पहुंचाने के लिए व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए।
क्या हो सकती है हादसे की वजह?
प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि पटाखा निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी या केमिकल के गलत हैंडलिंग के कारण यह विस्फोट हुआ। हालांकि, असली कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच जारी है।
पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे
विरुधुनगर और Sivakasi इलाका पटाखा उद्योग के लिए जाना जाता है, लेकिन यहां पहले भी कई बार इस तरह के हादसे हो चुके हैं, जिनमें कई लोगों की जान जा चुकी है। सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए विपक्ष की नई घेराबंदी: कांग्रेस, सपा और TMC ने मिलाया हाथ, संसद में 'रिमूवल नोटिस' की तैयारी
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए 'INDIA' गठबंधन के प्रमुख दलों ने एक बार फिर कमर कस ली है। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC), समाजवादी पार्टी और डीएमके (DMK) ने साझा रणनीति बनाई है कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए सदन में ताज़ा 'रिमूवल नोटिस' लाया जाए।
विपक्ष का मानना है कि संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना अब अनिवार्य हो गया है।
विपक्ष की इस नई तैयारी के पीछे सबसे बड़ा कारण हाल के समय में मतदाता सूचियों में हुई कथित गड़बड़ियां हैं। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि चुनाव आयोग ने मतदाता पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान कई महत्वपूर्ण शिकायतों को नजरअंदाज किया है।
कांग्रेस और सपा जैसे दलों का तर्क है कि चुनाव आयोग का मौजूदा रवैया निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के बजाय सत्तापक्ष के प्रति नरम दिखाई देता है, जिससे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर खतरा मंडरा रहा है।
विपक्षी दल इस बार पूरी तैयारी के साथ 'रिमूवल नोटिस' पर सांसदों के हस्ताक्षर जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं। संवैधानिक नियमों के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को केवल 'कदाचार' या 'अक्षमता' के आधार पर ही हटाया जा सकता है।
इसके लिए संसद के दोनों सदनों में प्रस्ताव पेश करना होता है और इसे पारित कराने के लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है। विपक्ष की योजना इस मुद्दे को संसद के पटल पर जोर-शोर से उठाकर सरकार और चुनाव आयोग पर नैतिक दबाव बनाने की है।
विपक्ष का कहना है कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि लोकतंत्र को बचाने की है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने आरोप लगाया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यकाल में कई बार ऐसी स्थितियां बनीं जहाँ आयोग की भूमिका संदिग्ध रही।
इसी को आधार बनाकर विपक्षी दल अब एकजुट होकर ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग पर अड़े हुए हैं और जल्द ही इस पर औपचारिक रूप से सदन के भीतर बड़ा कदम उठाने जा रहे हैं।
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