मानसून के दौरान ड्राइविंग करना जितना चुनौतीपूर्ण होता है, उतना ही जरूरी होता है कार की विजिबिलिटी को बेहतर बनाए रखना। अक्सर बारिश के समय विंडशील्ड और साइड ग्लास पर धुंध जम जाती है, जिससे सामने का रास्ता धुंधला दिखाई देने लगता है। ऐसी स्थिति में छोटी-सी लापरवाही भी दुर्घटना का कारण बन सकती है। इसलिए यह जानना बेहद जरूरी है कि धुंध हटाने के लिए सबसे पहले AC चलाना चाहिए या Defogger का इस्तेमाल करना चाहिए।
शीशों पर फॉग बनने की असली वजह क्या है?
जब कार के अंदर और बाहर के तापमान में बड़ा अंतर होता है, तब शीशों की सतह पर नमी जमा होने लगती है। यही नमी कुछ ही सेकंड में धुंध का रूप ले लेती है। बारिश के मौसम में कार के भीतर मौजूद नमी और यात्रियों की सांस से निकलने वाली भाप भी इस समस्या को बढ़ा देती है, जिससे ड्राइवर की विजिबिलिटी काफी कम हो जाती है।
Defogger है तो सबसे पहले उसी का करें इस्तेमाल
अगर आपकी कार में फ्रंट या रियर डिफॉगर की सुविधा मौजूद है, तो धुंध हटाने के लिए सबसे पहले उसे ऑन करें। यह सिस्टम सीधे विंडशील्ड पर गर्म या नियंत्रित हवा भेजता है, जिससे शीशे पर जमी नमी तेजी से खत्म हो जाती है। कुछ ही मिनटों में शीशा साफ हो जाता है और सड़क स्पष्ट दिखाई देने लगती है।
Defogger नहीं है तो AC बनेगा सबसे बड़ा सहारा
जिन कारों में डिफॉगर उपलब्ध नहीं है, वहां एयर कंडीशनर सबसे प्रभावी विकल्प साबित होता है। कई लोग बारिश में एसी चलाने से बचते हैं, लेकिन वास्तव में AC कार के अंदर मौजूद अतिरिक्त नमी को कम करता है। जैसे-जैसे केबिन की नमी घटती है, शीशों पर जमा फॉग भी तेजी से साफ होने लगता है और विजिबिलिटी बेहतर हो जाती है।
Fresh Air Mode क्यों है जरूरी?
सिर्फ AC चलाना ही काफी नहीं है। बेहतर परिणाम के लिए कार के एयर सर्कुलेशन को Fresh Air Mode पर रखें। इससे बाहर की अपेक्षाकृत ताजी हवा केबिन में प्रवेश करती है और अंदर की नमी बाहर निकलती रहती है। यह तरीका धुंध दोबारा बनने की संभावना भी कम कर देता है।
इन गलतियों से बचना है बेहद जरूरी
कई लोग शीशों पर जमी धुंध को हाथ, रुमाल या टिश्यू से साफ करने लगते हैं। ऐसा करने से शीशे पर धब्बे और खरोंच पड़ सकते हैं, जिससे रात या बारिश में रोशनी का रिफ्लेक्शन बढ़ जाता है और विजिबिलिटी और भी खराब हो सकती है। इसलिए हमेशा कार के Defogger या AC सिस्टम का ही इस्तेमाल करें।
मानसून में सुरक्षित ड्राइविंग के लिए अपनाएं ये आसान टिप्स
बारिश के दौरान हमेशा वाहन की गति नियंत्रित रखें और दूसरे वाहनों से पर्याप्त दूरी बनाए रखें। सफर शुरू करने से पहले वाइपर ब्लेड, वॉशर फ्लूइड और हेडलाइट्स की जांच जरूर करें। यदि धुंध इतनी अधिक हो जाए कि सड़क साफ दिखाई न दे, तो सुरक्षित स्थान पर गाड़ी रोककर पहले शीशों को पूरी तरह साफ होने दें। साथ ही अचानक ब्रेक लगाने या तेज रफ्तार से बचें और सड़क पर पूरा ध्यान केंद्रित रखें।
- डॉ. अनिमेष शर्मा
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अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ़ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने H-1B याचिकाओं पर 4,000 USD और L-1 याचिकाओं पर 4,500 USD की फीस को उन खास एम्प्लॉयर्स द्वारा जमा किए गए वीज़ा एक्सटेंशन तक बढ़ा दिया है, जिनके कर्मचारी उसी कंपनी में बने रहते हैं। 9 सितंबर से लागू होने वाले इस अंतिम नियम से उन व्यवसायों के लिए बार-बार होने वाले इमिग्रेशन खर्च में काफी बढ़ोतरी होगी जो विदेशी टैलेंट पर बहुत ज़्यादा निर्भर हैं। यह नियम खास तौर पर उन कंपनियों पर लागू होता है जो अमेरिका में कम से कम 50 कर्मचारियों को रोजगार देती हैं, और जहां 50 प्रतिशत से ज़्यादा घरेलू वर्कफोर्स के पास सामूहिक रूप से H-1B, L-1A या L-1B स्टेटस है।
अपडेट किए गए नियम के तहत, ऐसी कंपनियों को हर बार किसी कवर किए गए कर्मचारी के रहने की अवधि बढ़ाने (एक्सटेंशन) के लिए 9/11 रिस्पॉन्स और बायोमेट्रिक एंट्री-एग्जिट फीस जमा करनी होगी। पहले, यह फीस आम तौर पर शुरुआती रोजगार या एम्प्लॉयर बदलने से जुड़े आवेदनों तक ही सीमित थी। मौजूदा एम्प्लॉयर द्वारा उसी स्टाफ मेंबर के लिए प्रोसेस किए गए एक्सटेंशन को छूट मिली हुई थी, बशर्ते कि अलग से धोखाधड़ी-रोकथाम फीस लागू न हो।
इस बदलाव के पीछे की वजह बताते हुए DHS ने कहा, "रेगुलेटरी बदलाव DHS की कानूनी भाषा की व्याख्या को सही करते हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कवर किए गए एम्प्लॉयर्स स्टेटस एक्सटेंशन की सभी याचिकाओं के लिए '9-11 बायोमेट्रिक फीस' जमा करें, चाहे संबंधित धोखाधड़ी रोकथाम और पहचान फीस लागू हो या न हो।
हालांकि फीस की असल दरें वही हैं, लेकिन इस बदलाव से उन आवेदनों की संख्या काफी बढ़ गई है जिन पर ये मौजूदा शुल्क लागू होंगे। प्रभावित एम्प्लॉयर्स को हर योग्य H-1B आवेदन के लिए 4,000 USD और हर L-1 फाइलिंग के लिए 4,500 USD का खर्च उठाना होगा। जिन संशोधित याचिकाओं में कर्मचारी के अधिकृत स्टेटस की अवधि बढ़ाने का अनुरोध नहीं किया गया है, उन्हें छूट मिलती रहेगी। वित्तीय जिम्मेदारी पूरी तरह से एम्प्लॉयर पर होगी; DHS ने उन प्रस्तावों को खारिज कर दिया है जिनके तहत विदेशी प्रोफेशनल्स खुद यह शुल्क दे सकते थे, अगर उनकी कंपनियां भुगतान करने को तैयार न हों।
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