28 फरवरी से अब तक खाड़ी और पश्चिम एशिया से 12.65 लाख से अधिक यात्री भारत लौटे : सरकार
नई दिल्ली, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। सरकार ने शनिवार को कहा कि 28 फरवरी से अब तक खाड़ी और पश्चिम एशिया क्षेत्र से लगभग 12.65 लाख यात्रियों ने भारत की यात्रा की है।
विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा कि वह इस क्षेत्र में हो रहे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रहा है, जिसमें भारतीय समुदाय की सुरक्षा, संरक्षा और कल्याण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
खाड़ी और पश्चिम एशिया में स्थित भारतीय मिशन और पोस्ट 24 घंटे हेल्पलाइन चला रहे हैं और स्थानीय सरकारों के साथ लगातार संपर्क में रहते हुए नागरिकों की सक्रिय रूप से सहायता कर रहे हैं।
सरकार भारतीय नागरिकों को स्थानीय नियमों, यात्रा संबंधी अपडेट और उपलब्ध कांसुलर सेवाओं के बारे में सूचित रखने के लिए नियमित रूप से परामर्श जारी करती रही है।
मिशन भारतीय समुदाय के समूहों, कंपनियों और पेशेवर संगठनों के साथ भी जुड़ रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जरूरतमंद लोगों तक समय पर सहायता पहुंच सके।
भारत और इस क्षेत्र के बीच उड़ान संचालन में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है, और अतिरिक्त सेवाएं शुरू की जा रही हैं।
यूएई में, एयरलाइंस सुरक्षा संबंधी बातों को ध्यान में रखते हुए सीमित वाणिज्यिक उड़ानें संचालित कर रही हैं; शनिवार को यूएई और भारत के बीच लगभग 110 उड़ानें संचालित होने की उम्मीद है।
सऊदी अरब और ओमान से भी सेवाएं जारी हैं, जबकि कतर एयरवेज ने कतर के हवाई क्षेत्र के आंशिक रूप से फिर से खुलने के बाद अपनी उड़ानें फिर से शुरू कर दी हैं।
इस क्षेत्र के अन्य हिस्सों में भी हवाई संपर्क बढ़ रहा है। कुवैत और बहरीन ने अपने हवाई क्षेत्र फिर से खोल दिए हैं, और एयरलाइंस या तो भारत के लिए सीमित उड़ानें फिर से शुरू कर रही हैं या उनकी योजना बना रही हैं।
इराक सीमित उड़ान सेवाओं की अनुमति दे रहा है जिनका उपयोग आगे की यात्रा के लिए किया जा सकता है, जबकि ईरान ने मालवाहक और चार्टर्ड उड़ानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र को आंशिक रूप से खोल दिया है।
सरकार ने भारतीय नागरिकों को ईरान की यात्रा न करने की सलाह दी है और जो लोग वर्तमान में वहां हैं, उनसे आग्रह किया है कि वे तेहरान स्थित भारतीय दूतावास की सहायता से, जो पहले ही 2,400 से अधिक भारतीयों को देश छोड़ने में मदद कर चुका है, जमीनी सीमाओं के रास्ते देश से बाहर निकलें।
इस बीच, इजरायल ने सीमित उड़ान संचालन फिर से शुरू कर दिया है, जिससे कनेक्टिंग गंतव्यों के माध्यम से भारत की यात्रा के लिए अतिरिक्त मार्ग उपलब्ध हो गए हैं।
समुद्री मोर्चे पर, पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने कहा कि इस क्षेत्र में संचालित होने वाले भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक उपाय किए गए हैं।
केंद्र सरकार ने बताया कि पिछले 24 घंटों में भारतीय ध्वज वाले जहाजों से जुड़ी किसी भी घटना की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है, और इस क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं।
--आईएएनएस
एससीएच
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
पाक सरकार की ताजा ईंधन मूल्य वृद्धि को ‘आर्थिक आत्महत्या’ बताया गया
इस्लामाबाद, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। पाकिस्तान की मानवाधिकार परिषद (एचआरसी) ने शनिवार को पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी की कड़ी निंदा करते हुए इसे आम जनता पर किया गया “आर्थिक आत्मघाती हमला” करार दिया।
यह प्रतिक्रिया तब आई जब पाकिस्तान सरकार ने अगले सप्ताह के लिए पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल (एचएसडी) की कीमतों में 26.77 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की घोषणा की। ऊर्जा मंत्रालय (पेट्रोलियम डिवीजन) की अधिसूचना के अनुसार, नई दरें शनिवार से लागू हो गई हैं।
पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने कहा कि क्षेत्रीय तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल कीमतों में फिर उछाल आया है। उन्होंने कहा कि बढ़ती कीमतों और वैश्विक साझेदारों के साथ हुए समझौतों के दबाव के कारण सरकार को यह बोझ जनता पर डालना पड़ रहा है।
मानवाधिकार परिषद ने इस फैसले पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि पेट्रोल की कीमतों में बार-बार वृद्धि केवल आंकड़ों का बदलाव नहीं, बल्कि उस महंगाई के तूफान को न्योता देना है जिसने पहले ही आम आदमी की कमर तोड़ दी है।
परिषद ने कहा कि सम्मानजनक जीवन जीना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। परिवहन, दवाइयों और रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी गरीब और मध्यम वर्ग को गरीबी रेखा से नीचे धकेलने के समान है।
एचआरसी ने कहा कि सरकार का पहला दायित्व जनता का कल्याण सुनिश्चित करना है, न कि लोगों को असहनीय बोझ तले दबाना। परिषद ने सरकार से इस “दमनकारी फैसले” की तत्काल समीक्षा करने और आम जनता को सीधी राहत देने के लिए आपात कदम उठाने की मांग की।
परिषद की चेयरपर्सन के हवाले से कहा गया कि सरकार जनता की आवाज सुने और गरीब समर्थक आर्थिक नीतियां बनाए, न कि जनविरोधी फैसले ले। उन्होंने कहा कि अभिजात वर्ग को मिलने वाली सुविधाएं कम की जाएं ताकि आम नागरिक को राहत मिल सके।
गौरतलब है कि इससे पहले इसी महीने पाकिस्तान सरकार ने ईंधन कीमतों में भारी बढ़ोतरी की थी, जिसमें पेट्रोल 43 प्रतिशत और हाई-स्पीड डीजल 55 प्रतिशत महंगा किया गया था।
--आईएएनएस
डीएससी
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