खेल-खेल में प्राइवेट पार्ट में घुसा सरिया, मासूम की हालत गंभीर,डॉक्टरों ने बचाई जान
सतना हादसा ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि बच्चों के खेल में थोड़ी सी लापरवाही कितनी बड़ी मुसीबत बन सकती है। टिकरिया गांव में एक मासूम बच्चा रोज की तरह घर के बाहर खेल रहा था। हाथ में लोहे की सरिया थी और वह उसी के साथ खेलते-खेलते अचानक संतुलन खो बैठा।
अगले ही पल जो हुआ, उसने पूरे परिवार को हिला कर रख दिया। सरिया सीधे बच्चे के शरीर के नाजुक हिस्से में घुस गई। दर्द से तड़पते बच्चे की हालत देखकर घर में चीख-पुकार मच गई। यह सतना हादसा इतना गंभीर था कि हर सेकंड कीमती बन गया था।
कैसे हुआ दर्दनाक हादसा
सतना हादसा उस समय हुआ जब छह साल का अमन रावत घर के बाहर खेल रहा था। खेलते-खेलते अचानक उसका पैर फिसला और वह सीधे सरिया पर गिर गया। सरिया उसके अंडकोश में घुस गई, जिससे वह बुरी तरह घायल हो गया।
यह घटना इतनी अचानक हुई कि आसपास मौजूद लोग कुछ समझ ही नहीं पाए। बच्चे की चीख सुनकर परिजन दौड़े और उसे तुरंत उठाकर अस्पताल ले जाने की तैयारी की। इस सतना हादसा में सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि चोट बेहद संवेदनशील जगह पर लगी थी।
अस्पताल पहुंचते ही मची अफरा-तफरी
सतना हादसा के बाद परिजन बच्चे को तुरंत मझगवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने प्राथमिक इलाज किया, लेकिन चोट की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
जिला अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों की टीम अलर्ट हो गई। बच्चे की हालत देखकर बिना देर किए उसे इमरजेंसी में ले जाया गया। इस दौरान हर कोई यही कोशिश कर रहा था कि बच्चे की जान बचाई जा सके।
आधे घंटे में जिंदगी बचाने की जंग
सतना हादसा के इस मामले में मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने तेजी से फैसला लिया। सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉक्टरों की टीम ने तुरंत ऑपरेशन शुरू किया।
करीब आधे घंटे तक चले इस जटिल ऑपरेशन में डॉक्टरों ने बेहद सावधानी से सरिया को बाहर निकाला। यह ऑपरेशन आसान नहीं था, क्योंकि जरा सी चूक से बच्चे की हालत और बिगड़ सकती थी। लेकिन डॉक्टरों की मेहनत और अनुभव ने एक बड़ी त्रासदी को टाल दिया। ऑपरेशन सफल रहा और बच्चे की जान बचा ली गई।
समय पर इलाज बना जीवन रक्षक
डॉक्टरों का कहना है कि अगर सतना हादसा में इलाज में थोड़ी भी देरी होती, तो स्थिति जानलेवा हो सकती थी। ज्यादा खून बहने या संक्रमण का खतरा बहुत ज्यादा था। समय पर अस्पताल पहुंचाना और तुरंत ऑपरेशन शुरू करना ही बच्चे की जान बचाने में सबसे अहम साबित हुआ। फिलहाल बच्चे को सर्जिकल वार्ड में रखा गया है और उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
परिवार के लिए राहत की खबर
सतना हादसा के बाद जहां परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था, वहीं अब बच्चे की हालत स्थिर होने की खबर ने उन्हें राहत दी है। परिजन अभी भी इस घटना से सदमे में हैं, लेकिन डॉक्टरों के प्रति आभार व्यक्त कर रहे हैं, जिन्होंने समय रहते बच्चे की जान बचा ली।
बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
सतना हादसा सिर्फ एक घटना नहीं है, बल्कि यह एक चेतावनी भी है। अक्सर बच्चे खेलते समय आसपास पड़ी खतरनाक चीजों से अनजान रहते हैं। घर के बाहर या निर्माण स्थल के पास लोहे की सरिया, तेज औजार या अन्य खतरनाक सामान बच्चों के लिए जोखिम बन सकते हैं। इस घटना ने यह दिखा दिया कि छोटी सी लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना में बदल सकती है।
Transfer News : पुलिस इंस्पेक्टर्स के थोक में तबादले, नई पदस्थापना आदेश जारी, यहाँ देखें लिस्ट
मध्य प्रदेश पुलिस ने निरीक्षक और कार्यवाहक निरीक्षकों के तबादलों का आदेश जारी किया है, आदेश में 36 पुलिस अधिकारियों के नाम हैं इनमें से 18 अधिकारियों को नक्सल प्रभावित जिलों से हटाया गया है वहीं 18 दूसरे पुलिस अधिकारियों को उनकी जगह पदस्थ किया गया है।
मध्य प्रदेश शासन के नियमानुसार पुलिस अधिकारियों को अनिवार्य रूप से 2 साल के लिए नक्सल प्रभावित जिलों बालाघाट/मंडला में पदस्थ किया जाता और उनका कार्यकाल पूरा होने के बाद उन्हें वहां से हटाकर किसी अन्य जिले में भेजा जाता है, इसी नियम के तहत पुलिस मुख्यालय ने 36 पुलिस अधिकारियों की पदस्थापना में बदलाव किया है।
18 पुलिस अधिकारी नक्सल प्रभावी जिलों से हटाये इतने ही भेजे
पुलिस मुख्यालय के आदेश में 18 ऐसे पुलिस अधिकारियों के नाम है जो अभी तक बालाघाट/मंडला में पदस्थ थे और उनकी 2 वर्ष की कार्य अवधि पूरी हो चुकी थी उन्हें ट्रांसफर कर प्रदेश के दूसरे जिलों में पदस्थ किया गया है इसी तरह प्रदेश के दूसरे जिलों में पदस्थ 18 पुलिस अधिकारियों को वहां से हटाकर बालाघाट/मंडला में पदस्थ किया गया है। इस आदेश में निरीक्षक और कार्यवाहक निरीक्षक दोनों शामिल हैं।
पुलिस मुख्यालय ने दिए ये निर्देश
पुलिस मुख्यालय ने अपने आदेश में कहा है कि जिले के अन्दर कार्य का आवंटन एसपी द्वारा जिले में आमद देने के बाद किया जायेगा, आदेश में निर्देश दिए गए हैं कि ट्रांसफर किये गए पुलिस अधिकारी को निर्धारित अवधि में कार्य मुक्त कर दिया जाये साथ भी ये भी निर्देश दिए गए हैं कि यदि कोई अधिकारी निलंबन में चल रहा है है तो उसे कार्यमुक्त ना कर उसकी सूचना पुलिस मुख्यालय को दी जाये।
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