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नासा की बड़ी उपलब्धि: अंतरिक्ष में ही तैयार होगा IV फ्लूइड, लंबे मिशनों को मिलेगी नई ताकत

नई दिल्ली, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने अंतरिक्ष मिशनों के लिए एक अहम तकनीकी उपलब्धि हासिल की है। अब अंतरिक्ष में ही जरूरत के अनुसार इंट्रावेनस (IV) फ्लूइड तैयार किया जा सकेगा। यह तकनीक लंबे समय तक चलने वाले मानवयुक्त मिशनों, खासकर चंद्रमा और मंगल ग्रह की यात्राओं के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।

नासा हर मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन में जीवन रक्षक तरल पदार्थ की थैलियां अपने साथ ले जाता है। इसे आईवी या इंट्रावेनस द्रव कहते हैं। सोडियम क्लोराइड और शुद्ध पानी का यह साधारण मिश्रण उड़ान के दौरान निर्जलीकरण, जलन और कई अन्य चिकित्सीय स्थितियों का इलाज कर सकता है। यह लगभग 30 प्रतिशत तक आम मेडिकल समस्याओं का उपचार करने में सक्षम है।

पृथ्वी की निचली कक्षा से आगे गहरे अंतरिक्ष में जाने वाले मिशन तीन साल या उससे ज्यादा समय तक चल सकते हैं। ऐसे लंबे सफर में चालक दल के स्वास्थ्य के लिए IV द्रव की जरूरत पड़ सकती है, लेकिन समस्या यह है कि पहले से पैक किए गए IV द्रव की शेल्फ लाइफ सिर्फ 16 महीने तक ही होती है। इतनी कम अवधि वाली आपूर्ति को स्टॉक करना जटिल और जोखिम भरा होता है। इसी समस्या का समाधान निकालने के लिए नासा के ग्लेन रिसर्च सेंटर (क्लीवलैंड) के वैज्ञानिकों ने एक उन्नत तकनीक विकसित की है। यह तकनीक अंतरिक्ष में उपलब्ध पानी को जरूरत के अनुसार चिकित्सा योग्य IV द्रव में बदल सकती है। अब टीम इस प्रणाली के छोटे और हल्के संस्करण का परीक्षण इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) पर करने की तैयारी कर रही है।

इस परीक्षण के लिए आईवीजीईएन मिनी नामक सिस्टम नासा के नॉर्थ्रोप ग्रुम्मन कमर्शियल रीसप्लाई सर्विसेज-24 (एनजी सीआरएस-24) मिशन के जरिए 11 अप्रैल को अन्य सामान, प्रयोगों और हार्डवेयर के साथ स्पेस स्टेशन पर पहुंचाया गया था। यह सिस्टम IV फ्लूइड बनाकर यह साबित करेगा कि डिजाइन अंतरिक्ष की परिस्थितियों में ठीक से काम करता है।

यह सिस्टम स्पेस स्टेशन के पीने वाले पानी को एक बड़े बैग में भरकर काम करता है। बैग को आईवीजीईएन मिनी से जोड़ा जाता है। सिस्टम पानी को अच्छी तरह छानकर उसमें मौजूद कणों और खनिज आयनों को पूरी तरह हटा देता है। फिर यह शुद्ध पानी एक बैग में जाता है, जिसमें पहले से तय मात्रा में सोडियम क्लोराइड भरा होता है। दोनों को सही अनुपात में मिलाने पर रोगाणु रहित और चिकित्सा के लिए सुरक्षित IV द्रव तैयार हो जाता है।

नासा ग्लेन की इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट मैनेजर कर्टनी श्कुरको ने बताया कि लॉन्च के बाद मई में अस्थायी संचालन की योजना है। अंतरिक्ष स्टेशन पर मौजूद दल दो दिनों तक इस सिस्टम को चलाएगा और लगभग 10 लीटर तरल पदार्थ तैयार करेगा। इसके बाद इस द्रव को पृथ्वी पर वापस लाकर उसकी जांच की जाएगी। जांच से पता चलेगा कि अंतरिक्ष में बने द्रव ने सभी जरूरी मानकों को पूरा किया है और इस्तेमाल के लिए पूरी तरह सुरक्षित है।

आईवीजीईएन मिनी इस तकनीक का दूसरा और बेहतर संस्करण है। मूल आईवीजीईएन सिस्टम का प्रदर्शन 2010 में अंतरिक्ष स्टेशन पर किया गया था। वह प्रणाली काफी बड़ी थी, क्योंकि इसमें कई अतिरिक्त संवेदन उपकरण लगे थे। सफल परीक्षण के बाद टीम ने इसे छोटा, हल्का और ज्यादा कुशल बनाने का काम किया।

श्कुरको ने उदाहरण देते हुए कहा, “अगर मंगल ग्रह के मिशन में 100 लीटर IV फ्लूइड ले जाना हो तो एक लीटर के 100 बैग बहुत ज्यादा जगह घेरेंगे। वहीं आईवीजीईएन मिनी बहुत कम जगह लेता है। यह पहले से बैग ले जाने और एक्सपायर होने के जोखिम के बीच का बेहतर विकल्प है। छोटा उपकरण ले जाने और जरूरत के अनुसार द्रव बनाने का मतलब है कि फ्लूइड हमेशा ताजा और उपयोग योग्य रहेगा।”

सिस्टम की क्षमता इस आधार पर तय की गई है कि गहरे अंतरिक्ष में कौन-कौन सी मेडिकल घटनाएं हो सकती हैं और उनके इलाज के लिए कितना द्रव चाहिए। वर्तमान मॉडल प्रति घंटे 1.2 लीटर IV तरल तैयार कर सकता है।

--आईएएनएस

एमटी/वीसी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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आईटी शेयरों में बिकवाली और पश्चिम एशिया तनाव के चलते इस हफ्ते भारतीय शेयर बाजार में आई भारी गिरावट

मुंबई, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और आईटी शेयरों में भारी बिकवाली के कारण इस हफ्ते भारतीय शेयर बाजार बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ।

साप्ताहिक आधार पर प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स 2.3 प्रतिशत और निफ्टी50 1.9 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ।

हालांकि, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में ज्यादा गिरावट नहीं आई। बीएसई मिडकैप इंडेक्स 0.6 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स 0.2 प्रतिशत ही नीचे आया।

लिक्विडिटी के मामले में विदेशी निवेशकों (एफआईआई) ने इस हफ्ते 1,369 करोड़ रुपए के शेयर बेचे, जबकि घरेलू निवेशकों (डीआईआई) ने 9,782 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे।

सेक्टर के हिसाब से आईटी सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, जिसमें करीब 10 प्रतिशत की गिरावट आई। यह गिरावट कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजों के अनुमान के कारण आई, हालांकि इंफोसिस और टाटा कंसेल्टेंसी सर्विसेज के नतीजे ठीक रहे।

दूसरी ओर, एफएमसीजी जैसे उपभोक्ता सेक्टर ने अच्छा प्रदर्शन किया और कंपनियों ने डबल डिजिट ग्रोथ दिखाई। बीएफएसआई सेक्टर भी स्थिर रहा, जहां एसेट क्वालिटी ठीक बनी रही।

विश्लेषकों के अनुसार, पूरे हफ्ते बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा। पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में आई रुकावट के कारण निवेशकों में अनिश्चितता बनी रही।

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और राजनीतिक अनिश्चितता के कारण निवेशकों ने ज्यादा खरीदारी नहीं की, जिससे बाजार सीमित दायरे में नकारात्मक रुख के साथ कारोबार करता नजर आया।

विश्लेषकों ने यह भी बताया कि लगातार विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बाजार पर दबाव रहा, जबकि घरेलू निवेशकों की खरीदारी ने गिरावट को कुछ हद तक संभाला।

इस दौरान वेस्ट एशिया की घटनाएं भी बाजार पर भारी रहीं। पहले ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की घोषणा की, लेकिन बाद में अमेरिका की कार्रवाई के बाद फिर से प्रतिबंध लगा दिए गए, जिससे कच्चे तेल की कीमतें 15 प्रतिशत बढ़कर 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं।

इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम को अनिश्चित समय के लिए बढ़ा दिया, जिससे क्षेत्र में अनिश्चितता और बढ़ गई।

इसके अलावा, निवेशक कंपनियों के वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही यानी जनवरी-मार्च तिमाही के नतीजों पर भी नजर बनाए हुए हैं।

हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को बीएसई सेंसेक्स 999.79 अंकों यानी 1.29 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,664.21 पर बंद हुआ, तो वहीं एनएसई निफ्टी50 275.10 (1.14 प्रतिशत) अंक फिसलकर 23,897.95 पर पहुंच गया।

दिन के कारोबार के दौरान 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 77,483.80 पर खुलकर 1,260 अंक या 1.6 प्रतिशत गिरकर 76,403.87 के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 24,100.55 पर खुलकर 359 अंक या 1.5 प्रतिशत गिरकर 23,813.65 के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया।

अगले हफ्ते निवेशकों की नजर भारत के मार्च 2026 के आईआईपी डेटा, अमेरिका, चीन और जापान के पीएमआई डेटा और अमेरिका के पीसीई महंगाई आंकड़ों पर रहेगी।

साथ ही, फेडरल रिजर्व, बैंक ऑफ इंग्लैंड और यूरोपीय केंद्रीय बैंक जैसे बड़े केंद्रीय बैंक अपनी नीतियों की घोषणा करेंगे, जिस पर बाजार की दिशा निर्भर करेगी।

--आईएएनएस

डीबीपी

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