पूर्वोत्तर भारत के मिजोरम और मणिपुर से जुड़े ब्नेई मेनाशे समुदाय के लगभग ढाई सौ लोग इजराइल पहुँचे जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। रिपोर्टों के मुताबिक, यह समूह शुक्रवार तड़के बेन गुरियन हवाई अड्डे पर उतरा। हम आपको बता दें कि यह वही पहला दल है जो पिछले वर्ष नवंबर में इजराइली सरकार द्वारा इस समुदाय के हजारों लोगों को अपने यहां बसाने के फैसले के बाद वहां पहुंचा है।
हवाई अड्डे पर सभी का स्वागत बेहद उत्साहपूर्ण माहौल में किया गया। समुदाय के लोग पारंपरिक परिधान में थे, पुरुषों ने हाथ से बुनी टोपी पहनी हुई थी और महिलाओं ने सिर ढका हुआ था। वहां पहले से रह रहे समुदाय के सदस्यों और अन्य शुभचिंतकों ने छोटे-छोटे इजराइली झंडे लहराते हुए उनका अभिनंदन किया। इस अवसर पर पारंपरिक धार्मिक गीत भी बजाया गया, जिससे वातावरण और अधिक भावुक और गरिमामय हो गया।
इस समूह में शामिल चाविमावी ने बताया कि यह केवल शुरुआत है और आने वाले दिनों में और भी लोग दिल्ली से इजराइल के लिए रवाना होंगे। मणिपुर से भी कई सदस्य जल्द ही वहां पहुंचने वाले हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वहां पहुंचते ही उन्हें नागरिकता प्रदान कर दी गई और उनके स्वागत के लिए विशेष आयोजन किया गया। फिलहाल इन लोगों को उत्तरी इजराइल के नासरत क्षेत्र में बसाया जाएगा, जहां उनके लिए रहने की व्यवस्था की गई है।
हम आपको बता दें कि ब्नेई मेनाशे समुदाय अपने आप को प्राचीन इजराइली जनजाति मेनाशे का वंशज मानता है। उनकी मौखिक परंपरा के अनुसार उनके पूर्वज सदियों पहले पश्चिम एशिया से निकलकर फारस, अफगानिस्तान, तिब्बत और चीन होते हुए पूर्वोत्तर भारत पहुंचे थे। इस लंबे प्रवास के दौरान उन्होंने कई यहूदी परंपराओं को जीवित रखा, जैसे कुछ धार्मिक अनुष्ठान और रीति रिवाज। हालांकि भारत में 19वीं सदी के दौरान ईसाई मिशनरियों के प्रभाव में इस समुदाय के कई लोग ईसाई धर्म में परिवर्तित हो गए थे, फिर भी उन्होंने अपनी प्राचीन पहचान से जुड़ाव बनाए रखा। इजराइल पहुंचने के बाद उन्हें औपचारिक रूप से यहूदी धर्म में पुनः दीक्षित होना होगा, जो वहां की नागरिकता प्रक्रिया का एक अनिवार्य हिस्सा है।
हम आपको बता दें कि इजराइल सरकार ने वर्ष 2030 तक लगभग छह हजार ब्नेई मेनाशे लोगों को चरणबद्ध तरीके से बसाने की योजना बनाई है। इस पूरी योजना के अंतर्गत वर्ष 2026 में लगभग बारह सौ लोगों को हवाई मार्ग से लाने का लक्ष्य रखा गया है। अगले दो सप्ताह में ही दो और उड़ानों की योजना बनाई गई है, जिससे इस प्रक्रिया को तेजी दी जा सके। इस पुनर्वास कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए कई संस्थाएं मिलकर काम कर रही हैं। यहूदी एजेंसी, मुख्य रब्बी संस्था, धर्म परिवर्तन प्राधिकरण, आव्रजन और एकीकरण मंत्रालय तथा विदेश मंत्रालय सहित कई सरकारी विभाग इसमें शामिल हैं। इसके लिए लगभग 90 मिलियन शेकेल यानी करीब 30 मिलियन अमेरिकी डॉलर का बजट निर्धारित किया गया है, जिसमें यात्रा, आवास, भाषा शिक्षा और अन्य सुविधाएं शामिल हैं।
इस समुदाय के लोगों का चयन भी एक सुव्यवस्थित प्रक्रिया के तहत किया गया। पिछले वर्ष दिसंबर में नौ रब्बियों का एक दल आइजोल पहुंचा था, जहां उन्होंने लगभग तीन सौ तीन सौ लोगों का चयन मिजोरम और मणिपुर से किया। इस दौरान कई सप्ताह तक जांच और पहचान की प्रक्रिया चली, जिसमें धार्मिक और सांस्कृतिक आधारों पर चयन किया गया। हम आपको बता दें कि इतिहास में इस समुदाय की पहचान को लेकर बहस भी होती रही है, लेकिन वर्ष 2005 में एक प्रमुख धार्मिक नेता ने उन्हें इजराइल के वंशज के रूप में मान्यता दी, जिससे उनके इजराइल प्रवास का रास्ता साफ हुआ। इसके बाद से धीरे-धीरे इस समुदाय के लोग इजराइल पहुंचते रहे हैं और अब तक लगभग चार हजार लोग वहां बस चुके हैं, जबकि करीब छह से सात हजार लोग अभी भी भारत में रह रहे हैं।
देखा जाये तो यह पूरी प्रक्रिया केवल एक प्रवास नहीं बल्कि पहचान, आस्था और इतिहास से जुड़ी एक गहरी यात्रा है। ब्नेई मेनाशे समुदाय के लिए यह अपने मूल से पुनः जुड़ने का अवसर है, जबकि इजराइल के लिए यह अपने बिखरे हुए ऐतिहासिक समुदायों को वापस लाने की एक महत्वपूर्ण पहल है। आने वाले वर्षों में यह प्रक्रिया और तेज होगी, जिससे हजारों लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव आएगा और एक पुरानी कहानी नए सिरे से जीवंत होगी। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि क्या इजराइल ने इस पहल के लिए भारत सरकार से कोई बात की थी। भारत की ओर से भी इस संबंध में अभी तक कोई बयान नहीं आया है।
Continue reading on the app
साइबर सिटी गुरुग्राम से एक हैरान करने वाली और दुखद खबर सामने आई है। यहाँ एक 29 वर्षीय युवक की कथित तौर पर सेक्स-बढ़ाने वाली दवा (Sex-Enhancing Drug) के ओवरडोज के कारण मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, युवक अपनी मंगेतर से मिलने की तैयारी कर रहा था, लेकिन उसके पहुँचने से पहले ही युवक ने दम तोड़ दिया। मृतक की पहचान रोहित लाल के रूप में हुई है, जो मूल रूप से नागपुर का रहने वाला था। रोहित नई दिल्ली में 'क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया' में कार्यरत था और गुरुग्राम के सेक्टर 53 स्थित एक पीजी (PG) में रहता था। घटना का पता गुरुवार सुबह तब चला जब रोहित का एक सहकर्मी उसे लेने उसके कमरे पर पहुँचा। दोनों अक्सर साथ ही ऑफिस जाया करते थे। जब रोहित ने न तो फोन उठाया और न ही काफी देर तक दरवाजा खोला, तो सहकर्मी को शक हुआ और उसने तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दी।
पूरी घटना पर पुलिस का बयान
पुलिस के अनुसार, यह घटना गुरुवार सुबह तब सामने आई जब लाल के एक सहकर्मी ने अधिकारियों को इसकी सूचना दी। सहकर्मी ने बताया कि वे आमतौर पर साथ ही ऑफिस जाते थे, लेकिन उस दिन लाल ने न तो फोन उठाया और न ही दरवाज़ा खोला। पुलिस मौके पर पहुंची और दरवाज़ा तोड़कर अंदर गई, जहां लाल बिस्तर पर मृत पड़ा मिला। अधिकारियों को कमरे से कुछ दवाओं और हेल्थ सप्लीमेंट्स के रैपर मिले।
एक वरिष्ठ जांच अधिकारी ने बताया कि शुरुआती जांच से पता चलता है कि लाल ने अपनी मंगेतर को मिलने के लिए बुलाया था, लेकिन उसके पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई। पुलिस को शक है कि उसने सेक्स-बढ़ाने वाली दवा का सेवन किया था, और संभवतः ओवरडोज़ के कारण उसे दिल का दौरा पड़ गया।
पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया और उसे परिवार वालों को सौंप दिया। अधिकारियों ने विसरा और बरामद दवाओं को जांच के लिए फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) भेज दिया है।
सेक्टर 53 के SHO सतेंद्र रावल ने कहा, "मौत का सही कारण विसरा रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा। हम सभी पहलुओं से मामले की जांच कर रहे हैं।"
Continue reading on the app