Kal Ka Mausam: 12 राज्यों में भयंकर बारिश का अलर्ट, दिल्ली और यूपी में लू बरपाएगी कहर; जानिए IMD अपडेट
Kal Ka Mausam: भारत के मौसम में इन दिनों दो अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं. एक ओर उत्तर भारत और मध्य भारत के मैदानी इलाके भीषण गर्मी और लू की चपेट में हैं, तो दूसरी ओर पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में कुदरत का अलग ही रूप दिखाई दे रहा है. भारत मौसम विभाग यानी आईएमडी ने देश के 12 राज्यों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. इन इलाकों में आने वाले दिनों में 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की आशंका जताई गई है. मैदानी इलाकों में रहने वाले लोग जहां सूरज की तपिश से बेहाल हैं, वहीं पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों में बारिश से राहत मिलने की उम्मीद है.
पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश और तूफान की चेतावनी
मौसम विभाग के ताजा अनुमान के मुताबिक, पूर्वोत्तर भारत के असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश समेत कई राज्यों में इस सप्ताह व्यापक बारिश हो सकती है. आईएमडी ने चेतावनी दी है कि कुछ स्थानों पर बारिश के साथ-साथ तेज तूफान भी आ सकता है. पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में भी 25 से 28 अप्रैल के बीच मौसम करवट ले सकता है. इन राज्यों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने की संभावना है. विशेष रूप से झारखंड में 26 अप्रैल को ओलावृष्टि की आशंका जताई गई है, जिससे फसलों को नुकसान पहुंच सकता है.
दिल्ली और उत्तर भारत में लू का प्रचंड प्रकोप
राजधानी दिल्ली समेत पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में गर्मी ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है. अगले 3-4 दिनों के दौरान इन राज्यों में भीषण लू चलने की चेतावनी दी गई है. उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में तापमान 40 से 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है. दिल्ली में 25 से 27 अप्रैल तक लू का असर सबसे ज्यादा रहेगा. हालांकि, 27 अप्रैल की शाम को हल्की बारिश और गरज-चमक के साथ मौसम में थोड़ा बदलाव आने की उम्मीद है, जिससे तापमान में मामूली गिरावट आ सकती है. लेकिन तब तक लोगों को तपती धूप और गर्म रातों का सामना करना पड़ेगा.
प्रमुख शहरों का तापमान
| शहर | अधिकतम तापमान | न्यूनतम तापमान |
| दिल्ली | 42°C | 22°C |
| मुंबई | 35°C | 25°C |
| चेन्नई | 38°C | 28°C |
| कोलकाता | 38°C | 28°C |
| लखनऊ | 42°C | 27°C |
| पटना | 42°C | 27°C |
| रांची | 39°C | 23°C |
| भोपाल | 42°C | 24°C |
| जयपुर | 39°C | 27°C |
| शिमला | 27°C | 17°C |
| नैनीताल | 27°C | 18°C |
उत्तर प्रदेश और बिहार में मौसम का मिजाज
उत्तर प्रदेश में गर्मी सारे रिकॉर्ड तोड़ रही है. राज्य के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों में 27 अप्रैल तक लू का रेड अलर्ट जारी किया गया है. यहां अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक जाने का अनुमान है. राहत की बात यह है कि 28 अप्रैल से मौसम थोड़ा नरम पड़ सकता है और कुछ इलाकों में हल्की बूंदाबांदी हो सकती है. वहीं बिहार की बात करें तो यहां अगले चार दिनों में मौसम के दो रूप दिखेंगे. शुरुआत में लू चलेगी, लेकिन 26 और 27 अप्रैल को पटना, गया और मुजफ्फरपुर जैसे शहरों में तेज आंधी और बारिश का अलर्ट है.
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पहाड़ों पर बारिश और बर्फबारी का पूर्वानुमान
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों में भी मौसम का मिजाज बदलने वाला है. उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में अभी गर्मी है, लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में 30 अप्रैल तक हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है. ऊंचे पहाड़ों पर गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं. हिमाचल प्रदेश में भी 25 अप्रैल से मौसम सक्रिय होगा. शिमला, मनाली और धर्मशाला जैसे पर्यटन स्थलों पर 28 से 30 अप्रैल के बीच अच्छी बारिश हो सकती है. इसके अलावा, ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की भी संभावना जताई गई है, जिससे वहां के तापमान में गिरावट आएगी और पर्यटकों को सुहावने मौसम का आनंद मिलेगा.
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नई सरकार बनते ही फिर से सुलगने लगा नेपाल, छात्र राजनीति पर रोक और आम जनता पर आर्थिक बोझ से बढ़ा आक्रोश
काठमांडू, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। नेपाल की राजनीति में हालिया घटनाक्रम ने नई सरकार को लेकर उत्साह के साथ-साथ अनिश्चितता भी बढ़ा दी है। केपी ओली सरकार के पतन के बाद हुए संसदीय चुनावों में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) की जीत के साथ बालेंद्र शाह के नेतृत्व में नई सरकार बनी, लेकिन गठन के कुछ ही समय के भीतर दो मंत्रियों के इस्तीफे ने स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि युवाओं के समर्थन से बनी यह सरकार क्या जनता की उम्मीदों पर खरी उतर पाएगी और देश की प्रमुख चुनौतियों का समाधान कर सकेगी या नहीं।
भारतीय समयानुसार 22 अप्रैल को नेपाल के नव नियुक्त गृह मंत्री सुदान गुरुंग ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले के आरोप में अपने पद से इस्तीफा दिया। इसके अलावा, श्रमिक मंत्री कुमार शाह को अनुशासनहीनता के आरोप में हटा दिया गया। सुदान गुरुंग को पद से हटाने को लेकर पार्टी की तरफ से भी आवाज उठने लगी, जिसके बाद पीएम बालेंद्र शाह के आदेश पर उन्होंने इस्तीफा दिया।
सितंबर 2025 में नेपाल में तत्कालीन केपी ओली सरकार के खिलाफ जेन-जी ने विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन सोशल मीडिया पर प्रतिबंध, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और महंगाई के खिलाफ शुरू हुआ था जो देखते ही देखते हिंसक हो गया और तत्कालीन सरकार को सत्ता से हटा दिया गया।
इसके बाद चुनाव के जरिए देश के युवाओं ने बालेंद्र शाह की सरकार को चुना। हालांकि सरकार के बनने के बाद से लेकर अब तक बालेंद्र शाह की सरकार ने कुछ ऐसे फैसले लिए हैं, जिसकी वजह से देश में राजनीतिक असंतोष पैदा हो गया है।
बालेंद्र शाह की सरकार ने हाल ही में नेपाल-भारत सीमा पर कस्टम ड्यूटी लगाने का ऐलान किया। इस फैसले का जमकर विरोध हो रहा है। भारत से नेपाल लाए जाने वाले 100 रुपए से अधिक के सामान पर यह कस्टम ड्यूटी लगाई जाएगी। बीते दिन कुछ तस्वीरें सामने आईं, जिसमें सीमा पार कर रहे लोगों के सामान की जांच हो रही थी।
बालेंद्र शाह सरकार के इस फैसले से जनता में भयंकर आक्रोश देखने को मिल रहा है। द संडे गार्डियन के अनुसार, यह विवाद केवल एक फैसले को लेकर नहीं हो रहा है, बल्कि आर्थिक फैसलों, गवर्नेंस की चिंताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों ने लोगों की नाराजगी को हवा दी है।
जेन-जी के पसंद की सरकार से लोगों की नाराजगी के पीछे एक और बड़ा कारण सरकार का राजनीतिक पार्टियों से जुड़े स्टूडेंट यूनियन को साइडलाइन करने या उन पर रोक लगाने का कदम भी माना जा रहा है। पीएम बालेंद्र शाह ने शपथ लेने के तुरंत बाद ही छात्र राजनीति पर पूरी तरह से रोक लगाने का फैसला सुना दिया। इस फैसले से यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में पढ़ रहे युवाओं में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। शाह सरकार के इस फैसले के विरोध में प्रदर्शन शुरू हो गए हैं, जिसमें हजारों युवा प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं।
छात्र नेताओं ने सरकार पर बातचीत करने के बजाय रोक लगाने वाला तरीका अपनाने का आरोप लगाया है। कई प्रदर्शनकारियों ने इस फैसले को वापस लेने और शैक्षणिक संस्थानों में स्टूडेंट रिप्रजेंटेशन की रक्षा करने की मांग की।
केपी ओली की सरकार के खिलाफ युवाओं ने बालेंद्र शाह का समर्थन इसलिए ही किया था, क्योंकि वह भ्रष्टाचार समेत उन मुद्दों पर बात कर रहे थे, जो देश के आम लोगों की समस्या है, हालांकि हाल के समय में जिस तरह से सरकार के फैसले सामने आए, उसने 35 साल के बालेंद्र शाह के नेतृत्व पर एक सवाल खड़ा कर दिया है।
खासतौर से अगर कस्टम ड्यूटी की बात करें तो नेपाल के सीमावर्ती इलाके में रहने वाले लोगों की राशन, घर का सामान, दवाई और कपड़ों समेत कई मूलभूत सामग्रियों के लिए निर्भरता भारतीय बाजार पर है। ऐसे में इस कस्टम ड्यूटी ने उनकी जेब पर बुरा असर डाला है।
हालात को देखते हुए सवाल फिर वही उठता है कि आखिर बालेंद्र शाह की सरकार लोगों की मुद्दों को समझकर उसका सही हल निकाल पाएगी या एक बार फिर से नेपाल में सितंबर 2025 की कहानी दोहराई जाएगी।
--आईएएनएस
केके/वीसी
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