मोटापा और बीमारियों की जड़ है अधिक तेल का सेवन, छोटी आदतों से पाएं बड़ा बदलाव
नई दिल्ली, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और अनियमित दिनचर्या में खानपान की गलत आदतें सेहत को बड़ा नुकसान पहुंचा रही हैं। ऐसे में भोजन में अधिक तेल का इस्तेमाल सेहत के संग खिलवाड़ जैसा है। यह शरीर के लिए बेहद हानिकारक साबित होता है। हेल्थ एक्सपर्ट का मानना है कि ज्यादा तेल का सेवन न केवल मोटापा, बल्कि और भी कई गंभीर बीमारियों को पैदा करने में अहम भूमिका निभाता है।
ऐसे में जरूरी है कि रोजमर्रा के भोजन में तेल की मात्रा को नियंत्रित किया जाए। इसके लिए नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) कुछ सुझाव भी देता है। एनएचएम के अनुसार, तेल का संतुलित इस्तेमाल स्वस्थ जीवन की कुंजी है। अगर हम अपने खाने में थोड़े बदलाव करें और कुछ आसान आदतों को अपनाएं, तो न केवल मोटापे से बच सकते हैं बल्कि हृदय रोग, डायबिटीज और अन्य समस्याओं के खतरे को भी कम कर सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि छोटी-छोटी सावधानियां लंबे समय में बड़े फायदे देती हैं।
तेल के उपयोग को सीमित करने के लिए सबसे आसान तरीका है कि इसे सीधे बर्तन में डालने के बजाय छोटी चम्मच का इस्तेमाल किया जाए। इससे अनजाने में ज्यादा तेल डालने की आदत पर नियंत्रण पाया जा सकता है। इसके अलावा तले हुए खाद्य पदार्थों का सेवन कम करना भी बेहद जरूरी है, क्योंकि इनमें कैलोरी की मात्रा अधिक होती है और ये वजन बढ़ाने का मुख्य कारण बनते हैं।
विशेषज्ञ भाप में पके, भुने हुए या ग्रिल्ड भोजन को प्राथमिकता देने की सलाह देते हैं। इस तरह के भोजन में तेल की मात्रा कम होती है और पोषक तत्व भी बेहतर तरीके से सुरक्षित रहते हैं। साथ ही घर पर खाना बनाते समय हल्के तेल का उपयोग और सही मात्रा का ध्यान रखना भी जरूरी है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मोटापा कई बीमारियों की जड़ है और इसका एक बड़ा कारण असंतुलित खानपान है। ऐसे में अगर समय रहते तेल के उपयोग पर नियंत्रण किया जाए, तो बेहतर स्वास्थ्य पाया जा सकता है।
--आईएएनएस
एमटी/वीसी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
चीनी ब्रांड वैश्विक ऑटो ब्रांड मूल्य रैंकिंग में सबसे आगे
बीजिंग, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। ब्रिटेन की विश्व जानी मानी ब्रांड मूल्यांकन एजेंसी ब्रांड फाइनेंस द्वारा गुरुवार को जारी वैश्विक ऑटो ब्रांड मूल्य टॉप 100 (वर्ष 2026) रिपोर्ट के अनुसार, चीन के कुल 24 ऑटो ब्रांड इस सूची में शामिल हुए हैं। यह चीनी ब्रांडों की लगातार सबसे अधिक संख्या है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक ऑटो उद्योग तेजी से नई ऊर्जा और बुद्धिमानी की ओर बढ़ रहा है। लागत नियंत्रण, व्यावहारिक विद्युतीकरण रणनीति और कीमत-संवेदनशील बाजार में प्रतिस्पर्धात्मकता ब्रांड मूल्य के मुख्य कारक बन गए हैं। बीवाईडी, गिली और सैक जैसी चीनी कंपनियां पूरी आपूर्ति श्रृंखला में तालमेल, तकनीकी सफलता और वैश्विक रणनीति के दम पर एशिया, यूरोप जैसे बाजारों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रही हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, जहां यूरोप की पारंपरिक ऑटो कंपनियों की चीनी बाजार में हिस्सेदारी लगातार घट रही है, वहीं यूरोपीय बाजार में चीनी ब्रांडों का राजस्व तेजी से बढ़ रहा है। ब्रांड फाइनेंस के सर्वेक्षण में पाया गया कि प्रौद्योगिकी, नवाचार, स्थिरता और कीमत-मूल्य जैसे प्रमुख मानकों पर चीनी ब्रांड कई पुराने यूरोपीय ब्रांडों से आगे निकल गए हैं।
ब्रांड फाइनेंस चीन के अध्यक्ष छन यीतंग के विचार में वैश्विक ऑटो उद्योग एक महत्वपूर्ण परिवर्तन दौर से गुजर रहा है। विद्युत वाहनों में अपनी बढ़त के चलते चीनी ब्रांडों ने विश्व बाजार में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी हासिल कर ली है। भविष्य में चीनी ऑटो कंपनियों को प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए प्रौद्योगिकी नवाचार, विशिष्ट ब्रांड विशेषताओं और बेहतर उपभोक्ता अनुभव पर ध्यान देना होगा।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
--आईएएनएस
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