Responsive Scrollable Menu

JPSC Student Protest: विधानसभा कूच कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज | Hemant Soren | Jairam Mahato

JPSC Student Protest: विधानसभा कूच कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज | Hemant Soren | Jairam Mahato #jpscprotest #studentprotest #live #jpsc #ranchiprotest #hemantsoren #breakingnews JPSC के तीन सदस्यों का इस्तीफा...डॉ. अजिता भट्टाचार्या ने दिया इस्तीफा...अनिमा हांसदा, जमाल अहमद का इस्तीफा....राज्यपाल ने तीनों का इस्तीफा किया स्वीकार..CID का समन मिलने के बाद इस्तीफा....JPSC गड़बड़ी की जाँच कर रही CID....चेयरमैन एल. ख्यांगते पहले दे चुके हैं इस्तीफा news18 up live, aaj ki taaza khabar, news18 up uttarakhand live, uttar pradesh news, kanwar yatra 2026, arvind kejriwal pm residence march, ram mandir donation controversy, income tax amendment bill 2026, uttar pradesh weather, sheikh hasina audio live briefing, meta algorithm scrutiny india, supreme court judges retirement age, social media ban for minors india, imd heavy rainfall alert, pakistan political unrest 2026, meerut kanwariya ground report news18 live | aaj ka taaja khabar | आज की ताजा खबर | up live news | news18 up live news | up news live | aaj ke taaja khabar | hindi hews | latest news | news in hindi | hindi samachar | hindi khabar | n18oc_uttar_pradesh Follow Every Breaking Story LIVE ???? Watch News18 LIVE 24x7: https://youtube.com/live/pVXYxHNwJo8 SUBSCRIBE to get the Latest News & Updates - http://bit.ly/News18UP News18 Mobile App - https://onelink.to/desc-youtube Follow Us on Social Media: Website: https://bit.ly/3auydBL Twitter: https://twitter.com/News18UP https://twitter.com/News18_UK Facebook: https://www.facebook.com/News18UP/ https://www.facebook.com/News18UK/ About Channel: News18 UP Uttarakhand is one of India's leading Hindi news channel and can be watched live on YouTube. News18 UP Uttarakhand news channel is a part of Network 18. Topics such as politics, education, health, environment, economy, business, sports, and entertainment are covered by this channel. The channel gives nationwide coverage. News18 UP Uttarakhand ,भारत का एक मात्र भरोसेमंद और लोकप्रिय न्यूज़ चैनल है। यह चैनल नेटवर्क १८ का हिस्सा है। यह चैनल उत्तरप्रदेश एवं उत्तराखंड के सभी क्षेत्रीय खबरों के साथ साथ सरकार, राजनीति, पर्यावरण , खेल-कूद से जुड़ी राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय खबरें प्रसारित करता है|

Continue reading on the app

Operation Safed Sagar में दिखी करगिल की असली कहानी, आसमान में छिड़ी जंग के पीछे छिपी थी एक बड़ी राजनीतिक सच्चाई

1999 का करगिल युद्ध सिर्फ पहाड़ों पर लड़ी गई एक जंग नहीं थी। यह एक ऐसा संघर्ष था, जिसमें भारतीय सैनिकों ने दुर्गम चोटियों पर मोर्चा संभाला, वायुसेना के पायलटों ने बेहद मुश्किल परिस्थितियों में उड़ान भरी और दूसरी तरफ कूटनीति से लेकर खुफिया जानकारी तक, कई मोर्चों पर लड़ाई चल रही थी। इसी दौर की कहानी अब नेटफ्लिक्स की ओटीटी सीरीज ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ में दिखाई गई है। सच्ची घटनाओं से प्रेरित यह सीरीज मुख्य रूप से करगिल युद्ध में भारतीय वायुसेना की भूमिका पर केंद्रित है। कहानी खास तौर पर गोल्डन एरोज स्क्वाड्रन और उन पायलटों के इर्द-गिर्द घूमती है, जिन्होंने 1999 की उस जंग में बेहद जोखिम भरे मिशन अंजाम दिए थे।

हालांकि सीरीज की कहानी का केंद्र पायलट और उनके हवाई मिशन हैं, लेकिन इसके पीछे की राजनीतिक कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। भारत-पाकिस्तान के बीच शांति की कोशिशों से लेकर करगिल में घुसपैठ, नवाज शरीफ को ऑपरेशन की कितनी जानकारी थी और पाकिस्तान की सेना की भूमिका सामने लाने वाले इंटरसेप्टेड फोन कॉल्स तक—सीरीज में दिखाई गई कई घटनाओं की जड़ें वास्तविक इतिहास में मिलती हैं।

शांति की कोशिशों के बीच शुरू हो चुकी थी करगिल की साजिश

1999 की शुरुआत में भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में कुछ सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहे थे। दोनों देश तनाव कम करने और बातचीत के जरिए आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे। इसी सिलसिले में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने फरवरी 1999 में लाहौर की ऐतिहासिक यात्रा की थी। वाजपेयी और पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने लाहौर घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर किए। माहौल ऐसा था कि दोनों देशों के बीच रिश्तों में एक नई शुरुआत की उम्मीद की जा रही थी। लेकिन इसी समय नियंत्रण रेखा यानी LoC के दूसरी तरफ कुछ और ही चल रहा था। पाकिस्तानी सैनिकों ने करगिल सेक्टर में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ऊंचाइयों पर कब्जा करना शुरू कर दिया था। इस ऑपरेशन की योजना पाकिस्तान सेना के तत्कालीन प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ के नेतृत्व में बनाई गई थी। शुरुआत में पाकिस्तान की तरफ से इन घुसपैठियों को कश्मीरी मुजाहिदीन के रूप में पेश करने की कोशिश की गई। भारत को जैसे-जैसे घुसपैठ की वास्तविक स्थिति और उसके बड़े पैमाने का पता चला, मामला तेजी से युद्ध में बदल गया। भारतीय सेना के साथ वायुसेना भी मैदान में उतरी और शुरू हुआ ऑपरेशन सफेद सागर—वह हवाई अभियान, जिसने करगिल की चोटियों को वापस हासिल करने की भारतीय कोशिश में बेहद अहम भूमिका निभाई।

इसे भी पढ़ें: अचानक भारत के वायुसेना प्रमुख पहुंचे Vietnam , Brahmos के दम से हिला चीन

गोल्डन एरोज और वो मिशन, जिनमें हर उड़ान जोखिम से भरी थी

भारतीय वायुसेना की नंबर 17 स्क्वाड्रन, गोल्डन एरोज, भी इस अभियान का हिस्सा थी। युद्ध के दौरान स्क्वाड्रन की कमान विंग कमांडर बी.एस. धनोआ के पास थी। ऊंचाई, मौसम और पहाड़ी भूगोल ने इन अभियानों को सामान्य हवाई ऑपरेशन से बिल्कुल अलग बना दिया था। पायलटों को दुश्मन के ठिकानों की पहचान करने से लेकर उन पर हमला करने तक, हर कदम बेहद सावधानी से उठाना पड़ता था। सीरीज में इन वास्तविक घटनाओं और मिशनों को काफी प्रमुखता दी गई है। स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा भी इसी वास्तविक कहानी का हिस्सा थे। सीरीज में उनका किरदार सिद्धार्थ ने निभाया है। लेकिन ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ की दिलचस्पी सिर्फ युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं रहती। कहानी बीच-बीच में उन राजनीतिक घटनाओं की तरफ भी लौटती है, जिनसे करगिल युद्ध की पृष्ठभूमि तैयार हुई थी।

वाजपेयी की लाहौर बस यात्रा इतिहास की सच्ची घटना

सीरीज में दिखाई गई अटल बिहारी वाजपेयी की मशहूर बस यात्रा किसी फिल्मी कल्पना का हिस्सा नहीं है। यह वास्तव में हुई थी। भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते सुधारने के प्रयासों के तहत दिल्ली-लाहौर बस सेवा शुरू करने की तैयारी चल रही थी। शुरुआत में उम्मीद थी कि वाजपेयी भारत की तरफ से इस बस सेवा को हरी झंडी दिखाएंगे। लेकिन नवाज शरीफ ने उन्हें खुद लाहौर आने का न्योता दिया। वाजपेयी ने निमंत्रण स्वीकार किया और फरवरी 1999 में खुद उस पहली बस यात्रा का हिस्सा बने। यह यात्रा महज एक परिवहन सेवा की शुरुआत नहीं रही, बल्कि दोनों देशों के बीच शांति और दोस्ती की एक बड़ी राजनीतिक पहल बन गई। विडंबना यह रही कि इस यात्रा के कुछ ही महीनों बाद करगिल में पाकिस्तान की घुसपैठ ने दोनों देशों के बीच बने इस भरोसे को बुरी तरह तोड़ दिया।

जब मुशर्रफ ने वाजपेयी का स्वागत नहीं किया

सीरीज में एक और राजनीतिक दृश्य खासा ध्यान खींचता है—वाजपेयी की लाहौर यात्रा के दौरान उनका स्वागत। वाजपेयी जब फरवरी 1999 में पाकिस्तान पहुंचे थे, तब पाकिस्तान के तीनों सेनाध्यक्ष, जिनमें तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ भी शामिल थे, वाघा सीमा पर उनका स्वागत करने नहीं पहुंचे। उस समय इसे प्रोटोकॉल के लिहाज से असामान्य और एक तरह की नाराजगी के संकेत के तौर पर देखा गया था। सीरीज इस घटना को और भी बारीकी से दिखाती है। इसमें मुशर्रफ वाजपेयी से हाथ मिलाते हैं, लेकिन औपचारिक सैन्य सलामी नहीं देते। यह छोटा-सा दृश्य उस समय दोनों देशों के राजनीतिक नेतृत्व और सैन्य प्रतिष्ठान के बीच मौजूद अंतर को समझने की कोशिश करता है। ऊपर से दोनों देशों के प्रधानमंत्री शांति की बातें कर रहे थे, लेकिन पर्दे के पीछे हालात तेजी से बदल रहे थे।

इसे भी पढ़ें: Pokhran में वायुसेना का 'रोटर क्लैप-तृतीय' अभ्यास संपन्न, ड्रोन रोधी क्षमता का परीक्षण

क्या नवाज शरीफ को करगिल ऑपरेशन की पूरी जानकारी थी?

करगिल युद्ध को लेकर सबसे ज्यादा बहस जिन सवालों पर हुई, उनमें से एक यही है—क्या पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को सेना की करगिल योजना की पूरी जानकारी थी? ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ इस सवाल पर एक स्पष्ट तस्वीर पेश करता है। सीरीज में दिखाया गया है कि मुशर्रफ ने नवाज शरीफ को ऑपरेशन की पूरी जानकारी से काफी हद तक दूर रखा और जब तक घुसपैठ सामने नहीं आ गई, तब तक प्रधानमंत्री को इसकी वास्तविक स्थिति का पूरा अंदाजा नहीं था। हालांकि वास्तविक इतिहास में इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के दावे अलग रहे हैं। नवाज शरीफ बाद में कहते रहे कि उन्हें ऑपरेशन के वास्तविक पैमाने और उसकी पूरी योजना की जानकारी नहीं थी। वहीं मुशर्रफ का दावा इसके बिल्कुल उलट था। उनका कहना था कि शरीफ को ऑपरेशन के बारे में जानकारी दी गई थी।

2006 में पाकिस्तान के बिजनेस प्लस चैनल को दिए एक इंटरव्यू में मुशर्रफ ने कुछ तस्वीरों का हवाला देते हुए अपने दावे को सही ठहराने की कोशिश की थी। उन्होंने बताया था कि शरीफ ने 5 फरवरी 1999 को केल सेक्टर का दौरा किया था। मुशर्रफ के मुताबिक, उस दौरान वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने प्रधानमंत्री को स्थिति की जानकारी दी थी और शरीफ ने वहां मौजूद सैनिकों को संबोधित भी किया था। यानी मुशर्रफ के मुताबिक, शरीफ को वाजपेयी की लाहौर यात्रा से पहले ही ऑपरेशन की जानकारी थी। सीरीज ने इस पूरे विवाद को काफी दिलचस्प तरीके से पर्दे पर उतारा है। इसमें नवाज शरीफ का किरदार विनय पाठक और मुशर्रफ का किरदार मनु ऋषि चड्ढा निभाते हैं। दोनों के बीच मुलाकात के दौरान एक तस्वीर खिंचती है। इसके तुरंत बाद स्क्रीन पर 1999 की वास्तविक तस्वीर दिखाई जाती है। फिक्शन और असली तस्वीर के इस मेल से सीरीज का यह हिस्सा खासा प्रभाव छोड़ता है।

इसे भी पढ़ें: IAF Agniveervayu भर्ती: वायुसेना में 10वीं पास के लिए Non-Combatant पदों पर मौका, जानें Eligibility Criteria

मुशर्रफ और अजीज खान की बातचीत ने पाकिस्तान के दावे की पोल खोल दी

करगिल युद्ध के दौरान एक और घटनाक्रम ऐसा था, जिसने पूरी कहानी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदलने में अहम भूमिका निभाई। मई 1999 में जनरल परवेज मुशर्रफ चीन के बीजिंग दौरे पर थे। इसी दौरान उनकी पाकिस्तान के चीफ ऑफ जनरल स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद अजीज खान से फोन पर बातचीत होती रही। उस समय दोनों के बीच बातचीत एक असुरक्षित फोन लाइन पर हुई थी। भारत की रिसर्च एंड एनालिसिस विंग यानी रॉ (R&AW) ने इन बातचीत को इंटरसेप्ट किया। बाद में सरकार की ओर से इन बातचीत के कुछ हिस्से सार्वजनिक किए गए। इन रिकॉर्डिंग्स ने भारत के उस दावे को मजबूती दी कि करगिल में सिर्फ कश्मीरी लड़ाके नहीं, बल्कि पाकिस्तान की नियमित सेना भी सीधे तौर पर शामिल थी। यही हिस्सा पाकिस्तान के लिए खास तौर पर मुश्किल साबित हुआ। उस समय पाकिस्तान लगातार यह दावा कर रहा था कि करगिल में लड़ाई कश्मीरी मुजाहिदीन लड़ रहे हैं और पाकिस्तानी सेना का इसमें सीधा हाथ नहीं है। लेकिन इंटरसेप्टेड बातचीत से सामने आई जानकारी इस दावे से मेल नहीं खाती थी।

सीरीज में इस पूरे घटनाक्रम को बेहद नाटकीय अंदाज में दिखाया गया है। फोन पर होने वाली बातचीत और उसे भारतीय खुफिया एजेंसियों द्वारा पकड़ने का सिलसिला कहानी को एक अलग ही मोड़ देता है। जैसे-जैसे बातचीत सामने आती है, पाकिस्तान की ओर से पेश की जा रही ‘मुजाहिदीन’ वाली कहानी कमजोर पड़ती दिखाई देती है।‘ऑपरेशन सफेद सागर’ सिर्फ हवाई जंग की कहानी नहीं - यही वजह है कि ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ को सिर्फ करगिल युद्ध में वायुसेना के मिशनों की कहानी मानना थोड़ा अधूरा होगा। सीरीज एक तरफ उन पायलटों के साहस और मुश्किल हालात में किए गए अभियानों को सामने लाती है, तो दूसरी तरफ उस दौर की राजनीति और सैन्य रणनीति की परतें भी खोलती है। एक तरफ लाहौर में शांति और दोस्ती की तस्वीर थी, तो दूसरी तरफ LoC के पार युद्ध की तैयारी चल रही थी। एक तरफ दोनों देशों के नेता भरोसे और बातचीत की बात कर रहे थे, वहीं सैन्य स्तर पर ऐसी योजना आकार ले चुकी थी, जिसने कुछ ही महीनों में दोनों देशों को युद्ध के मैदान में ला खड़ा किया।

करगिल की कहानी इसलिए भी अलग है क्योंकि इसमें सिर्फ बंदूकें और मिसाइलें नहीं थीं। इसमें राजनीति थी, खुफिया जानकारी थी, कूटनीति थी और सबसे बढ़कर उन सैनिकों और पायलटों की कहानी थी, जिन्हें बेहद कठिन परिस्थितियों में देश की लड़ाई लड़नी थी। ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ इसी बड़े घटनाक्रम को पर्दे पर लाने की कोशिश करता है—जहां आसमान में उड़ते लड़ाकू विमान सिर्फ एक युद्ध नहीं लड़ रहे थे, बल्कि जमीन पर चल रही एक कहीं बड़ी कहानी का हिस्सा थे।

Continue reading on the app

  Sports

विराट कोहली ने इन देशों के खिलाफ लगाए हैं सबसे ज्यादा शतक, किस नंबर पर पाकिस्तान?

virat kohli centuries: इंटरनेशनल क्रिकेट में दूसरे सबसे ज्यादा शतकों की बात होती है तो दिग्गज भारतीय बल्लेबाज विराट कोहली दूसरे नंबर पर आए हैं. सचिन तेंदुलकर के 100 इंटरनेशनल शतकों के बाद विराट कोहली ने अब तक तीनों फॉर्मेट में 85 सेंचुरी बनाई हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि उन्होंने किस देश के खिलाफ सबसे ज्यादा बार सैकड़ा जमाने का कारनामा किया है. इस मामले में पाकिस्तान किस नंबर पर है? आइए जानते हैं... Wed, 12 Aug 2026 07:30:58 +0530

  Videos
See all

Well Viral Video : अचानक कुएं में उठीं लहरें | Viral News | Gujarat News | #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-12T02:15:28+00:00

बिना हमलों के भी परेशान हैं ईरानी शहर याज्द के लोग [Iran’s tourism industry hit hard by war impact] #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-12T02:15:24+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers