Responsive Scrollable Menu

केरल में 58 खाद्य नमूनों में कीटनाशक के अवशेष मिले: मंत्री सिद्दीकी

केरल में 58 खाद्य नमूनों में कीटनाशक के अवशेष मिले: मंत्री सिद्दीकी

Continue reading on the app

डाबर ने FSSAI पर भेदभाव का आरोप लगाया:कहा- कॉम्पिटिटर्स को फायदा पहुंचा रही; बैन से ₹150 करोड़ के माल पर संकट था

एफएमसीजी कंपनी डाबर ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कंपनी ने FSSAI पर भेदभाव करने का आरोप लगाया है। इसके अलावा कंपनी ने FSSAI पर कॉम्पिटिटर्स में शामिल अन्य मैन्युफैक्चरर्स के कॉमर्शियल हितों को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया। डाबर का दावा है कि प्रोडक्ट्स पर 100% दावे के इस्तेमाल को तुरंत बैन करने के आदेश से उसकी 150 करोड़ रुपए की वैल्यू की इन्वेंट्री यानी माल नष्ट होने के जोखिम में आ गया था। 6 अगस्त को दिल्ली हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका में डाबर ने FSSAI के इस आदेश को बिना सोच-समझकर जारी किया गया और एकतरफा बताया है। हाईकोर्ट ने FSSAI के आदेश पर 24 अगस्त तक स्टे लगाया याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कंपनी को राहत देते हुए FSSAI के आदेश पर 24 अगस्त तक स्टे लगा दिया। कोर्ट ने माना कि ऐसा कोई भी निर्देश जारी करने से पहले कंपनी को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाना चाहिए था। क्या है पूरा विवाद: 100% क्लेम पर बैन और FSSAI की कार्रवाई फूड रेगुलेटर FSSAI ने प्रोसेस्ड फूड प्रॉडक्ट्स के विज्ञापनों और लेबल्स पर 100% प्योर, 100% नेचुरल या 100% ऑर्गेनिक जैसे दावों को भ्रामक माना है। FSSAI के अनुसार, इस तरह के दावे फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (एडवर्टाइजिंग एंड क्लेम्स) रेगुलेशन, 2018 का उल्लंघन करते हैं। FSSAI ने तुरंत प्रभाव से 100% क्लेम वाले प्रॉडक्ट्स की बिक्री पर रोक लगा दी थी और डाबर से 15 दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) मांगी थी। FSSAI का तर्क है कि ऐसे शब्दों के इस्तेमाल से अन्य कंपनियों के प्रोडक्ट्स की छवि प्रभावित होती है। डाबर का तर्क: अन्य मैन्युफैक्चरर्स के बिजनेस इंटरेस्ट को बढ़ावा दे रहा FSSAI डाबर ने अपनी रिट याचिका में FSSAI के आरोपों को खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि 100% क्लेम बिना किसी दूसरे मैन्युफैक्चरर का रेफरेंस दिए स्वतंत्र रूप से इस्तेमाल किया जाता है। यह पूरी इंडस्ट्री में सामान्य रूप से इस्तेमाल होने वाला शब्द है। कंपनी के अनुसार, यह स्पष्ट है कि यह बैन जनहित में जारी नहीं किया गया है, बल्कि अन्य मैन्युफैक्चरर के कॉमर्शियल हितों को साधने के लिए जारी किया गया। डाबर ने दावा किया कि FSSAI ने बिना किसी कारण बताओ नोटिस या सुधार का अवसर दिए ही सीधे बैन लगा दिया। ₹150 करोड़ का स्टॉक दांव पर, 11 फ्लैगशिप प्रोडक्ट्स प्रभावित FSSAI की इस कार्रवाई से डाबर के 11 प्रमुख फ्लैगशिप प्रोडक्ट्स सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। इनमें डाबर हनी, डाबर वर्जिन कोकोनट ऑयल और रियल एक्टिव कोकोनट वॉटर जैसे बड़े ब्रांड्स शामिल हैं। डाबर का आरोप है कि FSSAI ने लेबल्स की जांच किए बिना आदेश जारी किया है। कंपनी के अनुसार, डाबर होममेड कोकोनट मिल्क और डाबर कोल्ड प्रेस्ड सेसम ऑयल के लेबल पर कभी 100% का दावा लिखा ही नहीं गया था, फिर भी उन्हें बैन की लिस्ट में शामिल किया। इससे कंपनी की ₹150 करोड़ की इन्वेंट्री बर्बाद होने की कगार पर है। क्विक-कॉमर्स और होटलों से सप्लाई चेन पर असर FSSAI के इस आदेश को सोशल मीडिया पर सार्वजनिक किए जाने के बाद डाबर की रिटेल सप्लाई चेन अचानक प्रभावित हो गई। कई रिटेल और ऑनलाइन चैनल्स को कंपनी के 100% क्लेम वाले प्रॉडक्ट्स न बेचने की सलाह दी गई। 4 अगस्त को जोमैटो के क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ब्लिंकिट ने डाबर को अल्टीमेटम जारी करते हुए उसके प्रोडक्ट्स की लिस्टिंग को तुरंत डिसेबल कर दिया। ब्लिंकिट ने ईमेल में स्पष्ट किया कि इस मामले से पैदा होने वाली किसी भी कानूनी या वित्तीय देनदारी के लिए वह जिम्मेदार नहीं होगा। वहीं हॉस्पिटैलिटी ब्रांड हिल्टन होटल्स ने भी विवाद सुलझने तक प्रभावित प्रोडक्ट्स को अपनी सप्लाई से बाहर करने का प्रस्ताव रखा। कंपनी पहले ही कर रही थी लेबल्स में बदलाव डाबर ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वह FSSAI के लेटर में बताए गए प्रोडक्ट्स के लेबल्स से 100% क्लेम हटाने की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर चुकी थी। कंपनी के पिछले हफ्ते जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, आदेश में मेंशन ज्यादातर प्रोडक्ट्स के लेबल्स, विज्ञापनों और वेबसाइट रेफरेंस को बिना 100% क्लेम वाले नए लेबल्स में बदल दिया गया है या बदलने की फाइनल प्रोसेस में हैं। FSSAI का बड़ा क्रैकडाउन और आगे का रास्ता FSSAI कुछ दिनों से एफएमसीजी कंपनियों के भ्रामक विज्ञापनों, आर्टिफिशियल इंग्रीडिएंट्स के इस्तेमाल और हाइजीन से जुड़े मामलों पर सख्त कार्रवाई कर रहा है। रेगुलेटर ने प्रोसेस्ड फूड्स पर बिना किसी सॉलिड वेरिफिकेशन के इस्तेमाल किए जाने वाले मार्केटिंग शब्दों पर रोक लगाई है। फिलहाल FSSAI ने इस कानूनी मामले और डाबर के आरोपों पर तुरंत कोई आधिकारिक जवाब या प्रतिक्रिया जारी नहीं की है। दिल्ली हाईकोर्ट की दी गई 24 अगस्त तक की राहत के बाद अब सभी की निगाहें अगली अदालती सुनवाई पर टिकी हैं। नॉलेज पार्ट: जानें क्या कहता है FSSAI का 'क्लेम्स रेगुलेशन'? शो-कॉज नोटिस अनिवार्य: खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुसार, अगर FSSAI को किसी प्रोडक्ट के विज्ञापन या क्लेम पर आपत्ति होती है, तो पहले फूड बिजनेस ऑपरेटर (FBO) को स्पष्टीकरण देने के लिए नोटिस देना होता है। सिंगल बनाम मल्टी-इन्ग्रीडिएंट: FSSAI का मानना है कि प्रोसेस्ड या मल्टी-इन्ग्रीडिएंट फूड में '100% Pure' लिखना गलत है, जबकि कंपनियां तर्क देती हैं कि शहद या शुद्ध नारियल पानी जैसे प्राकृतिक प्रोडक्ट्स में यह दावा जायज है। ये खबर भी पढ़ें… डाबर के '100% प्योर' दावे वाले प्रोडक्ट्स पर बैन टला: FSSAI के बिक्री रोकने वाले आदेश पर हाईकोर्ट का स्टे; डाबर हनी-घी बिकते रहेंगे दिल्ली हाईकोर्ट ने डाबर को अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने FSSAI के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें '100% प्योर', '100% नेचुरल' और '100% ऑर्गेनिक' जैसे दावों वाले उत्पादों की बिक्री तुरंत रोकने को कहा था। जस्टिस अमित महाजन की बेंच ने केंद्र और FSSAI को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जब तक मामले में अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक FSSAI का बैन ऑर्डर सस्पेंड रहेगा। पूरी खबर पढ़ें…

Continue reading on the app

  Sports

IND vs SL: ‘गॉल के ग्लैडिएटर’…श्रीलंका के ये 2 खिलाड़ी, जिनसे निपट गई टीम इंडिया तो जीत पक्की

टीम इंडिया 9 साल के बाद श्रीलंका में टेस्ट मैच खेलने जा रही है और उसकी शुरुआत ही गॉल ग्राउंड से होगी, जो अपने आप में एक चुनौती है. मगर इस चुनौती को ये 2 खिलाड़ी और भी ज्यादा मुश्किल बनाते हैं. Tue, 11 Aug 2026 01:38:37 +0530

  Videos
See all

Iran America War Update: ईरान का अमेरिका पर बड़ा हमला! मचा हड़कंप, Trump को खुली चुनौती! Iran vs USA #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-10T20:30:21+00:00

PM Andy Burnham brings forward ban on 'subscription traps' to ease cost of living. #BBCNews #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-10T20:15:11+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers