Rajasthan Weather: 25 अप्रैल से फिर बदलेगा मौसम, सक्रिय हो रहा नया सिस्टम, आंधी और बारिश के आसार
राजस्थान में दिनों दिन पारे में उछाल देखने को मिल रहा है। प्रदेश के 10 से ज्यादा जिलों में दिन का तापमान 40 डिग्री से पार दर्ज किया जा रहा है। गुरुवार (23 अप्रैल 2026) को श्रीगंगानगर में तापमान 44.5 डिग्री पहुंच गया। शुक्रवार को 5 जिलों में लू का अलर्ट जारी किया है। हालांकि 25-26 अप्रैल से गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है।
मौसम विभाग ने पश्चिमी विक्षोभ के असर से 25 से 28 अप्रैल तक बादल बारिश की स्थिति बनी रहने की संभावना जताई है। इसका असर बीकानेर, जयपुर, भरतपुर, जोधपुर और अजमेर संभाग में बना रहेगा। हालांकि आगामी दिनों में अधिकतम तापमान में औ 1-2 डिग्री सेल्सियस बढ़ोतरी होने तथा आगामी 3-4 दिन पश्चिमी व उत्तर-पूर्वी भागों में कहीं-कहीं हीटवे चलने की संभावना है। इस दौरान राज्य के उत्तर पश्चिमी भागों में कहीं-कहीं अधिकतम तापमान 44 से 45 डिग्री पहुंचने का अनुमान है।
भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान के चलते जयपुर, कोटा, चित्तौड़गढ़, जैसलमेर और दौसा में स्कूलों का समय बदला दिया गया है। कोटा में 24 अप्रैल से कक्षा 12वीं का समय सुबह 7.30 से दोपहर 12.30 बजे तक और दौसा में 2 मई तक कक्षा 8वीं तक का समय सुबह 7.30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक कर दिया गया है। जैसलमेर और चित्तौड़गढ़ में कक्षा 8वीं का सुबह 7:30 से 12:00 बजे तक किया गया है।
मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के मुताबिक, आगामी दिनों में एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से 25 अप्रैल को पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों में दोपहर बाद मेघगर्जन के साथ कहीं धूलभरी आंधी व हल्की बूंदाबांदी/हल्की बारिश होने की संभावना है। वहीं 26 से 28 अप्रैल को पश्चिमी व उत्तरी भागों में भी मेघगर्जन, धूलभरी आंधी व हल्की बारिश होने की संभावना जताई गई है।
मिथॉस AI से बैंकिंग सिस्टम पर साइबर हमले का खतरा:वित्त मंत्री सीतारमण ने हाई-लेवल मीटिंग की; क्या है मिथॉस और यह क्यों खतरनाक
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को बैंकों के प्रमुखों के साथ एक हाई-लेवल मीटिंग की। इस बैठक में एंथ्रोपिक के 'क्लॉड मिथॉस' AI मॉडल से बैंकिंग सेक्टर को होने वाले संभावित खतरों पर चर्चा की गई। यह एआई मॉडल इतना एडवांस है कि हैकर इसका इस्तेमाल दशकों पुरानी अज्ञात खामियों को खोजकर फाइनेंशियल सेक्टर पर साइबर हमले कर सकते हैं। बैंकों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश वित्त मंत्री ने बैंकों को अपने IT सिस्टम को सुरक्षित करने और कस्टमर डेटा की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। वित्त मंत्रालय ने कहा कि मिथॉस से पैदा होने वाला खतरा ऐसा है, जो पहले कभी नहीं देखा गया। इसके लिए वित्तीय संस्थानों और बैंकों के बीच बेहतर तालमेल और हाई लेवल की तैयारी की जरूरत है। खतरे से निपटने के लिए भारत का प्लान वित्त मंत्रालय अब एक ऐसा फ्रेमवर्क बनाने की योजना बना रहा है जो हैकिंग के प्रयासों की पहचान कर उन पर तुरंत कार्रवाई कर सके। बैंकों को सलाह दी गई है कि वे साइबर हमले की जानकारी आपस में साझा करने के लिए एक रियल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग मैकेनिज्म बनाएं। इसमें इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (CERT-In) और अन्य एजेंसियां भी शामिल होंगी। क्या है क्लॉड मिथॉस और यह क्यों खतरनाक है? मिथॉस एंथ्रोपिक का सबसे शक्तिशाली AI मॉडल है। कंपनी के मुताबिक मिथॉस ने ऑपरेटिंग सिस्टम और ब्राउजर्स की दशकों पुरानी कमियां ढूंढ निकाली हैं, जिन्हें इंसान नहीं देख पाए। एंथ्रोपिक का कहना है कि इसे सार्वजनिक करना किसी के भी हाथ में एडवांस हैकिंग टूल देने जैसा होगा। एंथ्रोपिक ने इसका एक्सेस सिर्फ अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी चुनिंदा 40 कंपनियों को दिया है। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ अनधिकृत यूजर्स ने इसका एक्सेस हासिल कर लिया है। इससे डर है कि वे सिस्टम की सुरक्षा खामियों का फायदा उठा सकते हैं। एंथ्रोपिक ने कहा कि अगर इसे बिना किसी नियंत्रण के रिलीज किया गया, तो अर्थव्यवस्था, सार्वजनिक सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए इसके नतीजे बहुत बुरे हो सकते हैं। डिजिटल जेल तोड़कर खुद बाहर निकला AI इस मॉडल के रोलआउट से पहले एक घटना भी सामने आई थी जो बताती है कि ये कितना एडवांस है। 'मिथॉस' की एक सुरक्षित 'सैंडबॉक्स' में टेस्टिंग हो रही थी ताकि वह इंटरनेट का इस्तेमाल न कर सके। सैंडबॉक्स को एक तरह की डिजिटल जेल कह सकते है। लेकिन इस एआई ने सुरक्षा घेरे को तोड़कर खुद ही रास्ता बना लिया। इसका पता तब चला जब इस पर काम करने वाले एक रिसर्चर को अचानव उसी एआई मॉडल का भेजा हुआ एक ईमेल मिला। एआई का इस तरह अपनी मर्जी से बाहर निकलना बेहद खतरनाक है। अमेरिका में भी मिथॉस को लेकर हाई-लेवल मीटिंग केवल भारत ही नहीं, बल्कि अमेरिका में भी इस मुद्दे पर मीटिंग्स हो रही है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेन्ट और फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने हाल ही में बैंक के बड़े अधिकारियों के साथ एक क्लोज-डोर मीटिंग की थी। इसमें उन्होंने बैंक अधिकारियों से कहा था कि वे अपने सिस्टम को मिथॉस से पैदा होने वाले संभावित खतरों के लिए तैयार रखें।
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