यूएन के अधिकारी ने सिबी जॉर्ज से की मुलाकात, आतंकवाद के खिलाफ भारत के प्रयासों की सराहना की
न्यूयॉर्क, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत के विदेश सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात के बाद संयुक्त राष्ट्र आतंकवाद-विरोधी कार्यालय (यूएनओसीटी) के कार्यवाहक अवर महासचिव एलेक्जेंडर जौएव से मुलाकात की। विदेश मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी।
दोनों नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत और यूएनओसीटी के बीच सहयोग पर चर्चा हुई। विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुलाकात की तस्वीरें साझा कर लिखा, सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने काउंटर-टेररिज्म के कार्यवाहक अवर महासचिव एलेक्जेंडर जौएव से मुलाकात की और आतंकवाद के खतरे से निपटने में यूएनओसीटी के साथ भारत के मजबूत सहयोग पर चर्चा की।
बैठक के दौरान, कार्यवाहक अवर महासचिव जौएव ने ग्लोबल काउंटर-टेररिज्म कोशिशों में भारत के लंबे समय से चले आ रहे योगदान की सराहना की, जिसमें यूएनओसीटी और कैपेसिटी-बिल्डिंग पहलों के लिए उसका समर्थन शामिल है।
दोनों पक्षों ने 26 जून से 2 जुलाई 2026 तक होने वाले काउंटर-टेररिज्म इवेंट के लिए सहयोग और तैयारियों को बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।
यूएनओसीटी ने एक्स पर लिखा, सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज के साथ, यूएनओसीटी के कार्यवाहक यूएसजी जौएव ने काउंटर-टेररिज्म वीक के लिए सहयोग और तैयारियों को मजबूत करने पर चर्चा की। उन्होंने ग्लोबल काउंटर-टेररिज्म कोशिशों में भारत की लंबे समय से चली आ रही भूमिका के लिए धन्यवाद दिया, जिसमें यूएनओसीटी और कैपेसिटी-बिल्डिंग प्रोग्राम्स को समर्थन शामिल है।
इसके अलावा सचिव (पश्चिम) ने उरुग्वे की स्थायी प्रतिनिधि और जी-77 की चेयरपर्सन लॉरा डुपुई लासेरे से भी मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने दक्षिण-दक्षिण सहयोग को और मजबूत करने की कोशिशों और जरूरतों पर चर्चा की।
यूएन में भारत के एक्स हैंडल पर जानकारी दी गई, सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने उरुग्वे की परमानेंट रिप्रेजेंटेटिव और जी-77 की चेयरपर्सन लॉरा डुपुई लासेरे से मुलाकात की और साउथ-साउथ सहयोग को मजबूत करने की कोशिशों और आर्थिक और विकास संबंधित चुनौतियों पर यूएन में ग्लोबल साउथ की एक कॉमन आवाज की जरूरत पर चर्चा की।
भारत के स्थायी मिशन ने कहा कि उन्होंने भारत-यूएन डेवलपमेंट पार्टनरशिप फंड जैसे प्रोग्राम के जरिए ग्लोबल साउथ के डेवलपमेंट को बढ़ाने के लिए नई दिल्ली की कोशिशों पर भी चर्चा की। इस हफ्ते यहां अपने बहुत व्यस्त दौरे के दौरान, जो यूएन कॉम्प्लेक्स में महात्मा गांधी की मूर्ति को श्रद्धांजलि देने के साथ शुरू हुआ, जॉर्ज ने कई यूएन अधिकारियों और कई देशों के डिप्लोमेट से मुलाकात की।
भारत ऐतिहासिक रूप से यूएन के पीसकीपिंग ऑपरेशन में सबसे बड़ा योगदान देने वाला देश है। भारत कई अधिकारियों के साथ उनकी कई बातचीत में शामिल रहा है, जिसमें ऑपरेशनल समर्थन के अंडर-सेक्रेटरी-जनरल अतुल खरे और राजनीतिक और शांति स्थापित करने के मामलों और शांति सहयोग विभाग में असिस्टेंट सेक्रेटरी-जनरल खालिद खियारी शामिल हैं। खरे के साथ, उन्होंने पीसकीपिंग ऑपरेशन के लिए भारत की पक्की प्रतिबद्धता को दोहराया।
--आईएएनएस
केके/पीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
बीआरओ के प्रोजेक्ट दंतक ने मनाया 66वां स्थापना दिवस, भारत-भूटान मैत्री को मिला नया आयाम
थिम्फू, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। भूटान की राजधानी थिम्पू में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की दंतक परियोजना ने 24 अप्रैल को अपना 66वां स्थापना दिवस मनाया। यह अवसर भारत और भूटान के बीच दशकों से चली आ रही मजबूत और भरोसेमंद साझेदारी का प्रतीक बना, जिसने दोनों देशों के बीच विकास व सहयोग के रिश्तों को और अधिक सुदृढ़ किया।
प्रोजेक्ट दंतक की स्थापना 24 अप्रैल 1961 को हुई थी और तब से यह भूटान के बुनियादी ढांचे के विकास में अहम भूमिका निभा रही है। शुरुआती वर्षों में इस परियोजना ने भूटान की पहली मोटर योग्य सड़क के निर्माण के साथ देश में आधुनिक परिवहन व्यवस्था की नींव रखी। समय के साथ यह परियोजना भूटान के सामाजिक और आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण आधार बन गई और आज इसे देश की कनेक्टिविटी रीढ़ माना जाता है।
पिछले छह दशकों से अधिक समय में प्रोजेक्ट दंतक ने भूटान में व्यापक सड़क नेटवर्क विकसित किया है। 1500 किलोमीटर से अधिक सड़कों के निर्माण के साथ-साथ इसने पूर्व-पश्चिम राजमार्ग जैसी रणनीतिक परियोजनाओं को आकार दिया है, जो देश के दूरदराज़ क्षेत्रों को राजधानी थिम्पू से जोड़ती हैं। इसके अलावा फुएंत्शोलिंग-थिम्पू हाईवे, पारो अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और योंगफुला एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड जैसे महत्वपूर्ण ढांचों के निर्माण में भी इसकी अहम भूमिका रही है, जिससे भूटान की कनेक्टिविटी और पर्यटन क्षेत्र को नई गति मिली है।
सड़क निर्माण के अलावा परियोजना दंतक ने भूटान में जलविद्युत परियोजनाओं, पुलों, दूरसंचार नेटवर्क, अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इन प्रयासों ने न केवल देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया है, बल्कि स्थानीय लोगों के जीवन स्तर को सुधारने में भी बड़ी भूमिका निभाई है।
हाल के वर्षों में इस परियोजना ने आधुनिकीकरण और तकनीकी उन्नयन पर विशेष ध्यान दिया है। कॉन्फ्लुएंस-हा सड़क खंड के दोहरीकरण और लगभग 168 किलोमीटर लंबे समद्रुप जोंगखार-त्राशिगांग हाईवे के उन्नयन जैसे कार्यों ने यात्रा समय को कम करने, सुरक्षा बढ़ाने और क्षेत्रीय संपर्क को बेहतर बनाने में मदद की है। इसके साथ ही भूस्खलन और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान तेजी से सड़कों की बहाली कर इस परियोजना ने अपनी कार्यक्षमता और तत्परता भी साबित की है।
वर्तमान में भी प्रोजेक्ट दंतक भूटान के विभिन्न क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों में लगी हुई है, जिनमें सड़क विस्तार, पुल निर्माण और वैकल्पिक मार्गों का विकास शामिल है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य देश में हर मौसम में सुचारू और सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करना है, साथ ही भूटान की पर्यावरणीय संवेदनशीलता का भी ध्यान रखना है।
स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों में अधिकारियों, कर्मियों और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी रही। इस दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मियों को सम्मानित किया गया और सेवा के दौरान शहीद हुए कर्मियों को श्रद्धांजलि भी दी गई। एक अंतर-विद्यालयीय प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया, जिसने युवाओं में जागरुकता और सहभागिता को प्रोत्साहित किया। 65 वर्षों की इस लंबी यात्रा के साथ प्रोजेक्ट दंतक आज केवल एक इंजीनियरिंग परियोजना नहीं बल्कि भारत और भूटान के बीच गहरे विश्वास, मित्रता और सहयोग का जीवंत प्रतीक बन चुकी है। इसने न केवल सड़कों और पुलों का निर्माण किया है बल्कि दोनों देशों के बीच विकास और सद्भावना के मजबूत सेतु भी तैयार किए हैं।
स्थापना दिवस समारोह के उपलक्ष्य में कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जो पेशेवर उत्कृष्टता और सामुदायिक सहभागिता दोनों को दर्शाते हैं। इनमें 14 अप्रैल 2026 को थिम्पू में आयोजित एक अंतर-विद्यालयीय प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता, विशिष्ट कर्मियों का अभिनंदन और कर्तव्य की राह में सर्वोच्च बलिदान देने वालों को श्रद्धांजलि शामिल है। ये समारोह भूटान के लोगों के साथ परियोजना दंतक के अटूट बंधन को भी रेखांकित करते हैं। परियोजना दंतक अपनी 65 वर्षों की विशिष्ट सेवा पूरी कर रही है और यह इंजीनियरिंग उत्कृष्टता, अटूट समर्पण और भारत और भूटान के बीच गहरी मित्रता का प्रतीक है। यह परियोजना न केवल सड़कों और बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रही है, बल्कि दोनों देशों के बीच सद्भावना के स्थायी सेतु भी बना रही है।
--आईएएनएस
ओपी/पीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation






















