नेपाल में भारतीय सामान पर कस्टम ड्यूटी को लेकर भारत ने जताई चिंता, बातचीत जारी
नई दिल्ली, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने गुरुवार को कहा कि भारत को उन खबरों की जानकारी है, जिनमें बताया जा रहा है कि नेपाल अब सीमा पार से आने वाले यात्रियों से कस्टम ड्यूटी ले रहा है, अगर वे भारत से खरीदा हुआ 100 नेपाली रुपए (एनपीआर) से ज्यादा का सामान साथ ला रहे हैं।
नई दिल्ली में साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान एमईए के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत इस मुद्दे पर नेपाल के साथ लगातार बातचीत कर रहा है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, हमने भी ऐसी खबरें देखी हैं कि नेपाली अधिकारी एक पुराने नियम को लागू कर रहे हैं, जिसके तहत अगर कोई व्यक्ति भारत से खरीदा हुआ 100 नेपाली रुपए से ज्यादा का सामान लेकर आता है तो उस पर कस्टम ड्यूटी ली जाती है। हमें समझ में आता है कि नेपाल सरकार ने यह कदम मुख्य रूप से गैर-आधिकारिक व्यापार और तस्करी को रोकने के लिए उठाया है। हमने यह भी देखा है कि नेपाल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि जो लोग अपने निजी या घरेलू इस्तेमाल का सामान ला रहे हैं, उन्हें रोका नहीं जाएगा। हम इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं और बातचीत कर रहे हैं।”
इससे पहले आईएएनएस की रिपोर्ट में बताया गया था कि नेपाल सरकार के इस फैसले की सीमा से लगे इलाकों में काफी आलोचना हो रही है, क्योंकि वहां के लोग लंबे समय से सस्ते सामान के लिए भारत के बाजारों पर निर्भर रहते हैं।
नेपाल सरकार ने पिछले कुछ दिनों में इस नियम को सख्ती से लागू करना शुरू किया है। यह नियम कई साल पहले बनाया गया था, लेकिन सीमा क्षेत्रों के लोगों की दिक्कतों की वजह से इसे लागू नहीं किया जा रहा था। अब नई सरकार के इसे लागू करने से स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ गई है।
नेपाल-इंडिया ओपन बॉर्डर इंटरैक्शन ग्रुप, जो एक सामाजिक संगठन है, ने शनिवार को सरकार से इस नीति में तुरंत बदलाव करने की मांग की। उनका कहना है कि इससे सीमा पर रहने वाले लोगों को बेवजह परेशानी हो रही है।
इस समूह ने अपने बयान में कहा कि नेपाल और भारत के बीच सदियों पुराने सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रिश्ते हैं, इसलिए सरकार को ऐसे फैसले लेने चाहिए जो लोगों के लिए आसान हों और आपसी संबंधों को मजबूत करें।
समूह ने मांग की कि 100 नेपाली रुपए से ज्यादा के सामान पर कस्टम ड्यूटी लगाने का नियम तुरंत खत्म किया जाए। उनका कहना है कि यह नियम गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए ज्यादा मुश्किल पैदा करता है और इसे लागू करना भी आसान नहीं है। इसके बजाय घरेलू इस्तेमाल के सामान पर कोई ड्यूटी नहीं होनी चाहिए।
नेपाल के कस्टम विभाग के निदेशक किशोर बरतौला ने कहा कि यह नियम तस्करी को रोकने के लिए लागू किया गया है। तस्कर आम लोगों का इस्तेमाल करते हैं, जो भारत से बार-बार थोड़ा-थोड़ा सामान लाते हैं और उस पर ड्यूटी नहीं देते। बाद में इस सामान को इकट्ठा करके बड़े पैमाने पर बेच दिया जाता है। वैसे भी 100 नेपाली रुपए से ज्यादा के सामान पर ड्यूटी लेने से सरकार को ज्यादा राजस्व नहीं मिलता।
--आईएएनएस
एवाई/एबीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
भारत ने नेपाल के झापा में स्कूल निर्माण में मदद की
काठमांडू, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। पूर्वी नेपाल के झापा जिले स्थित गौरादहा नगरपालिका में भारत सरकार की अनुदान सहायता से एक स्कूल भवन का निर्माण किया जा रहा है।
भारतीय दूतावास ने एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि कोशी प्रांत के मुख्यमंत्री हिकमत कुमार कार्की, काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास की काउंसलर गीतांजलि ब्रैंडन और गौरादहा नगरपालिका के महापौर छत्रपति सुबेदी ने गुरुवार को श्री जनता माध्यमिक विद्यालय में एक नए भवन के निर्माण की संयुक्त रूप से आधारशिला रखी।
स्कूल के बुनियादी ढांचे का निर्माण भारत सरकार की लगभग 58 मिलियन नायरा की वित्तीय सहायता से किया जा रहा है। दूतावास के अनुसार, यह परियोजना उच्च प्रभाव सामुदायिक विकास परियोजना (एचआईसीडीपी) के अंतर्गत आती है और इसे झापा के गौरादहा नगरपालिका के माध्यम से कार्यान्वित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री कार्की और अन्य हितधारकों ने नेपाल को भारत द्वारा दिए जा रहे निरंतर विकासात्मक समर्थन की सराहना की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नई अवसंरचना से नगरपालिका में छात्रों और शिक्षकों दोनों के लिए सीखने के माहौल में उल्लेखनीय सुधार होगा।
दूतावास ने कहा, भारत और नेपाल करीबी पड़ोसी होने के नाते कई क्षेत्रों में व्यापक सहयोग बनाए रखना जारी रखते हैं।
इसमें आगे कहा गया है कि इस तरह की सामुदायिक विकास परियोजनाओं का कार्यान्वयन नेपाल के विकास प्रयासों के लिए भारत के निरंतर समर्थन को रेखांकित करता है, विशेष रूप से शिक्षा जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को बढ़ाने के संबंध में।
एचआईसीडीपी कार्यक्रम भारत-नेपाल विकास साझेदारी का एक प्रमुख स्तंभ बनकर उभरा है, और इस योजना के तहत मिलने वाली धनराशि नेपाल में जमीनी स्तर के विकास में सहयोग करती है।
2003 में शुरू की गई एचआईसीडीपी को पहले लघु विकास परियोजनाओं के रूप में जाना जाता था। यह पहल स्थानीय अधिकारियों के माध्यम से नेपाल में छोटे पैमाने की अवसंरचना और सामुदायिक परियोजनाओं का समर्थन करती है।
यह कार्यक्रम नेपाल सरकार द्वारा पहचाने गए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर केंद्रित है, जिनमें स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, स्वच्छता और जल निकासी, ग्रामीण विद्युतीकरण, जलविद्युत और नदी प्रशिक्षण कार्य शामिल हैं।
इस पहल को महत्वपूर्ण बढ़ावा देते हुए जनवरी 2024 में हुए एक नए समझौते ने प्रति परियोजना भारतीय वित्तीय सहायता की सीमा को 5 मिलियन एनपीआर से बढ़ाकर 20 मिलियन एनपीआर करने का मार्ग प्रशस्त किया।
--आईएएनएस
डीकेपी/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation




















