धनबाद के किसानों के लिए अच्छी खबर, अच्छी क्वालिटी वाले फलदार पौधे अब कम कीमत पर मिलेंगे
Jharkhand News: झारखंड के धनबाद में किसानों के लिए बहुत अच्छी खबर है. जिले में बागवानी को बढ़ावा देने के लिए एक नई पहल शुरू की जा रही है. अब बड़ी संख्या में अच्छी क्वालिटी वाले फलदार पौधे स्थानीय स्तर पर उगाए जाएंगे. इसका मतलब है कि किसानों को अच्छे पौधों के लिए बाहरी स्रोतों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा; इसके बजाय, उन्हें किफायती दरों पर स्वस्थ और अच्छी क्वालिटी वाले पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे.
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बागवानी विकास योजना के तहत, जिले में ग्राफ्टिंग और एयर-लेयरिंग (गुटी) तकनीकों का उपयोग करके लगभग 25,000 फलदार पौधे तैयार किए जाएंगे. पौधे तैयार होने के बाद, उन्हें एक साल तक पाला-पोसा जाएगा और फिर बहुत कम कीमत पर किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा. विभाग की इस पहल से जिले में फलों के बागों का विस्तार होने और किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद है.
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इस योजना के तहत, धनबाद के तोपचांची और गोविंदपुर ब्लॉक की बागवानी नर्सरियों में फलदार पौधे उगाए जाएंगे. आम, अमरूद और नींबू सहित कई तरह के पौधे तैयार किए जाएंगे. पौधों को तैयार करने के लिए ग्राफ्टिंग और एयर-लेयरिंग जैसे वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल किया जाएगा.
इस प्रक्रिया में बीज से उगाए गए लगभग एक साल पुराने पौधों का इस्तेमाल किया जाएगा. विभाग का लक्ष्य स्वस्थ पौधे तैयार करना है जो किसानों के खेतों में लगाए जाने पर अच्छी तरह से बढ़ें. इससे यह सुनिश्चित होगा कि किसानों को अच्छी क्वालिटी के पौधे मिलें, जिससे फलों का उत्पादन बढ़ेगा.
पौधों की क्वालिटी पर खास जोर
बागवानी विभाग ने पौधों की क्वालिटी के बारे में स्पष्ट मानक तय किए हैं. पौधों को एक निश्चित आकार के काले पॉलीथीन बैग में रखा जाएगा. इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि पौधों की जड़ें मजबूत और घनी हों और पौधे बीमारियों से मुक्त हों. अच्छी क्वालिटी वाले पौधों से किसानों को लंबे समय तक फायदा होता है.स्वस्थ पौधों के अच्छी तरह से बढ़ने की संभावना अधिक होती है, जिससे बागवानी करने वालों के लिए अच्छी फसल की उम्मीद बढ़ती है.
उत्पादन और एक साल की देखभाल के लिए ₹60
विभाग ने प्रति पौधा ₹60 की दर तय की है, जिसमें उत्पादन और एक साल तक की देखभाल दोनों शामिल हैं. चुनी गई संस्था इस एक साल की अवधि में पौधे तैयार करने और उनकी देखभाल करने के लिए ज़िम्मेदार होगी। इस व्यवस्था का मकसद सिर्फ पौधे उगाना नहीं है, बल्कि यह पक्का करना है कि वे किसानों तक अच्छी हालत में पहुंचें. इससे किसानों को शुरुआत से ही मजबूत और अच्छी क्वालिटी के पौधे मिल सकेंगे.
योग्य संस्थाओं से आवेदन आमंत्रित
ज़िला बागवानी कार्यालय ने पौधे उगाने के लिए योग्य संस्थाओं और नर्सरियों से रेट कोटेशन (दरें) मांगे हैं. केंद्र या राज्य सरकारों से मान्यता प्राप्त संस्थाएं, नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड में रजिस्टर्ड एजेंसियां और झारखंड के बागवानी निदेशक द्वारा सूचीबद्ध संस्थाएं आवेदन करने के लिए योग्य हैं. रेट कोटेशन सीलबंद लिफाफे में जमा करने होंगे. विज्ञापन छपने की तारीख से एक हफ्ते के अंदर ऑफिस के समय में आवेदन जमा किए जा सकते हैं. चुनी गई संस्था को तय क्वालिटी मानकों के अनुसार पौधे तैयार करने होंगे.
किसानों को सीधा फायदा
उम्मीद है कि इस योजना से ज़िले के किसानों को सबसे ज़्यादा फ़ायदा होगा। उगाए गए फलदार पौधे किसानों को बहुत कम दरों पर उपलब्ध कराए जाएंगे. इससे किसान चाहे वे नए बाग लगा रहे हों या मौजूदा बागों का विस्तार कर रहे हों, कम लागत पर अच्छी क्वालिटी के पौधे ले सकेंगे. पौधों की स्थानीय उपलब्धता से किसानों का समय भी बचेगा और ट्रांसपोर्टेशन का खर्च भी कम होगा. इसके अलावा, एक ही जगह पर तैयार किए गए अच्छी क्वालिटी के पौधे किसानों को ज़्यादा विकल्प देंगे.
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हुंडई मोटर इंडिया 2030 तक कनेक्टेड कारों की बिक्री 20 लाख तक ले जाने की बना रही योजना
नई दिल्ली, 10 अगस्त (आईएएनएस)। हुंडई मोटर इंडिया लिमिटेड (एचएमआईएल) ने सोमवार को ऐलान किया कि उसकी योजना 2030 तक कुल 20 लाख कनेक्टेड कारों की बिक्री करना है, वहीं, भारतीय सड़कों पर कंपनी की 8 लाख से ज्यादा कनेक्टेड कारें मौजूद हैं।
वहीं, 2027 तक एचएमआईएल 10 लाख कनेक्टेड कारों की बिक्री का लक्ष्य बना रही है।
हुंडई मोटर इंडिया के बयान में कहा गया है कि एचएमआईएल के एआई-पावर्ड कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म हुंडई ब्लूलिंक को ग्राहकों से मिल रहे जबरदस्त रिस्पॉन्स से कंपनी को अपना लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी।
बयान में आगे कहा गया है कि अपने मजबूत पोर्टफोलियो के दम पर एचएमआईएल का लक्ष्य 2030 तक 20 लाख कनेक्टेड कारों की बिक्री का आंकड़ा पार करना है।
ब्लूलिंक सुरक्षा और सुविधा से जुड़े 70 से ज्यादा फीचर देता है। इनमें रिमोट व्हीकल मॉनिटरिंग, व्हीकल हेल्थ डायग्नोस्टिक्स, लोकेशन ट्रैकिंग, ट्रिप हिस्ट्री, रिमोट कमांड, हुंडई पे से इन-कार पेमेंट, डिजिटल की, डिजिटल पासपोर्ट, रिमोट इमोबिलाइजर और होम-टू-कार कनेक्टिविटी शामिल हैं।
कंपनी ने बताया कि ब्लूलिंक पांच भाषाओं में 450 से ज्यादा एआई-पावर्ड वॉइस कमांड को भी सपोर्ट करता है।
एचएमआईएल ने कहा कि उसकी आने वाली मास-मार्केट इलेक्ट्रिक एसयूवी के सभी वैरिएंट में स्टैंडर्ड तौर पर नेक्स्ट-जेनरेशन कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी शामिल होगी।
एचएमआईएल के एमडी और सीईओ तरुण गर्ग ने कहा, यह कनेक्टेड और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के तालमेल को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है, साथ ही यह ग्राहकों को भविष्य के लिए तैयार ओनरशिप अनुभव भी देता है।
गर्ग ने आगे कहा, कनेक्टेड गाड़ियों को तेजी से अपनाना ग्राहकों की बदलती उम्मीदों और मोबिलिटी को आकार देने में टेक्नोलॉजी की बढ़ती भूमिका को दिखाता है।
ब्लूलिंक को 2019 में हुंडई वेन्यू में लॉन्च किया गया था। इसके बाद 2020 में इसमें ओवर-द-एयर मैप अपडेट जोड़े गए और 2022 में नेक्स्ट-जेनरेशन एवीएनटी कनेक्टेड टेक्नोलॉजी पेश की गई।
कंपनी ने 2025 में कंट्रोलर ओटीए अपडेट क्षमता के साथ कनेक्टेड कार नेविगेशन कॉकपिट लॉन्च किया, जो भारत के लिए एचएमआईएल के सॉफ्टवेयर-डिफाइंड व्हीकल (एसडीवी) रोडमैप में एक अहम कदम है।
बयान में बताया गया है कि ब्लूलिंक ने एसओएस और रोडसाइड असिस्टेंस सर्विस के जरिए 5 लाख से ज्यादा गाड़ी मालिकों की मदद की है। इसने लगभग 15,000 क्रैश नोटिफिकेशन मामलों में मदद की है और गाड़ी को ट्रैक करने व रिकवर करने की कोशिशों में कानून लागू करने वाली एजेंसियों की सहायता की है।
--आईएएनएस
एबीएस
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