'मराठी भाषा सीखो नहीं तो परमिट जप्त', महाराष्ट्र में इस नए नियम ने ऑटो-टैक्सी चालकों की बढ़ाई टेंशन
Mumbai Language Dispute: महाराष्ट्र में अगर ऑटो- टैक्सी चलाना है तो मराठी बोलना होगा ? महाराष्ट्र सरकार के मंत्री प्रताप सरनाईक ने ऐलान कर दिया है कि 1 मई से जो कोई ऑटो - टैक्सी ड्राइवर मराठी नहीं बोल सकता उसके खिलाफ सख्ती से कार्यवाई होगी उसका परमिट भी रद्द कर दिया जाएगा. सरकार के इस फैसले के बाद सियासी संग्राम शुरू हो गया है और हर पार्टी इस आग में अपनी राजनीति सेकने में लग गई है. एक तरफ जहां ऑटो टैक्सी यूनियन ने सरकार के इस आदेश के खलाफ 4 मई को महाराष्ट्र भर में हड़ताल की चेतावनी वहीं कई अन्य राजनीतिक पार्टियां ऑटो टैक्सी चालकों को मराठी सिखाने में लगे हैं. क्या है पूरा मामला देखिए हमारे इस खास रिपोर्ट में.
कब से लागू होगा नियम
महाराष्ट्र में एक बार फिर से मराठी और गैर मराठी मुद्दा गरमाया हुआ है. इस बार चिंता एमएनएस की दादागिरी नहीं बल्कि महाराष्ट्र सरकार का वो नियम है को कहता है की अगर कोई ऑटो टैक्सी ड्राइवर मराठी नहीं बोलता तो उसके खलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा और उसका ऑटो चलाने का परमिट भी रद्द कर दिया जाएगा. महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने ऐलान किया है कि 1 मई से मराठी भाषा वाले नियम को सख्ती से लागू किया जाएगा और संबंधित ऑटो टैक्सी चालकों पर कार्यवाई की जाएगी.
ऑटो-टैक्सी चालकों ने दी हड़ताल की चेतावनी
सरकार के इस फैसले के बाद एक तरफ जहां महाराष्ट्र में सियासी बवाल मचा है वहीं ऑटो टैक्सी चालकों ने इसके विरोध में हड़ताल करने की भी चेतावनी दी है. वहीं खुद बीजेपी नेताओं का कहना है की कुछ दिन पहल तक धड़ल्ले से परमिट बांटे जा रहे थे और अब अचानक लाए गए इस नियम से विवाद बढ़ेगा. वहीं बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता ने परिवहन मंत्री और शिवसेना नेता प्रताप सरनाईक पर तीखा हमला भी किया.
ऑटो वालों को मराठी सिखाएंगे MNS नेता
वहीं मराठी-गैर मराठी के इस मामले में भला राज ठाकरे की पार्टी MNS कैसे पीछे रहती. इस मामले में MNS का एक अलग ही स्टैंड नजर आ रहा है. मुंबई से सटे मीरा भायंदर में एमएनएस नेताओं ने ऑटो वालों को मराठी सिखाने का क्लास शुरू किया है. वहीं जिन ऑटो चालकों को मराठी आती है उसके ऑटो पर स्टिकर्स भी लगाए जा रहे हैं.
कई ऑटो चालक कर रहे फैसले का समर्थन
बता दें की परिवहन मंत्री के इस फैसले के बाद से एक तरफ जहां ऑटो चालकों में जबरदस्त नाराजगी दिखाई दे रही है वहीं कुछ ऐसे ऑटो चालक भी है जो उत्तरप्रदेश और बिहार से होने के बौजूद सरकार के फैसले का समर्थन कर रहे हैं. सवाल ये है की क्या सरकार ऑटो चालकों पर ये नियम सख्ती से लागू करने में कामयाब हो पाएगी या फिर ऑटो टैक्सी यूनियन के हड़ताल की चुनौती के आगे सरकार समझौते के लिए मजबूर होगी. वहीं इस पूरे मामले को राजनीतिक दृष्टिकोन से भी देखा जा रहा है और सवाल पूछा जा रहा है कि जब चुनाव के दौरान गैरमराठी वोटर्स को अपने साथ करने के लिए सरकार हर कोशिश कर रही थी वहीं अब सरकार आने के बाद गैर मराठीयों के साथ ये पराया व्यवहार क्यों ?
नई दिल्ली : चार देशों के डिप्लोमैट्स ने राष्ट्रपति मुर्मु को सौंपे अपने क्रेडेंशियल
नई दिल्ली, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को चार देशों के डिप्लोमैट का क्रेडेंशियल स्वीकार किया। राष्ट्रपति भवन में आयोजित क्रेडेंशियल प्रेजेंटेशन सेरेमनी के दौरान कांगो और नामीबिया समेत चार देशों के डिप्लोमैट्स ने अपना पहचान पत्र राष्ट्रपति को सौंपा।
जिन डिप्लोमैट्स ने क्रेडेंशियल राष्ट्रपति मुर्मु को सौंपे, उनमें लाओ पीपुल्स डेमोक्रेटिक रिपब्लिक की राजदूत विथाया जायवोंग, कांगो डेमोक्रेटिक रिपब्लिक की राजदूत एमिली अयाजी मुशोबेक्वा, नामीबिया रिपब्लिक के उच्चायुक्त विंग कमांडर एलेक्स लुन्याजो तुकुहुपवेले (रिटायर्ड) और गिनी-बिसाऊ रिपब्लिक के राजदूत एंटोनियो सेरिफो एम्बालो के नाम शामिल हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राष्ट्रपति कार्यालय ने लिखा, राष्ट्रपति भवन में लाओ पीपुल्स डेमोक्रेटिक रिपब्लिक की राजदूत विथाया जायवोंग, कांगो डेमोक्रेटिक रिपब्लिक की राजदूत एमिली अयाजी मुशोबेक्वा, नामीबिया रिपब्लिक के उच्चायुक्त विंग कमांडर एलेक्स लुन्याजो तुकुहुपवेले (रिटायर्ड) और गिनी-बिसाऊ रिपब्लिक के राजदूत एंटोनियो सेरिफो एम्बालो की तरफ से दिए गए परिचय पत्र को स्वीकार किया।
राष्ट्रपति भवन में आयोजित क्रेडेंशियल प्रेजेंटेशन सेरेमनी, भारत में अपने-अपने देशों को प्रतिनिधित्व करने के लिए राजदूतों को आधिकारिक मान्यता देती है।
इससे पहले दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग के सम्मान में राष्ट्रपति मुर्मु ने राजकीय भोज का आयोजन किया। यह राष्ट्रपति ली का पहला भारत दौरा था। राजकीय भोज में शामिल होने के लिए राष्ट्रपति ली अपनी पत्नी किम हे-क्युंग के साथ राष्ट्रपति भवन पहुंचे। राष्ट्रपति ली की पत्नी दक्षिण कोरिया के पारंपरिक पोशाक में राजकीय भोज में शामिल हुईं।
ली ने राष्ट्रपति मुर्मु के जीवन का संक्षिप्त वर्णन करते हुए कहा, मैं राष्ट्रपति मुर्मु की जीवन यात्रा से बहुत प्रेरित हुआ। एक ऐसी यात्रा जो सामाजिक बाधाओं और व्यक्तिगत कठिनाइयों पर विजय पाने और स्वयं को अपने समुदाय तथा वंचितों की सेवा के लिए समर्पित करने की कहानी है। मैं यह महसूस कर सका कि आज भारत जिस आत्मविश्वास का प्रदर्शन करता है, वह सीधे तौर पर राष्ट्रपति के साहस और दूरदृष्टि का परिणाम है।
दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों देशों में संभावनाएं असीम हैं। उन्होंने उम्मीद जताई, भविष्य में, हम राजनीति और अर्थशास्त्र के दायरे से आगे बढ़कर, एक-दूसरे के दृढ़ भागीदार के रूप में आगे बढ़ेंगे और मिलकर एक साझा भविष्य का निर्माण करेंगे।
--आईएएनएस
केके/एबीएम
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