Independence Day 2026: भारत के 10 सबसे घातक स्वदेशी मिसाइल सिस्टम, ब्रह्मोस से तेजस तक, आजादी के बाद भारत की रक्षा ताकत कैसे बदली?
Independence Day 2026: भारत के स्वदेशी मिसाइल कार्यक्रम को दुनिया में सबसे आगे रखा जाता है. एडवांस टेक्नोलॉजी के कारण यह चीन और अमेरिका को भी कुछ मामलों में आगे है. यह सिस्टम एयर डिफेंस, एंटी-टैंक और सटीक स्ट्राइक के लिए के लिए खास मानी जाती है. रणनीतिक महत्व, मारक क्षमता, तकनीकी उपलब्धि और सैन्य भूमिका को आधार मानें तो यह एक उपयोगी टॉप-10 सूची में हैं. DRDO के अनुसार, भारत के स्वदेशी मिसाइल विकास में अग्नि, पृथ्वी, आकाश और अन्य प्रणालियों ने रक्षा में आत्मनिर्भरता को काफी बढ़ावा दिया है.
आजादी के बाद भारत की रक्षा व्यवस्था ब्रिटिश दौर से मिली सैन्य संरचना, हथियारों और सीमित घरेलू औद्योगिक क्षमता पर आश्रित थी. इसके बाद भारत की रक्षा ताकत कई महत्वपूर्ण चरणों से गुजरते हुए आज परमाणु प्रतिरोध, स्वदेशी मिसाइल, एयर डिफेंस, लड़ाकू विमान, नौसैनिक शक्ति और अंतरिक्ष-आधारित क्षमताओं तक पहुंची.
1947 से भारत की रक्षा ताकत में बड़ा बदलाव
1. 1947–1962: विरासत में मिली सैन्य क्षमता
आजादी के शुरुआती वर्षों में भारत के पास प्रशिक्षित सेना तो थी. मगर आधुनिक हथियारों और रक्षा उत्पादन का घरेलू आधार सीमित था. 1962 के भारत-चीन युद्ध ने सैन्य आधुनिकीकरण की जरूरत को स्पष्ट किया.
2. 1960–70 का दशक: आत्मनिर्भरता की शुरुआत
भारत ने रक्षा उत्पादन और अनुसंधान संस्थानों को मजबूत करना शुरू किया. Defence Research and Development Organisation (DRDO) की भूमिका बढ़ी. घरेलू रक्षा तकनीक विकसित करने पर जोर आया.
3. 1974: परमाणु क्षमता का प्रदर्शन
भारत के पहले परमाणु परीक्षण ने उसकी रणनीतिक क्षमता को एक नया आयाम दिया. आगे चलकर मिसाइल और परमाणु प्रतिरोध क्षमता भारत की सुरक्षा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी.
4. 1980–90 का दशक: मिसाइल कार्यक्रम का दौर
1983 में Integrated Guided Missile Development Programme (IGMDP) शुरू हुआ. इससे पृथ्वी,अग्नि, आकाश और नाग जैसी प्रणालियों के विकास को गति मिली. यह भारत के स्वदेशी मिसाइल उद्योग के लिए निर्णायक मोड़ था.
5. 1998 के बाद: परमाणु प्रतिरोध और लंबी दूरी की क्षमता
1998 के परमाणु परीक्षणों के बाद भारत ने अपने रणनीतिक प्रतिरोध को विकसित किया. अग्नि श्रृंखला ने लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता को मजबूत किया.
6. 2000–2010: आधुनिक नेटवर्क और सटीक हथियार
भारत ने केवल पारंपरिक हथियारों पर निर्भर रहने के बजाय सटीक हथियार, आधुनिक रडार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और नेटवर्क-केंद्रित युद्ध क्षमता पर जोर बढ़ाया.
भारत के 10 प्रमुख स्वदेशी मिसाइल सिस्टम
अग्नि सीरीज- भारत की रणनीतिक बैलिस्टिक मिसाइल श्रृंखला है. अग्नि-5 जैसे सिस्टम भारत की लंबी दूरी की रणनीतिक प्रतिरोध क्षमता का अहम हिस्सा माना जाता है. 2024 के मिशन दिव्यास्त्र में अग्नि-5 के साथ MIRV तकनीक का प्रदर्शन हुआ था.
ब्रह्मोस-भारत और रूस का संयुक्त रूप से विकसित सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सिस्टम है. इसे जमीन, समुद्र और हवा से लॉन्च किया जा सकता है और यह एंटी-शिप तथा लैंड-अटैक दोनों की भूमिकाओं में उपयोग की जाती है. इसे पूरी तरह “स्वदेशी” कहना सही नहीं होगा. यह भारत-रूस का संयुक्त विकास है.
आकाश- स्वदेशी सतह से हवा में मार करने वाली एयर-डिफेंस प्रणाली है. यह कई लक्ष्यों को एक साथ निशाना बनाने में सक्षम है और भारतीय वायुसेना तथा थलसेना में अहम है.
पृथ्वी सीरीज- भारत के शुरुआती स्वदेशी सतह से सतह पर मार करने वाले बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम की आधारशिला. यह उसी Integrated Guided Missile Development Programme (IGMDP) की प्रमुख उपलब्धियों में थी, जिसने भारत के आधुनिक मिसाइल उद्योग की नींव रखी.
प्रलय-आधुनिक सामरिक युद्धक्षेत्र के लिए विकसित सतह से सतह पर मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली है. इसकी खासियत रणनीतिक मिसाइलों की तुलना में ज्यादा टैक्टिकल स्ट्राइक की भूमिका है.
अस्त्र- लड़ाकू विमानों के लिए स्वदेशी हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल श्रृंखला है. इसका महत्व बड़ा है क्योंकि इससे भारत की एयर-टू-एयर हथियार तकनीक में आत्मनिर्भरता बढ़ी है.
नाग - तीसरी पीढ़ी की स्वदेशी एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल है. यह मूल IGMDP की पांच प्रमुख मिसाइल परियोजनाओं में शामिल थी.
रुद्रम- दुश्मन के रडज्ञर और एयर-डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाने को लेकर विकसित स्वदेशी एंटी-रेडिएशन मिसाइल है. यह भारतीय लड़ाकू विमानों की SEAD/DEAD क्षमता को मजबूत करने में अहम है.
स्वदेशी लॉन्ग-रेंज क्रूज मिसाइल विकास -भारत की लंबी दूरी की क्रूज मिसाइल काफी अहम मानी जाती है. इस तकनीकी यात्रा ने आगे अधिक स्वदेशी क्रूज-मिसाइल प्रणालियों के विकास का रास्ता तैयार किया. प्रहार -कम दूरी की सामरिक स्ट्राइक क्षमता को लेकर विकसित स्वदेशी मिसाइल प्रणाली है. यह भारत के सटीक स्ट्राइक विकल्पों में से एक है.
राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत विकसित करने का प्रयास
भारत में मिसाइल यात्रा की शुरुआत 1983 के IGMDP से शुरू हुई है. इस कार्यक्रम ने पृथ्वी, अग्नि, आकाश, त्रिशूल और नाग जैसी अलग-अलग श्रेणियों की मिसाइल तकनीकों को एक राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत विकसित करने का प्रयास किया. इसके बाद भारत केवल बैलिस्टिक मिसाइलों तक सीमित नहीं रहा-एयर डिफेंस, एयर-टू-एयर, एंटी-टैंक, एंटी-रेडिएशन और सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों तक क्षमता भी फैली है. आज अग्नि और पृथ्वी से लेकर आकाश और ब्रह्मोस तक यह बदलाव भारत की बढ़ती रक्षा-तकनीकी आत्मनिर्भरता को दिखाता है. तेजस मिसाइल सिस्टम नहीं है, बल्कि स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट है.
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